समाज की दशा और दिशा तब सुधरेगी जब पुरुषो का उत्पीडन बंद होगा, पुरुष विरोधी कानूनों का खात्मा होगा!!

नागपुर  अधिवेशन में आये पुरुष अधिकारों को जाग्रत करने ये समर्पित कार्यकर्ता

नागपुर अधिवेशन में आये पुरुष अधिकारों को जाग्रत करने ये समर्पित कार्यकर्ता🙂

नागपुर में पिछले महीने पुरुष अधिकारों के प्रति समर्पित सेव इंडिया फॅमिली फाउंडेशन (SIFF) ने अपने पांचवे राष्ट्रीय सम्मलेन का भव्य और सफल आयोजन किया। मुख्य समारोह जो तीन दिनों का था, १६ अगस्त से लेकर १८ अगस्त तक, का  आयोजन नागपुर से १०० किलोमीटर दूर पेंच टाइगर रिज़र्व के शांत और रमणीक स्थल पर हुआ. पेंच के जंगल नोबेल पुरस्कार विजेता रुडयार्ड किपलिंग से सम्बन्ध रखता है जहा पे उन्होंने मशहूर किरदार मोगली को जन्म दिया। बहरहाल इसी जगह पे तीन दिनों तक वैचारिक कसरत में सलंग्न रहना एक संवेदनशील मुद्दे पर एक सुखद और यादगार अनुभव रहा. ये कहने में कोई सकोच नहीं कि पुरुष अधिकारों के प्रति अभी भी बहुत बड़ा वर्ग उदासीन है लिहाज़ा ऐसे आयोजन समय की मांग बन गए है जो इस मुद्दे पे देश और देश के बाहर एक उपयुक्त भूमि का निर्माण कर सके.

इस सम्मलेन का आयोजन राजेश वखारिया और नागपुर की SIFF टीम ने नागपुर में अन्य महत्तवपूर्ण संस्थाओ के साथ मिलकर किया जिनमे रविन्द्र दरक का योगदान सराहनीय था. इस राष्ट्रीय सम्मलेन में  SIFF की देश भर में फैली शाखाओ ने शिरकत की जिसमे बेंगालूरू , पुणे, मुंबई, लखनऊ, कन्याकुमारी, चेन्नई, इलाहबाद, हैदराबाद, नई  दिल्ली और अन्य जगहों से आये सत्रह राज्यों के कुल १५० से अधिक् जुझारु कार्यकर्ताओ ने अपनी सहभागिता दर्ज करायी जिन्होंने देश भर में फैले 40,000 एक्टिविस्ट्स का प्रतिनिधित्व किया। इसके साथ ही कुछ प्रसिद्ध विदेशी संस्थाओ जिसमे मैरिटल जस्टिस, यूनाइटेड किंगडम और  इन्साफ, यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका, प्रमुख थे ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उल्लेखनीय बात ये रही कि जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया, रूस, सिंगापुर और मिडिल ईस्ट से भी एक्टिविस्टस का आगमन हुआ.

सम्मलेन में चलती रही ऐसी कई परिचर्चाये सम्मानित सदस्यों के बीच !!

सम्मलेन में चलती रही ऐसी कई परिचर्चाये सम्मानित सदस्यों के बीच !!

समारोह में मैंने एक लेखक/ब्लॉगर की हैसियत से अपनी सहभागिता दर्ज कराई। चूंकि पुरुष अधिकारों में बहुत पहले से विचार विमर्श में सलंग्न रहा हूँ जो मेरे कई लेखो में उभर कर सामने आये है लिहाज़ा इस समारोह के जरिये मुझे कई और पहलुओ को बारीकी से समझने का अवसर प्राप्त हुआ.यद्धपि इस सम्मलेन में हुई चर्चाओ का फलक, विषय विन्दु कुछ सीमित सा रह गया, कुछ जरूरी सन्दर्भ जो परिवार के विघटन के प्रमुख कारण होते है जैसे उपभोक्तावाद, सांस्कृतिक हमले, इन पर कोई ख़ास चर्चा नहीं हुई और इसके अलावा संचालन में प्रक्रियागत ख़ामिया भी रह गयी लेकिन इसके बावजूद कई मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई. डॉ पोनप्पा, जो कि मैसूर से पधारे सर्जन थें, ने सही व्यक्त किया कि जिन मुद्दों को हम लेकर चल रहे है वे एक गहन गंभीरता की मांग करते है जो अगर इस तरह के समरॊह में भी अगर न दिखे तो तकलीफ होती है.

