Tag Archives: Abusive women

Two Faces Of Masculinity From The Crude Real World Supposedly Belonging To Men In The Eyes Of Feminists!

Men Will Keep Losing Lives For The Sake Of Society!

Men Will Keep Losing Lives For The Sake Of Society!

*Scene One*

This year in the month of September a senior police officer, belonging to IPS cadre, tried to commit suicide in Maharashtra. Such news report now do not stir the emotions of common mass other than creating short-lived ripples within some sensitive minds. Even when it forces the thinking class to take cognizance of such news items, the centre of gravity in these discussions remain governed by flimsy causes and after a certain period the issue gets swept under the carpet.

In this particular sensational incident, this senior police officer was at the receiving end of humiliating gestures at the hands of another junior officer, belonging to IAS cadre. This harassment continued for a certain period of time and seeing no way to get out of this mess this hard-working and honest police official set himself on fire. The reason why this police officer faced the ire of this junior IAS officer was that he had found this junior officer responsible for alleged irregularities in the Maharashtra State Road Transport Corporation (MSRTC). This IPS officer in his capacity as the Chief Vigilance Officer of the MSRTC submitted an inquiry report, which found this officer guilty, who was, ironically, the head of this department at that point of time.

That’s one of the few examples from world of ours, which contradicts the claims of  feminists always unfailingly harping on the same string that world belongs to men! Unfortunately, they never realize that it’s rough, cruel and hellish for men-at-large for most of the time. The wives of such hard-working honest officials, who see such husbands as no more than a source to have ready cash all the time for their sense gratification, either in form of buying costly jewelries, costly attires, rarely come to realize what’s actually the state of affairs in lives of the their husbands. Worse, being unaware of the harsh realities prevailing in the world of men, the women show no haste in throwing tantrums on one pretext or another.

Husbands usually do not protest over such whimsical demands of wives since in their eyes giving way to demands of their wives appears to be some sort of fulfilling one’s duty towards them! And that’s how women come to rule over them and in turn exploit them.  Ironically, now laced with new rights, wives have become more possessive, greedy and irrational. It’s a sad declaration but it’s true that scenario would not change in future. It would remain the same, wherein husbands like, bonded labourers, would continue to serve their wives, even as they remained at the receiving end of most tragic developments in world outside the confines of drying room.

Suicide By Men Is Not A Serious Issue For Governments!

Suicide By Men Is Not A Serious Issue For Governments!

  *Scene Two*      

In one of the famous restaurants of Allahabad, popular among love birds, arrived one such couple. Everything went alright between these two lovers, enjoying a happy conversation amid refreshments. Suddenly, a call arrived on the phone of male friend and he went on to have a long conversation. Being suspicious about the nature of the phone call, the female partner inquired about it from her lover. The explanation offered by the male partner did not appear convincing to her and that led to heated debate between the two. The happy mood gave way to high voltage drama marred by panic and tension. The female partner, who belonged to elite class, being unaware of the consequences of involving police, telephoned the police station of that area stating she was being sexually assaulted. The police acted in prompt manner, beating his male partner black and blue, right in front of her eyes, dragged him to the police station.

The girl who did not imagine such fatal consequences and to an extent feeling sorry about the whole episode informed the police officer in the police station that her complaint was fake! She telephoned merely to teach a fitting lesson to his male partner! Perhaps she did not want that matter should reach to their homes, which was going to be the case in next few minutes. The police, taking a liberal view on the whole episode, released both of them warning them not to indulge in such drama again, which involved police. The couple promising them to behave responsibly left the police station with happy and relaxed faces. Such boyfriends, new face of masculinity in modern times would grow in numbers, willing to serve their girlfriends at all costs, no matter if it involves putting at stake one’s self-respect! 

Girlfriends Would Continue To Exploit Men At All Levels!

Girlfriends Would Continue To Exploit Men At All Levels!


India Today 

News Item Published In Dainik Jagaran

Hindi Version Of This Article By Me

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यथार्थ से उठायी गयी मर्दानगी की दो अलग-अलग तस्वीरे: अफ़सोस ऐसा होता ही रहेगा!

