यथार्थ से उठायी गयी मर्दानगी की दो अलग-अलग तस्वीरे: अफ़सोस ऐसा होता ही रहेगा!

… और पुरुष मर्दानगी के चलते ऐसे ही मरते रहेंगे उस समाज के लिए जो उनकी क़द्र नहीं करता :-(

… और पुरुष मर्दानगी के चलते ऐसे ही मरते रहेंगे उस समाज के लिए जो उनकी क़द्र नहीं करता😦


                                                     *तस्वीर एक* 
                                
इसी साल सितम्बर महीने में महाराष्ट्र में एक सीनिअर पुलिस अफसर ने आत्महत्या करने की कोशिश की. ऐसी बाते हमारे भारतीय परिदृश्य में आम जनमानस के एक अल्पकालिक सनसनी के सिवाय ज्यादा कुछ पैदा नहीं करती। कुछ बतकही होती है इधर उधर की कुछ समय तक और फिर मामला ठंडा पड़ जाता है. लेकिन मै कुछ सोचने पर मजबूर हो गया. इस घटना के पीछे इस अधिकारी की प्रताड़ना थी जो ये एक अपने से जूनियर आई ए एस के हाथो कई वर्षो से झेल रहा था. वो भी इस वजह से कि इस अफसर ने ईमानदारी से काम करते हुए इस अधिकारी को एक इन्क्वायरी रिपोर्ट में कुछ मामलो में दोषी पाया था। और बात इस कदर बढ़ी कि इस अफसर ने अपने को आग के हवाले कर लिया। 

इस घटना का उल्लेख करने की वजह ये है कि जिन ऐसी अफसरो की बीवियाँ गहनो और महँगी साड़ियों से सुसज्जित पति को प्राप्त हर सुख सुविधा का भोग करती है उनको शायद इस बात का जरा सा भी अंदेशा नहीं रहता कि उनके पति किस तरह के समस्यायों से जूझ रहे है. उस पर से तुर्रा ये कि किसी चीज़ की कमी बेसी पर आसमान सर पर उठा लेने में जरा भी देर नहीं लगाती है. और ये घर घर की कहानी है. इस घर और ऑफिस के दो पाटो में हर मर्द पिस जाता है लेकिन अपने शोषण पर उफ़ नहीं करता क्योकि ये उसको अपना कर्त्वय लगता है. और जबकि इनकी पत्नियाँ हर तरह के अधिकारो से लैस इस तरह के मर्दो को कोल्हू का बैल बना के रखती है. और जिस तरह से इनको अधिकार मिलते ही जा रहे है उससे नहीं लगता कि आने वाले समय में परिदृश्य बदलेगा।     

                                                      *तस्वीर दो*

इलाहाबाद का एक प्रसिद्ध रेस्टॉरंट जहा हमेशा की तरह आधुनिक प्यार को विस्तार देते कई प्रेमी प्रेमिकाएँ बैठे है. इन्ही तमाम जोड़ो में से एक के बीच ऐसा हुआ. एक प्रेमी प्रेमिका बैठे हुए है कि अचानक प्रेमी का मोबाइल बज उठता है जिस पर वो किसी से लम्बी बात करता है तो प्रेमिका ने डिटेल्स लेनी चाहिए लेकिन प्रेमी के जवाब से संतुष्ट ना हुई. और जो इन दोनों के बीच मधुर बातो का सिलसिला चल रहा था वो तकरार के भयंकर रूप में परिवर्तित हो गया. बात यहाँ तक बढ़ी कि प्रेमिका ने तुरंत पुलिस को फ़ोन पर सूचित किया कि उसके साथ छेड़ छाड़ हो रही है. ऐसे मामलो में अति सक्रिय पुलिस तुरंत आ पहुँची और उसके बॉयफ्रैन्ड को तुरंत मारते पीटते थाने ले गए. प्रेमिका चूँकि एलिट क्लास से थी सो उसको अंदाजा ना था कि फ़ोन करने पर ऐसा भी हो सकता है. बात क्योकि अब थाने और घरवालो तक पहुचने वाली थी सो प्रेमिका ने मामले को खत्म करने के इरादे से सच बता दिया कि ऐसा कुछ नहीं था. वो केवल बॉयफ्रेन्ड को सबक सीखना चाहती थी. सो पुलिस ने हलकी से दोनों को चेतावनी देते हुए दोनों को छोड़ दिया। दोनों भविष्य में ऐसा ना करने की कसम खाते हुए फिर से इकट्ठा साथ निकल लिए. मर्दानगी के आधुनिक नमूने इस तरह के बॉयफ्रेंड की फसलें सदा लहलहाती रहेंगी जिसे इस तरह की लड़किया हमेशा अपने हिसाब से काटती रहेगी।

 

प्यार कम और तकरार ज्यादा होता है आज अधिकारो के हक़ की वजह से !!!

प्यार कम और तकरार ज्यादा होता है आज अधिकारो के हक़ की वजह से !!!

 

Reference:

India Today

News Item Published In Dainik Jagaran.

Pics Credit:

Pic One 

Pic Two 

7 responses

  1. Author’s words for those who read this post until now:

    Narendra Pradeep, Faridabad, Haryana:

    सच के आसपास रहने के लिए धन्यवाद ..

