चेतावनी: भारत में हिंदी में बात करना और हिंदी के बारे में बात करना खतरनाक है!

हिंदी की उपेक्षा ना करे!

हिंदी की उपेक्षा ना करे!

हिंदी दिवस है सो हिंदी के रोजमर्रा के जीवन में अधिक से अधिक प्रयोग को लेकर बहुत सारी  बाते होंगी। सरकारी तंत्र इसके प्रचार प्रसार के बारे में पहले के तरह ही ऊबाऊ तरीकें से बात करेगा। और लोग पहले ही की तरह बोर होते हुए सुनेंगे। मै सरकारी तंत्र की तरह दमघोंटू बात नहीं करूँगा। संक्षेप में उन्ही कटु अनुभव का जिक्र करूँगा जो हिंदी प्रेमी के होने के नाते मेरे हिस्से में आई.लेकिन इस लघु लेख लिखने की प्रेरणा मुझे कल तब मिली जब राधाष्टमी पर किसी ने श्री राधाजी की सुंदर चित्र के नीचे बधाई सन्देश के रूप में लिखा ” Happy birthday to you Radhaji”! 

तो यही से बात शुरू करता हूँ मै कि चलिए शुद्ध हिंदी बोलना मत सीखे। मत हिंदी में लिखे-बोले हमेशा लेकिन  हम कुछ ख़ास अवसरों पर भी क्या हिंदी में कुछ नहीं कह सकते? बहुत  सारे मौके है जहा पे हम हिंदी में अपनी भावनाए अभिव्यक्त कर सकते है तो वहा ऐसा करने में हम क्यों चूक जाते है? नातीज़ा इसका ये हुआ है कि अँगरेज़ भी असहज हो जाएगा भारत में आकर काले अंग्रेजो के बीच. कितने तकलीफ की बात है कि हम गलत अंग्रेजी में गिटपिट करने को अपनी ऊँची नाक की निशानी समझते है, अपने आधुनिक होने का दंभ भरते है लेकिन शुद्ध हिंदी में बात करके अपने अन्दर शर्मिन्दगी के भाव को उत्पन्न कर देते है. 

उससे भी घातक है ये बात कि जहा आपने हिंदी को उसका सम्मान दिलाने की बात की वोही पे आपसे लोग लड़ने को आतुर हो जायेंगे। मुझे याद आता है इन्स्टाब्लाग्स (Instablogs) पर अपना इसी भाव को ध्यान में रखकर वर्षो पहले लिखा गया लेख. उस मेरे बहुत निष्कपट इरादों से लिखे गए लेख पर भयानक बहस हुई जो मेरे लिए अप्रत्याशित सी घटना थी, इस प्रतिक्रिया के लिए मै बिलकुल तैयार नहीं था और उस वेबसाइट पर सबसे लम्बी बहसों में से एक में अधिकतर बातें हिंदी विरोधी रूख से लबरेज़ थी. मुझे कहना पड़ा वहा कि शायद भारत ही एक ऐसा देश होगा पूरे विश्व में जहा के लोग अपने संस्कृति और भाषा के बारे में इस तरह की दोयम राय रखते है.

हिंदी में बात करने से हम छोटे नहीं हो जायेंगे !

हिंदी में बात करने से हम छोटे नहीं हो जायेंगे !

चलते चलते कुछ एक हादसे भी सुने जो मेरे साथ हुए जो आप गौर करे कितने विचित्र तत्त्वों से भरा है. नई  दिल्ली स्थित किसी एक प्रसिद्ध संस्था जो पर्यावरण बचाओ मुहिम में संलग्न है ने चंदे के लिए मुझे फ़ोन किया. काल अंग्रेजी में थी पर जाने क्या सोचकर मैंने हिंदी में प्रतिउत्तर दिया। इसके पहले उधर से वे सज्जन मेरे पर्यावरण प्रेम की तारीफ में बहुत कुछ कह चुके थें. खैर जैसे ही हिंदी में मैंने कुछ कहना शुरू किया फ़ोन कट गया इस सन्देश के साथ कि आपसे हिंदी में बात करने के लिए अभी दुबारा फ़ोन आएगा पर फ़ोन नहीं आया. 