… और पुरुष मर्दानगी के चलते ऐसे ही मरते रहेंगे उस समाज के लिए जो उनकी क़द्र नहीं करता :-(

… और पुरुष मर्दानगी के चलते ऐसे ही मरते रहेंगे उस समाज के लिए जो उनकी क़द्र नहीं करता 😦

                                                     *तस्वीर एक* 
इसी साल सितम्बर महीने में महाराष्ट्र में एक सीनिअर पुलिस अफसर ने आत्महत्या करने की कोशिश की. ऐसी बाते हमारे भारतीय परिदृश्य में आम जनमानस के एक अल्पकालिक सनसनी के सिवाय ज्यादा कुछ पैदा नहीं करती। कुछ बतकही होती है इधर उधर की कुछ समय तक और फिर मामला ठंडा पड़ जाता है. लेकिन मै कुछ सोचने पर मजबूर हो गया. इस घटना के पीछे इस अधिकारी की प्रताड़ना थी जो ये एक अपने से जूनियर आई ए एस के हाथो कई वर्षो से झेल रहा था. वो भी इस वजह से कि इस अफसर ने ईमानदारी से काम करते हुए इस अधिकारी को एक इन्क्वायरी रिपोर्ट में कुछ मामलो में दोषी पाया था। और बात इस कदर बढ़ी कि इस अफसर ने अपने को आग के हवाले कर लिया। 

इस घटना का उल्लेख करने की वजह ये है कि जिन ऐसी अफसरो की बीवियाँ गहनो और महँगी साड़ियों से सुसज्जित पति को प्राप्त हर सुख सुविधा का भोग करती है उनको शायद इस बात का जरा सा भी अंदेशा नहीं रहता कि उनके पति किस तरह के समस्यायों से जूझ रहे है. उस पर से तुर्रा ये कि किसी चीज़ की कमी बेसी पर आसमान सर पर उठा लेने में जरा भी देर नहीं लगाती है. और ये घर घर की कहानी है. इस घर और ऑफिस के दो पाटो में हर मर्द पिस जाता है लेकिन अपने शोषण पर उफ़ नहीं करता क्योकि ये उसको अपना कर्त्वय लगता है. और जबकि इनकी पत्नियाँ हर तरह के अधिकारो से लैस इस तरह के मर्दो को कोल्हू का बैल बना के रखती है. और जिस तरह से इनको अधिकार मिलते ही जा रहे है उससे नहीं लगता कि आने वाले समय में परिदृश्य बदलेगा।     

                                                      *तस्वीर दो*

इलाहाबाद का एक प्रसिद्ध रेस्टॉरंट जहा हमेशा की तरह आधुनिक प्यार को विस्तार देते कई प्रेमी प्रेमिकाएँ बैठे है. इन्ही तमाम जोड़ो में से एक के बीच ऐसा हुआ. एक प्रेमी प्रेमिका बैठे हुए है कि अचानक प्रेमी का मोबाइल बज उठता है जिस पर वो किसी से लम्बी बात करता है तो प्रेमिका ने डिटेल्स लेनी चाहिए लेकिन प्रेमी के जवाब से संतुष्ट ना हुई. और जो इन दोनों के बीच मधुर बातो का सिलसिला चल रहा था वो तकरार के भयंकर रूप में परिवर्तित हो गया. बात यहाँ तक बढ़ी कि प्रेमिका ने तुरंत पुलिस को फ़ोन पर सूचित किया कि उसके साथ छेड़ छाड़ हो रही है. ऐसे मामलो में अति सक्रिय पुलिस तुरंत आ पहुँची और उसके बॉयफ्रैन्ड को तुरंत मारते पीटते थाने ले गए. प्रेमिका चूँकि एलिट क्लास से थी सो उसको अंदाजा ना था कि फ़ोन करने पर ऐसा भी हो सकता है. बात क्योकि अब थाने और घरवालो तक पहुचने वाली थी सो प्रेमिका ने मामले को खत्म करने के इरादे से सच बता दिया कि ऐसा कुछ नहीं था. वो केवल बॉयफ्रेन्ड को सबक सीखना चाहती थी. सो पुलिस ने हलकी से दोनों को चेतावनी देते हुए दोनों को छोड़ दिया। दोनों भविष्य में ऐसा ना करने की कसम खाते हुए फिर से इकट्ठा साथ निकल लिए. मर्दानगी के आधुनिक नमूने इस तरह के बॉयफ्रेंड की फसलें सदा लहलहाती रहेंगी जिसे इस तरह की लड़किया हमेशा अपने हिसाब से काटती रहेगी।


प्यार कम और तकरार ज्यादा होता है आज अधिकारो के हक़ की वजह से !!!

