मोदी का स्वाधीनता दिवस भाषण: इसमें छुपे निहितार्थ!

प्रधानमंत्री का संबोधन कई मायनो में अद्भुत था!

प्रधानमंत्री का संबोधन कई मायनो में अद्भुत था!



मोदीजी का स्वाधीनता दिवस भाषण कई मामलो में ऐतिहासिक और विलक्षण है। ये भाषण सिर्फ वाक् कौशल का  जबरदस्त नमूना नहीं था बल्कि ये एक नेता के दृढ सोच और स्पष्ट दृष्टि का आईना था। अभी तक इस तरह के अवसरों पर दिए जाने वाले भाषण सिर्फ महज एक खानापूर्ति होते थे जिसमे साधारण जनमानस की नाममात्र की दिलचस्पी होती थी। इस बार लाल किले के प्राचीर से दिए गए भाषण में मौजूद अद्भुत तत्वों ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा और उन उदासीन वर्गों में भी जो अब तक नेताओ के भाषण की  खिल्ली उड़ाते थे कायदे से एक सन्देश गया कि बात निकलती है तो दूर तलक जाती है  और एक अकेला चना भी भाड़ फोड़ सकता है।

“यह भारत के संविधान की शोभा है, भारत के संविधान का सामर्थ्य है कि एक छोटे से नगर के गरीब परिवार के एक बालक ने आज लाल किले की प्राचीर पर भारत के तिरंगे झण्डे के सामने सिर झुकाने का सौभाग्य प्राप्त किया।  यह भारत के लोकतंत्र की ताकत है, यह भारत के संविधान रचयिताओं की हमें दी हुई अनमोल सौगात है।  मैं भारत के संविधान के निर्माताओं को इस पर नमन करता हूँ।” कांग्रेस सरकार के पतन के पीछे जो सबसे बड़ा कारण था वो ये था कि कांग्रेेस ने कभी भी संवैधानिक संस्थाओ का मोल नहीं समझा। सत्ता के नशे में डूबे निकम्मे कांग्रेसी नेताओ ने संविधान को ताक पर रख कर काम किया जिसका नतीजा ये हुआ कि संसद और सुप्रीम कोर्ट आपस में कई बार टकराव की मुद्रा में आ गए। राज्यपाल जैसे गरिमामय पद मोहरो की तरह इस्तेमाल होने लगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले कागज़ पे लिखे व्यर्थ के प्रलाप लगने लगे थे।  इस परिदृश्य में मोदी जी का संविधान के ताकत को नए मायने देना, एक संजीवनी प्रदान करना बहुत दुर्लभ घटना है। भारत ही एक ऐसा देश है जहा लोकतंत्र ने अपने को सही ढंग से विस्तार प्रदान किया है। इसका सशक्त होके उभरने में ही देश का कल्याण है।

कई बार ये लगता है कि देश में सिर्फ ब्यूरोक्रेट्स का शासन है।  ये देश उन्ही लोगो का है जो या तो सरकारी पदो पे आसीन है या उनका है जो बड़े बड़े शहरों में कॉर्पोरेट घरानो के मालिक है। इस भ्रम को मोदीजी ने बहुत बेरहमी से तोड़ दिया। इस सड़े गले से भ्रामक तथ्य को मोदी ने इस सुनहरे सच से बदल दिया कि “यह देश राजनेताओं ने नहीं बनाया है, यह देश शासकों ने नहीं बनाया है, यह देश सरकारों ने भी नहीं बनाया है, यह देश हमारे किसानों ने बनाया है, हमारे मजदूरों ने बनाया है, हमारी माताओं और बहनों ने बनाया है, हमारे नौजवानों ने बनाया है, हमारे देश के ऋषियों ने, मुनियों ने, आचार्यों ने, शिक्षकों ने, वैज्ञानिकों ने, समाजसेवकों ने, पीढ़ी दर पीढ़ी कोटि-कोटि जनों की तपस्या से आज राष्ट्र यहाँ पहुँचा है।  देश के लिए जीवन भर साधना करने वाली ये सभी पीढ़ियाँ, सभी महानुभाव अभिनन्दन के अधिकारी हैं”

मोदी जी का संविधान के ताकत को नए मायने देना, एक संजीवनी प्रदान करना बहुत दुर्लभ घटना है।