हिंदी दिवस पर दीनदयाल शर्मा लिखित छोटी सी बाल कविता पढ़े जो मुझे अन्दर तक गुदगुदा गयी: अभी कुछ दिनों पहले ही पढ़ी तब से मुस्कराहट है कि जाने का नाम ही नहीं लेती।

“अकड़-अकड़ कर
क्यों चलते हो 
चूहे चिंटूराम,
ग़र बिल्ली ने 
देख लिया तो 

करेगी काम तमाम,

चूहा मुक्का तान कर बोला
नहीं डरूंगा दादी
मेरी भी अब हो गई है
इक बिल्ली से शादी।”

ये सही बात है!

ये सही बात है !

पिक्स क्रेडिट:

Pic One 

Pic Two 

Pic Three 

20 responses

  1. बहुतही सुंदर लेख और कविता. मझा आ गया. धन्यवाद.

    1. देवदत्त जी ये जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको लेख पसंद आया. सम्मानित महसूस कर रहा हूँ कि आपने इसे रि-ब्लॉग किया।

  2. Vishal Sabharwal, Ludhiyana, Punjab, said:

    🙂 ye asal mai kunthit bhaawna hai jissey shaayad kuch log angreji bol kar chupatey hai. rahi baatvikas ki to kya jaapan , korea , cchina , france , germany , norway , italy aadi vvikasit desho ki sreni mainahi aateyy?bahut khubsurat lekh. Sri DabangPandeyji dwaara🙂🙂

    Doosri baat ye ke jo log hamarey apney hotey. hai unsey hum Hindi mai hi baat kartey hai.

    ******************************
    Author’s Response:

    लेकिन भारत में लोग आज इस भयंकर अंग्रेजी में बकैती करते है कि इट लीव्स अँगरेज़ बिहाइंड😛😛😛

    *****************

    Vishal Sabharwal, said:

    Isko kehtey hai identity crisis. Kauva chala hans kii chaal. Jabki. sAarey shastra sanskrit mai hai. Hamari maatrbhaasha sanskrit haui waisey to.

    ****************

    Author’s Response:

    अरे संस्कृत के बारे में तो कुछ मत बोले वरना आप पे तोहमत लग जायेगी लोगो को बैलगाड़ी युग में घसीटने की

  3. Nikhil Garg,Noida, Uttar Pradesh,said:

    So true, this is the reason why most of us don’t speak and write English or Hindi correctly…… मु्झे शरम नहीं है बात को मानने में …..किसी और भाषा का ज्ञान होना बुरी बात नहीं़़़ अपनी भाषा का ज्ञान न होना, सही नहीं। It took lot of time writing few words in Hindi … But I tried….

    ********************************
    Author’s Response:

    पहले तो इस बात पे हर्ष हुआ कि तुमने हिंदी में एक पंक्ति लिखी। लोग हिंदी प्रेम को अंग्रेजी विरोध के रूप में देखते है. ये अंग्रेजी का विरोध नहीं वरन हिंदी को उचित सम्मान दिलाने की कवायद है.

    जो बात तुमने कही वही असल में इस लेख का सार है। इसीलिए तो जरा ज़रा सी अंग्रेजी हमे भी आती है बहरहाल तुमने लेख पूरा पढ़ा होगा और ये देखा होगा कि हिंदी प्रेम के कारण किस तरह के कटु अनुभव मुझे हुए.

    ***************

    Nikhil Garg said:

    हाँ समझने की चेष्टा ज़रूर की है….

  4. Deewaker Pandey, New Delhi, said:

    बढिया है सर। … शेयर किया मैंने …

    Author’s Response:

    धन्यवाद आपको इस लेख पर आने के लिए…..