प्यार कम और तकरार ज्यादा होता है आज अधिकारो के हक़ की वजह से !!!



India Today

News Item Published In Dainik Jagaran.

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बंद करिए ये झूठ बोलना, ये प्रचार करना कि स्त्री जात लाचार, कमजोर, अबला, बेचारी और दुखियारी है!! स्त्रिया पुरुषो से बेहतर शोषण करती है!!!


चेहरे के पीछें जो चेहरा छुपा है उसको भी देखे

आज का युग एक विचित्र सा युग है. जब  तक आप चुप चाप सहते रहते है व्यवस्था से उपजी विकृतिया तब तक आप लायक है.  जरा सा आपने मुंह क्या खोला बस सारी व्यस्था आपके पीछे हाथ धो के पड़ जाती है.  जब तक आप स्त्री के कदमो में लोटकर उसकी हर गलत बात को सम्मानपूर्वक ग्रहण करके उसकी चरण वंदना करते रहते है तब तक ठीक और जिस दिन आपने विद्रोह किया ये कहने को प्रोग्रेसिव और समय के साथ चलने वाली व्यवस्था स्त्री के  द्वारा शोषण करने की  काबिलियत के अवलोकन के  मामले में बैकवर्ड हो जाती है.
स्त्री पुरुष  के संबंधो में यही व्यवस्था आज भी  स्त्री को आज भी आदिम युग के समकक्ष ही रखती है. मतलब  वह आज  भी एक लाचार, कमजोर, अबला,  बेचारी और दुखियारी है.  पर वास्तव में ऐसा   नहीं है ये सब जानते है  पर क्योकि   “कांफ्लिक्ट” या दरार पड़ने  से बहुत से हित  सध जाते  है इसलिए दोष की सही पहचान ना करके पुरुष को सीधा सीधा हर बात के लिए दोषी मान लिया जाता है.  ज़माने को प्रोग्रेसिव कम से कम मै तब मानूंगा जब ये ज़माना समझने लगेगा कि दोष की उत्पत्ति में स्त्री का भी उतना हाथ हो सकता है जितना एक पुरुष का. अभी कानून इस बात को कम समझता है और तथाकथित मर्द जो एक राजनैतिक पार्टी में ज्यादा पाए  जाते है वो तो बिल्कुल नहीं समझते अभी.
अमरेंद्रजी आप पे तरस  आता है पर फिर भी आप बधाई के पात्र है कम से कम आपने स्त्रियों से जुड़े उन “undercurrents” को उभारा जो सामान्यतः आज के युग जो के पुरुषो के “feminization” का  युग  है  में ज्यादा उभर के आ नहीं पाते.  आप के किसी पोस्ट में मैंने शायद ये बड़ा  अच्छा सा शेर पढ़ा था :

मैं चाहता भी यही था वो बेवफा निकले
उसे समझने का कोई तो सिलसिला निकले 


तो चलिए कम से कम एक ठोस  फायदा तो ये हुआ कि हम सब समाज की तल्ख़ सच्चाइयो से परिचित तो हुए. एक समझने का सिलसिला तो निकला कि शक्ल से भोली दिखने वाली स्त्री या भोले से दिखने वाले पुरुष  के कितने रंग हो सकते है नहीं तो सिर्फ अभी तक सब कुछ प्राइवेट ही रह जाता था. हुस्न के लाखो रंग बोलो कौन सा रंग देखोगे!!!  

कम से कम आप अपनी  “immaturity” का  शिकार होके  शोषित या घुटते रहते  तो आपको और ना हम लोगो को ये दिन देखने पड़ते  पर आपने वही ग्रामीण संस्कृति में व्याप्त भोलापन जाहिर कर दिया और आप एक  “immaturity” सें दूसरे ” “immaturity” तक वानर के नाई उछल  कूद करते रहे. पहले तो आप एक काले नागिन की पूँछ को चुहिया की  दुम  समझ के थामे रहे ये रही आपकी  पहली “immaturity ” .