    ********************************************

    Rajesh Kumar, Advocate, Delhi High Court, New Delhi:

    हमारे अपने जीवन से उठाया गया एक कडुवा सच है राजेश भाई …

    ********************

    Nikhil Garg, Noida, Uttar Pradesh:

    अक्सर हम सच से मुह मोड़ लेते है तो क्या इससे सच्चाई दब जायेगी और दबी भी रहेगी तो कब तक?

    ********************

    Kavita Jain, New Delhi:

    ये ज़िन्दगी के वे अध्याय है जिनको हम स्वीकारना नही चाहते ..

    **************************

    SC Mudgal, New Delhi:

    धन्यवाद सच की उपेक्षा नहीं करने के लिए …

    **********************

    Manjoy Laxmi, Nagpur, Maharashtra:

    धन्यवाद सच के नज़दीक रहने के लिए …..

    ******************

    Chandrapal S.Bhasker, United Kingdom:

    अरे मै इसे आपके पेज पर शेयर करना कैसे भूल गया. वैसे अब जिस तरह का समाज हर देश में पनप रहा है नहीं लगता कि इससे हमे कोई निजात मिलेगी। कुछ तो अधिकारो कि लड़ाई ने सुख चैन छीन लिया बाकी जो बचा उसे उपभोक्तावादी संस्कृति ले डूबी जहा सब कोई प्रोडक्ट बन गया है.

  2. Readers who came to read this post until now:

    Vinay Ambore, Nagpur, Maharashtra; Himanshu B. Pandey, Siwan, Bihar; Vishu Dev, Mumbai; Hemant Kumar Pathak, Bhopal, Madhya Pradesh; Rajesh Dubey, Kishenganj, Bihar; Ramesh Kumar Nirbheek, New Delhi; Chandrapal S. Bhasker, United Kingdom; Dhirendra Singh; Pradeep Bajpai; Rajendra Tiwari, Lucknow; Rahul Jain, Meerut, Uttar Pradesh; Hareprakash Upadhyay, Editor, Samkaleen Sarokar, Bihar; Anjali Kalyan, Jabalpur, Madhya Pradesh; Shiv Dewangan, Hong Kong; and Amit Nanda, Chandigarh, Punjab & Haryana.

  3. Niketan Magadh said:

    ये मर्द की गलती है कि वो लड़की को सर पे चढ़ा लेता है ….

    Author’s Response:

    आप सही कहते है. लेकिन सिर्फ मै इतनी छूट देता हू कि अच्छे स्त्री पुरुष को सर आँखों पर रखने में कोई दिक्कत नहीं। अगर सही स्त्री-पुरुष है तो आप हर तरह से सम्मान करे लेकिन होता ये है कि सही स्त्री-पुरुष तो हर समस्या से जूझ रहे है लेकिन गलत स्त्री-पुरुष सुख के सागर में गोते लगा रहे है.

  4. Author’s words for Niketan Magadhji:

    मै भले ही पुरुष अधिकारो की बात करता हूँ लेकिन सही स्त्री की मै बहुत इज्जत करता हूँ और ये सुनिश्चित करता हूँ कि उनका अधिकार और उनका सम्मान सुरक्षित रहे. और इसी वजह से बहुत सारे एक्टिविस्ट्स मुझसे दुखी रहते है और मै बहुत से एक्टिविस्ट्स से मै दूरी बना के रखता हूँ..Even if majority of women have given way to wrong lifestyle, let’s not this be the ground to harass and punish the right woman..That’s my philosophy. Sadly, not many men’s rights activists align with me on this stance taken by me..And I care a damn for them!!

    *************

    Niketan Magadhji said:

    अरविंदजी …… बिल्कुल ऐसा ही होना चाहिए ….”i care a damn for them”
    ऐसा नहीं बोलते😛

  5. Niketan Magadh said:

    एक बात सुनी है मैंने : ऐसा आदमी जिससे हर कोई खुश रहता हो उसने जीवन में कोई अच्छा काम नहीं किया ….

    Author’s Response:

    आप इसे यूँ भी कह सकते है ” Please All, and You Will Please None.” या यूँ कहे ” We cannot please everybody”

  6. Amit Nanda said, Chandigarg, Punjab & Haryana, said:

    यही हो रहा है आजकल 100 % सही बात है…

    Author’s Response:

    सो ये जरूरी हो जाता था कि इस बात को सब जगह रखी जाये। ये लेख इसी पहल का हिस्सा है….

  7. Anupam Verma, Mumbai, said:

    आखिर सारा जमाना … जोरू का दीवाना🙂 ….. जब खुद ही चाहते हैं गुलाम बनना तो। …. बाकि दुनिया क्या कर सकती है ….. वैसे आज के यर्थात से परिचित करता हुआ एक अच्छा लेख !!!!

    Author’s Response:

    वैसे मै बहुत गम्भीर प्रवित्ति का आदमी नहीं हूँ लेकिन यथार्थ में जो भी सच्चाईयां है उनसे भली परिचित हूँ और उसे पूरी संवेदनशीलता से शब्दो में बयान कर देता हूँ!!

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