  5. इन पाठको को धन्यवाद जिन्होंने बहुत ज्यादा देर नहीं लगायी पोस्ट पढने में🙂

    Vijay Krishna Pandey, Gorakhpur, Uttar Pradesh; Vineeta Prakash, New Delhi; Himanshu B. Pandey,Siwan,Bihar; Sandeep Pandey, Gorakhpur, Uttar Pradesh; Arvind Sharma,Indore,Madhya Pradesh; Manoj Joshi, Udaipur,Rajasthan; Mile Sur Mera Tumhara, California, USA; Abha Chawla Mohanty; Vidya Bhushan Pandey, Allahabad, Uttar Pradesh; Shashikant R Pandey, Ahmedabad, Gujarat; Rajesh Kumar Pandey, New Delhi; Ravi Hooda, Canada; Anand G. Sharma, Mumbai; Ajay Tyagi,Noida, Uttar Pradesh; Sudhir Dwivedi, New Delhi; Anu Katiyar, Kanpur, Uttar Pradesh; Yogesh Pandey, Lucknow, Uttar Pradesh; Anil Kumar Sharma; Ashok Gupta, Pediatrician, Faizabad, Uttar Pradesh and Shoorveer Hatwal.

  6. बहुत धन्यवाद अधिवक्ता ऍम ऍम मोहन जी को इस पोस्ट को स्वीकारने के लिए.

  7. @ Cindy Knoke…

    Many thanks for registering your presence on a post written in a different language..

    ******************

    एक बात रेखा पांडेयजी,मुंबई, के लिए जो राकिंग पाण्डेय’स नाम के फोरुम में प्रस्तुत मेरे किसी भी पोस्ट को पसंद करना नहीं भूलती:

    कोई भी पोस्ट आप से बच नहीं पाती🙂

  8. Vishal Sabharwal, Ludhiana, Punjab, said:

    Darasal bail gaadi yug to kabhi tha hi nahi. Ye to christian missionaries aur bewkoof Lord Macaulay ki den hai. Nahi to Mahabharata times were much more advanced. .. Who can construct Ram Setu that defies law of gravity even today? World wars of 1940 are like a street fight in front of ferocity of Mahabharata.

    Author’s Response:

    सिर्फ सही बात ही नहीं कही बल्कि रोचक जानकारी भी दी🙂

  9. Lalita Jha, Academician, New Delhi, said:

    “Hindi ” Hilndustan ki ek aisi mala hai jisne sabhi anya bhasha or sanskriti ko ek sutra me piro rakha hai….!!

    Author’s Response:

    इस सुंदर सत्य के बावजूद आधुनिक माताए अपने छोटे बच्चो को गाय की तरफ इशारा कह के कहती है ” देखो वो काऊ है” 😦

  10. Sunil Kumar Dubey | Reply

    पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण करते हुए हम विकासशील हो गए हैं. हिंदी गवारों की भाषा का पर्याय बन रही है. हमारे समाज में एक ऐसी संस्कृति धीरे-धीरे पनप रही है जिसे हिंदी और अंग्रेजी से उत्पन्न ‘वर्णसंकर संस्कृति’ कहना ज्यादा उपयुक्त होगा….. यह अलग बात है कि हमारी हिंदी भाषा में अन्य भाषाओं के शब्दों को अपने में आत्मसात करने कि विलक्षण प्रतिभा है…. किन्तु इसका तिरष्कार करना राष्ट्रद्रोह कि श्रेणी में आना चाहिए…. मुझे गर्व है कि मैं हिन्दीभाषी हूँ और यह मुझे जन्म से प्राप्त है…..