मोदी जी का संविधान के ताकत को नए मायने देना, एक संजीवनी प्रदान करना बहुत दुर्लभ घटना है।

आज़ादी से लेकर अब तक किसान प्रधान देश में किसान हमेशा हाशिये पे रहा।  इसका नतीजा ये हुआ कि किसान के लड़के दो कौड़ी की सरकारी नौकरी करने को प्राथमिकता देने लगे। आज आप गाँव में जाकर देखिये लड़के सिपाही/क्लर्क बनने की जुगाड़ में लगे रहते है और खेती के आश्रित रहने में उन्हें अपना भविष्य अंधकारमय लगता है, शर्मिंदगी महसूस होती है।  उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े प्रदेशो में तो ये हालत है कि किसानी करना मतलब लोहे के चने चबाना जैसा हो गया है।  बीज महंगा है, उर्वरक महंगे है, बिजली नहीं है, पानी का जुगाड़ नहीं है और उत्पाद का कोई ठीक खरीदार नहीं है। मोदी ने इस दर्द को महसूस किया है। वो ये जानते है कि किसान इस देश की रीढ़ है और बिना इनको मुख्यधारा में लाये आप विकास के उच्चतम सोपान को नहीं पा सकते। इसलिए उनका गाँव और किसानो के प्रति झुकाव ह्रदय को झकझोर देता है। “जवान, जो सीमा पर अपना सिर दे देता है, उसी की बराबरी में “जय जवान” कहा था।  क्यों? क्योंकि अन्न के भंडार भर करके मेरा किसान भारत मां की उतनी ही सेवा करता है, जैसे जवान भारत मां की रक्षा करता है।  यह भी देश सेवा है।  अन्न के भंडार भरना, यह भी किसान की सबसे बड़ी देश सेवा है और तभी तो लालबहादुर शास्त्री ने “जय जवान, जय किसान” कहा था”। उम्मीद है मोदी की गाँव से जुड़े संकल्प से उभरे योजनाये गाँवों का कायापलट करने में सहायक होंगी।

नौजवानो की बड़ी भीड़ है इस देश में सो इनको “स्किल्ड वर्कर ” बनाकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को उन्नत बनाने का संकल्प एक बेहतरीन दृष्टिकोण है। ये मोदी की दूरदर्शिता दर्शाता है कि आयातित प्रोडक्ट्स पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहते है। अभी तक तो ये होता आया है कि युवाओ को सरकारे सिर्फ दिवास्वप्न दिखती रही है। सो उम्मीद यही है कि मोदी राज में युवाओ को एक सार्थक यथार्थपरक दिशा मिलेगी। अंत में मोदी जी की उस दृष्टि को उभारना चाहता हूँ जो इस भाषण की ख़ास बात रही और वो था उनका इस देश की संस्कृति और महापुरुषों के प्रति अभिन्न श्रद्धा। श्री अरविन्द और स्वामी विवेकानंद के वचनो और संस्कृत कथनो का उल्लेख करके उन्होंने ये बता दिया कि देश की जड़ो का सम्मान किये बिना भविष्य की तरफ झांकना कोई मायने नहीं रखता। भौतिक विकास आध्यात्मिक जगत से जुड़े बिना सिर्फ भटकाव ही सुनिश्चित करता है, सिर्फ विनाश ही करता है।  सो इस देश को जरूर विकासोन्मुख बनाये मगर इस पूरी कवायद में जड़ो को ना भूल जाए।

Full speech can be read here: प्रधानमंत्री का संबोधन

श्री अरविन्द के वचनो और संस्कृत कथनो का उल्लेख करके उन्होंने ये बता दिया कि देश की जड़ो का सम्मान किये बिना भविष्य की तरफ झांकना कोई मायने नहीं रखता।

श्री अरविन्द के वचनो और संस्कृत कथनो का उल्लेख करके उन्होंने ये बता दिया कि देश की जड़ो का सम्मान किये बिना भविष्य की तरफ झांकना कोई मायने नहीं रखता।

पिक्स क्रेडिट:

तस्वीर प्रथम

तस्वीर द्वितीय

तस्वीर तृतीय

8 responses

  1. अजय त्यागी, Noida, Uttar Pradesh, said:

    किसान इस देश की रीढ़ है और बिना इनको मुख्यधारामें लाये आप विकास के उच्चतम सोपान को नहीं पा सकते।………….बिल्कुल सही।

    *************************
    Author’s Response:

    किसानो की उपेक्षा कर के किया गया विकास कोई मायने नहीं रखता। पहले आप इनको उठाये फिर अन्य लोगो को। जो खुद अन्न उगाये और फिर भी आत्महत्या करे तो काहे का विकास!