ये सर्वविदित है कि  IPC 498a, डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट जैसे घातक कानूनो ने समाज की कमर तोड़कर रख दी है. इनका जिस तरह से व्यापक दुरुपयोग हुआ है उसको सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी आतंकवाद की संज्ञा दी है. ये बेहद अफ़सोसजनक है कि कांग्रेस अपने वोट बैंक के चलते इस स्थिति में कोई सुधार नहीं कर पा रही. उलटे महिलाओ का वोट पक्का करने के लिए हिंदी विवाह अधिनियम (संशोधन) बिल, २०१०, पारित करा रही है जिसके पास हो जाने के बाद पुरुषो को आपसी सहमती से हासिल तलाक के उपरान्त अपनी गाढ़ी कमाई से अर्जित संपत्ति से हाथ धोना पड़ेगा। इस लाचार और पंगु सरकार के पास अपने अस्तित्व को बचाने के लिए सिवाय इस तरह के आत्मघाती कदमो के अलावा कोई और कदम नहीं सुझाई पड़ता है. सरकार में बैठे शामिल मंत्री और महत्त्वपूर्ण संस्थाओ को चला रहे अफसर शायद रेत में शुतुरमुर्ग की तरह सर गाड कर बैठे है कि उनको ये सरकारी आंकड़े जो कि ये दर्शाते है 242 पुरुष और 129 स्त्री हर दिन आत्महत्या करते है ( NCRB) की नाजुकता और गंभीरता समझ में नहीं  आती है. इसको और बारीकी से देखे तो 71 प्रतिशत के लगभग शादी शुदा पुरुष आत्महत्या करते है तो लगभग 67 प्रतिशत शादी शुदा महिलाये आत्महत्या करती है.

और सब बुनते रहे नए सपने, नए मकाम पुरुषो को उनका अधिकार दिलाने के लिए

और सब बुनते रहे नए सपने, नए मकाम पुरुषो को उनका अधिकार दिलाने के लिए

कितने अफ़सोस की बात है कि जहा महिलाओ का पक्ष सुनने के लिए कई संस्थान है वही पुरुष को सड़ने गड़ने को छोड़ दिया जाता है उसको अपनी तमाम समस्याओ के साथ. खैर आधुनिक सभ्यता अपने उस मकाम पर आ गयी है जब पुरुषो का हर तरीके से शोषण बंद हो चाहे वो किसी भी रूप में हूँ और किसी स्तर पर हो. उनके योगदान का सही रूप से मूल्यांकन हो. लेकिन तमाशा देखिये कि कांग्रेस सरकार ना केवल परिवार संस्था को तहस नहस करने में लगी है बल्कि कानूनी आतंकवाद के जरिये पुरुषो को लाचार और अक्षम बनाने पर तुली है. आखिर हिन्दू विवाह अधिनियम (संशोधन) बिल, २०१०, जैसे अपूर्ण और भ्रामक कानून को बनाने का उद्देश्य क्या है जो संविधान के कई मूल पहलुओं की उपेक्षा करता है? जेंडर इक्वलिटी के दायरे में में क्या पुरुषो को आपत्ति करने का कोई अधिकार नहीं है? फिर ऐसा कानून लाने की क्या जरूरत है जो सिर्फ हिन्दू संपत्ति के बटवारे की बात करता हूँ? ऐसा ही संशोधन मुस्लिम पर्सनल कानून पर क्यों नहीं लागू होता? कितने खेद की बात है कि कांग्रेस की अक्षम सरकार ने विवाह नाम की संस्था की धज्जिया उड़ा दी पर हिन्दू खामोश है और नर के भेस में नारी समान पुरुष खामोश है.