    1. @ सुनील कुमार दुबे

      सबसे पहले सुनील जी इस बात के लिए धन्यवाद कि इस लेख को पढ़कर आपने इतनी गंभीर टिप्पणी करी. आप जिस बात को इंगित कर रहे है वो भूमंडलीकरण की देन है जिसने सब देशो की मूल संस्कृति में गहरा दाग लगा दिया है. ये बड़ी चुनौती है कि इन नयी विनाशकारी प्रवित्तियो के बीच हम अपनी संस्कृति के मूल तत्त्वों की किस तरह से रक्षा कर पाते है. सजगता और सचेत रहकर ही हम एक सार्थक प्रतिरोध शक्ति उत्पन्न कर पायेंगे इनके खिलाफ। खैर बदलाव समय का चक्र होता है. इसको कौन रोक सकता है. अगर यही बदलाव है तो हमे इसे स्वीकार करना पड़ेगा लेकिन सजगता के साथ.

  11. Anjeev Pandey, Journalist, Nagpur, Maharashtra, said:

    अगर ऐसा है तो घोर (भयानक) स्थानों पर अघोर (सहज सामान्य) बनने की साधना हमारे पास है। अब क्या खतरनाक। हाहाहा…

    Author’s Response:

    अब सब थोड़े ही ना आप की तरह सब तरह के टोटके जानते है आपकी तरह हा हा हा🙂🙂 सामान्य लोग तो घोर मुसीबत में है ना हिंदी में बतिया कर जैसे हिंदी के पत्रकार😛😛😛

  12. Arvind Sharma, Indore, Madhya Pradesh, said:

    Arvindji, bilkul sahi point pakda hai.( maaf kijiye ki main hindi typing nahi kar paata hun), 14 sept kitne Bhartiya jaante hai ki hamari matra bhasha, Rajbhasha Hindi Diwas hai? Kis desh me govt dept. me rajbhasha adhikari rahte hai?

    Chunki hum apne Bhartiya hone par koi garv mehsoos nahi karte hai to Bhartiyata ki prateek hamari bhasha par kaise garv hoga? Lord Macaulay yehi to de gaya hai. Raho Bharat me, khao yaha ka anna, namak, lekin farz adaa karo Angrezon aakaon ka.

    *********************************

    Author’s Response:

    आप ने मर्म को इतने सही तरीके से महसूस किया है कि कुछ कहने को शेष ही नहीं रह गया. ये बेहद अफ़सोसजनक है और साथ में बेहद खतरनाक भी कि हम अंग्रेजी नीति निर्माताओ की इस चाल को समझ नहीं पाए जो वे जाते जाते चल गए. उसका नतीजा ये हुआ कि आज मूल संस्कृति की जगह चितकबरी संस्कृति व्याप्त हो गयी जिसको कोसने के बजाय हम उस पर गर्व करते है!!!!

  13. Sunil Chaubey said:

    ये सच है कि हिंदी को न्याय नहीं मिलता।

    Author’s Response:

    और यही से हर अन्याय की भूमिका पड़ गयी!

  14. @ Ravi Hooda, Canada, said:

    हिंदी जैसी सुन्दर और व्याकरणबध्ध भाषा कोई नहीं है संस्कृत के बाद हिंदी ही एक सम्पूर्ण भाषा है ऐसी है जिसमें मनुष्य की सभी भावनाओं एवं ज्ञान की अभ्व्यक्ति हो सकती है !

    Author’s Response:

    धन्यवाद इस पोस्ट की गंभीरता को समझने के लिए ..

  15. Susheel Kumar Tewari, Advocate, Allahabad High Court, Allahabad, said:

    भाई आप भी तो इंग्लिश में लिखते हो, वो भी ऐसी कि कई बार तो सर पर से निकल जाती है…

    Author’s Response:

    आप लोग अक्सर वो पूछते है जो असंख्य बार लोग पहले ही पूछ चुके होते है. इसका जवाब सीधा और स्पष्ट है कि जिन ग्लोबल ताकतों से हम लड़ रहे है, चाहे वो भारत में हो या भारत के बाहर, उन तक बात पहुचाने के लिए अच्छी अंग्रेजी का ज्ञान होना आवश्यक है. दूसरी बात हमने अंग्रेजी हिंदी की उपेक्षा कर के नहीं सीखी है. हिंदी उन लोगो से बेहतर लिख बोल लेता हूँ जो अपने हिंदी के ज्ञान को सर्वश्रेष्ठ समझते है.वैसे जो बहुत अच्छे-लेखक शायर होते है जैसे अज्ञेयजी, फिराक और अन्य वे कई भाषाओ में महारत रखते है.