दूसरी   “immaturity”  आपने ये दिखाई कि आप ने अपना कुत्तापन नहीं दिखाया. मतलब डलवा लेते गले में एक पट्टा और शोषित होते रहते जैसे आज सारे जाहिल मर्द बराबरी के नाम पे हो रहे है.. आप बगावत पे उतर आये कि भाई अब मै और शोषित नहीं होऊंगा और मामला पब्लिक “dispute ” हो गया.  आप सठिया गए और परदे के पीछे का सच आपने जाहिर कर दिया. आप ये भूल गए कि जिस आज के समाज में आप रह रहे है अगर आप स्त्री के पीछे दुम हिलाने की कला नहीं जानते  तो आप समझिये लैंड माइन पर चल रहे है.  दुम कायदे से हिला सकते हो या थूक के चाट सकते हो तब तो किसी स्त्री के पीछे पड़िये नहीं तो खामोश होके बौद्धिक जुगाली करते रहिये..

सुप्रीम कोर्ट क्या लंठो का समूह है जो कह रहा है कि जोरू की गुलामी करो जो अपनी खैरियत चाहते है..आप इतने बाँवरे हो गए कि आपने ये भी नहीं जाना कि आपकी लड़ाई सिर्फ बौराई स्त्री जात से ही नहीं उस मर्द जात से भी है  जो सिर्फ नाम के मर्द है.  आप इस विडम्बना को भी भूल  गए कि आज के युग में जब आप किसी स्त्री से सहानुभूति प्रकट करेंगे तो आप “sympathizer ” नहीं “womanizer ”   कहलायेंगे.  खैर इतना झेलने के बाद मै उम्मीद करता हू कि आप कुछ तो समझदार हुए ही होंगे..

जुस्तजू जिसकी थी उस को तो न पाया हमने
इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने… (शहरयार)

चलते चलते आपसे और अन्य से यही गुज़ारिश है कि ये  सूत्र कम से कम याद रखे कि अगर स्त्री नाम की मुसीबत  से बचना चाहते है तो: 

१. कुत्तो के  जैसे  दुम  हिलाने की कला  आती हो तो प्रेम करे वरना कुत्तो की तरह लार ना टपकाए. 
२. प्रेम में पड़के नागिन की पूँछ को  चुहिया की पूँछ ना समझे वरना अंजाम वोही होगा जो सिर्फ खुदाजी जानते होगे. 

३. स्त्री को नहीं समझेंगे उसको चाहने से पहले तो ये तय रहा कि मज़ा के बाद सजा आपसे जरूर मिलने आएगी. 


जो  पाठक कुछ मिस्सिंग सा अनुभव कर रहे हो वे सन्दर्भ में दिए गए लिंक का अनुसरण करके लेख को बेहतर समझ सकते है. वैसे अमरेंद्रजी जिनका जिक्र इस पोस्ट में आया है आप इनको फेसबुक   पे पा सकते है.
मूर्खता को छोड़कर सचेत बने

मूर्खता को छोड़कर सचेत बने


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Lawmakers Should Not Ignore The Changing Images Of Modern Women Outshining Devil

Lawmakers Should Not Ignore The Changing Images Of Modern Women Outshining Devil

It’s really baffling to anticipate that women have changed a lot but the mindset that sees them as a weaker sex remains the same. We continue to treat them as sex which cannot do anything wrong. Interestingly, it had never been the reality. Not even in times when they were icons of virtue. They are equally capable of plotting in a sinister way. In fact, they are far superior in working in evil ways.

Yet we notice that when laws are framed, they are framed treating woman as a harmless creature!  Will anybody explain me what’s the rationale behind this generosity shown by the lawmakers ?

What prevents the lawmakers from anticipating something that’s too obvious even too a person having little knowledge of women’s behaviour? This calculated ignorance on part of lawmakers have turned Indian homes into battlefields. Clash of egos is now so commonplace. The couples suffer but the policemen, lawyers, judges, women organizations and feminist institutions keep making money. The fights are also good for the economy. The couple living separate lives will be viewing television separately!

The times have really changed. Women make babies suffer but forget not to save time for friends, parties and doggies. This drama is, indeed, more comic than ”The Great Indian Laughter Challenge” and at the same time more tragic than disaster hitting the planet earth.

Lawmakers Should Not Ignore The Changing Images Of Modern Women Outshining Devil

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Was I born a masochist or did society make me this way?

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ज्ञान दत्त पाण्डेय का ब्लॉग (Gyan Dutt Pandey's Blog)। मैं गाँव विक्रमपुर, जिला भदोही, उत्तरप्रदेश, भारत में रह कर ग्रामीण जीवन जानने का प्रयास कर रहा हूँ। ज़ोनल रेलवे के विभागाध्यक्ष के पद से रिटायर रेलवे अफसर।


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