  2. Mra Manish, Raipur, Chattisgarh, said:

    लेकिन मेल्स (पुरुषो) के बारे में बहुत गलत बोला गया …

    ******************
    Author’s Response:

    आपने बहुत सही बात पकड़ी। मैंने भी यही महसूस किया। मुझे लगता है ऐसा पॉलिटिकली करेक्ट रहने के कारण हुआ है। दिक्कत ये है कि अगर मै इस चीज़ को हाईलाइट करता तो बहुत और सी अच्छी बातो पे पानी फिर जाता। वैसे मुझे उम्मीद है कि जमीनी आदमी है मोदी जी सो वो वास्तविकता को ज्यादा देर तक इग्नोर नहीं कर पाएंगे।

  3. Anupam Verma, Mumbai, said:

    बिल्कुल सही विष्लेषण ! ! ! !

    **************
    Author’s Response:

    हां उन विचारो को जो हमको बदलने की ताकत रखते है उनको सही ढंग से विस्तार देना हमारा फ़र्ज़ बन जाता है।

  4. Girish R. Singh said:

    अच्छी समीक्षा की हैं भाई अरविन्द ने ..जरुर पढ़े…

    *************
    Author’s Response:

    बहुत धन्यवाद गिरीशजी🙂

  5. Niketan Magadh said:

    Great Write-Up🙂

    ********************
    Author’s Response:

    Few words from conscious people like you all is the reason why such write-ups appear so frequently from my end🙂 Anyway, this write-up encircles some great thoughts highlighted in the speech of Modi ji…

  6. Parvinder Singh, Sri Ganganagar, Rajasthan, said:

    स्वाधीनता दिवस भाषण में पकिस्तान से हो रहे सीज़फ़ायर उल्लंघन का ज़िक्र तक नहीं किया मोदी जी ने…

    **************
    Author’s Response:

    धैर्य धारण रखे। समय आने पर सबको सही जवाब मिलेगा। वैसे मोदी जी ने अपनी नीति स्पष्ट कर दी है कि मारने से बचाने वाला बड़ा होता है। BBC ने मोदी के भाषण में इस बात को उल्लेखनीय माना है कि पिछली सरकारों की तरह मोदी ने लाल किले का इस्तेमाल पाकिस्तान को बेहूदा लहज़े में धमकाने के रूप में नहीं किया। और ये बताये कि पिछली सरकारों ने ग़रज़ कर क्या पाकिस्तान को सबक सिखाया? आप स्पीच को देखे तो आप पाएंगे सबसे ज्यादा सम्मान उन्होंने सीमा पे तैनात जवानो का किया है।

  7. बहुत धन्यवाद इन पाठको को जिन्होंने इस पोस्ट को ध्यानपूर्वक पढ़ा🙂

    Krishna Pandey, Gonda, Uttar Pradesh; Ashvini Kumar, Allahabad, Uttar Pradesh; Rekha Pandey, Mumbai; Kripa Shankar Pandey, Mumbai; Sandeep Pandey, Gorakhpur, Uttar Pradesh; Anil Pangotra, Samba, Jammu & Kashmir; Dharmendra Tiwari, DD News, Chitrakoot, Uttar Pradesh; Ranjeet Sharma, Gurgaon, Haryana; Bharatiya Sanskriti Sansthan, Bhilai, Chattisgarh; Nikhil Garg, Noida, Uttar Pradesh; Lalita Jha, New Delhi; Deewaker Pandey, New Delhi; Viany Vishwakarma, Allahabad, Uttar Pradesh; Ubhaan Yashpal; Ravi Hooda, Canada; Anand Mishra, Chunar, Uttar Pradesh;

  8. Deewaker Pandey, New Delhi, said:

    बहुत से छोटे मुद्दों को उठाया जो की दिखावे की बात कहने वाले नहीं बोलना भी नहीं चाहते।

    *****************
    Author’s Response:

    ये सोच व्यवहारिक है। उन वादो को करने से क्या फायदा जो आप पूर्ण ना कर सके!

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