  16. Susheel Kumar Tiwari, Advocate, Allahabad High Court, Allahabad, said:

    मैंने सुना है कि जापानी, रस्सियन, फ्रेंच आदि केवल अपनी भाषा का ही प्रयोग करते है और वे सभी इंडिया से आगे है. क्या वे ग्लोबल ताकतों से नहीं लड़ते?

    Author’s Response:

    आपने सही सुना है और हर किसी फोरुम पे यही बात कहता हूँ तो दक्षिण प्रांत के लोग अक्सर यही कहते है कि उन देशो में उतनी विविधता नहीं जितनी भारत में है सो लिहाज़ा एक भाषा सब पे नहीं थोपी जा सकती। एक बात और स्पष्ट कर दे ये बात उनसे कहे जो अंग्रेजी में इतने रमे हुए है कि उन्हें हिंदी भाषी ग्रामीण क्षेत्रो से कैटल क्लास लगती है. आप को अपनी पूरी बात जैसे आप ने कही है वैसे ना कह कर ये कहनी चाहिए थी कि मैंने अंग्रेजी जरूर अच्छी सीखी लेकिन हिंदी के महत्व को दरकिनार करके नहीं और उतनी ही अच्छी हिंदी लिख लेता हूँ जितनी की अंग्रेजी। इसके साथ ही समाज के हर क्लास के साथ बोल बतिया लेता हूँ चाहे वो किसी भी वर्ग का क्यों ना हो ? क्या ऐसे ही सुटेड बूटेड हाई कोर्ट के अंग्रेजी में रमे नमूने या ब्यूरोक्रेट भी कर सकते है बताये जरा सा? मै तो आप ही की तरह इस बात का मर्म समझता हूँ लिहाज़ा हिंदी बेहतर से बेहतर से सीखी लेकिन क्या उनके माता पिता जिनके बच्चे महंगे कान्वेंट स्कूलों में पढ़कर काले अँगरेज़ बन कर निकल रहे है उन्होंने भी इस बात का मर्म महसूस किया है?

  17. Radhakrishna Lambu said:

    Hindi is not a national language, it is an official language, besides, it has lot of turkish/persian/arabic words, most of the Hindi is dervied from Islamic languages. Even the words of English like bandobast is there.

    Author’s Response:

    First declare Hindi to be National Language in unambiguous way..Secondly, try to use more Sanskritised words…Hindi is indeed National Language..But this status has got shrouded in controversy due to ambiguous stand of Constitution on it…

    Please also read Article 351:

    “CHAPTER IV.-SPECIAL DIRECTIVES

    351. Directive for development of the Hindi language.

    It shall be the duty of the Union to promote the spread of the Hindi language, to develop it so that it may serve as a medium of expression for all the elements of the composite culture of India and to secure its enrichment by assimilating without interfering with its genius, the forms, style and expressions used in Hindustani and in the other languages of India specified in the Eighth Schedule, and by drawing, wherever necessary or desirable, for its vocabulary, primarily on Sanskrit and secondarily on other languages.”

  18. Author’s words for Radhakrishna Lambu:

    I am framing two questions:

    First why it’s not a National Language in clear terms? After all, it’s the official language of the union.

    Second, why spirit laid down in Article 351 not being promoted in concrete way?

    Lastly, you have all the opportunity to reduce Islamic influence by using Tatsam words…

    ********************

    Radhakrishna Lambu said:

    It is not, because, there are issues in the acceptance, as some of the state, which are based on languages, don’t want to see this as a nataional language. Articles are written, but we cannot force us to follow them. . And last, the development of hindi in itself is controversial.

    This paper throws some light, which even I say:

    http://www.cs.colostate.edu/~malaiya/turkish.html, hindi does have lot of islamic touch to it.

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