इसलिए नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय सम्मलेन ख़ासा महत्व रखता है. ये एहसास दिलाता है कि इस तरह के आयोजन अनिवार्य हो गए है सरकार को शीशा दिखाने के लिए और समाज में एक सार्थक बदलाव लाने के लिये. इस सम्मलेन में कुछ महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किये गए जिनमे प्रमुख है पुरुषो के लिए अलग मंत्रालय बनाने के लिए ताकि उनके समस्याओ पर बेहतर चिंतन हो सके; पुरुषो की जिंदगी को खतरनाक धंधो में भागिरदारी कम की जाए; वैवाहिक कानून जो कि  आज समानता के कानून की  अवहेलना करते है उनको “जेंडर इक्वल” बनाया जाए कानून की चौखट में; पिता को भी समान रूप से शेयर्ड पेरेंटिंग के भावना के अंतर्गत बच्चो को पालन पोषण करने की छूट दी जाए तलाक मंजूर होने के उपरान्त ताकि बच्चो को माता पिता का सामान रूप से सरंक्षण प्राप्त हो. इसके अलावा इस बात पे भी बल दिया गया कि पुरुषो की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का निराकरण करने की एक सार्थक पहल हो सरकार और समाज दोनों द्वारा।

सम्मलेन का समापन हिन्दू  विवाह अधिनियम (संशोधन) बिल, २०१० को तुरंत वापस मांग लेने के साथ हुआ. सम्मलेन में बहुत से लोगो को पुरुषो के अधिकार के प्रति चेतना जगाने लिए सम्मानित भी किया गया जिसमे इस लेख के लेखक हिस्से में भी ये सम्मान आया, जिनका इलाहाबाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकीलों ने एक समारोह आयोजित कर इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया। बहुत जरूरी है ऐसे सम्मलेन, इस तरह के सम्मान समाज का अस्तित्व बचाने के लिए और इस बात को बल देने के लिए कि पुरुष भी स्त्री की तरह समाज की एक प्रमुख इकाई है. SIFF और इससे जुड़े लोग बधाई के पात्र है इस तरह के क्रांतिकारी पहल के लिए. उम्मीद है इस तरह के संस्थान समय के साथ नयी ऊंचाई को प्राप्त कर समाज को नयी दशा और दिशा देने में निश्चित रूप से कामयाव होंगे।

नागपुर में कुछ इस तरह हुआ सम्मान इस पोस्ट के लेखक का  पुरुष अधिकारों के प्रति समर्पित रहने पर!!

नागपुर में कुछ इस तरह हुआ सम्मान इस पोस्ट के लेखक का पुरुष अधिकारों के प्रति समर्पित रहने पर!!

....और इलाहाबाद में सम्मलेन से लौटने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकीलों ने सम्मान किया

….और इलाहाबाद में सम्मलेन से लौटने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकीलों ने सम्मान किया

References:

The Times Of India

Northern India Patrika

P.S.: Media Persons Are Permitted To Publish This Article In Their Respective Publications. However,  They Are Requested To Give Due Credit To The Author/Blog Page Apprising Him Of Its Publication As Early As Possible. 

************************************************************

फोटो जो हमने और अन्य साथी मित्रो ने खींची सम्मलेन की, और कुछ फोटो फुरसत के पलो की!!!

 

मैसूर से पधारे डॉ पोनप्पा को सुनना और मिलना एक सुखद अनुभव रहा

मैसूर से पधारे डॉ पोनप्पा को सुनना और मिलना एक सुखद अनुभव रहा

 

सुरेशराम जो चेन्नई से आये थें उनसे कानूनी पेंचो को समझने में काफी आसानी हुई

सुरेशराम जो चेन्नई से आये थें उनसे कानूनी पेंचो को समझने में काफी आसानी हुई

स्वरुप सरकार  से तो काफी मुलाकाते हुए थी आभासी जगत में लेकिन यथार्थ के धरातल पर मिलन रोचक रहा. जिस अंदाज़ में ये बोलते है फेमिनिस्ट ब्रिगेड को कुछ ऐसे ही एग्रेसिव हथौड़ो की जरूरत थी :P

स्वरुप सरकार से तो काफी मुलाकाते हुए थी आभासी जगत में लेकिन यथार्थ के धरातल पर मिलन रोचक रहा. जिस अंदाज़ में ये बोलते है फेमिनिस्ट ब्रिगेड को कुछ ऐसे ही एग्रेसिव हथौड़ो की जरूरत थी😛

मेरे संवेदनशील मित्र जोयंतो जो अपने इलाहाबाद के होते हुए भी नागपुर में पहले पहल मिले :-) बीच में शायद राजेश वखारिया जी ही जैसा कोई शख्स दिख रहा है :-) बगल में हम है और उसके बाद शम्मी जी है जिनसे सम्मलेन समाप्ति पर कार में काफी रोचक बाते हुई!

मेरे संवेदनशील मित्र जोयंतो जो अपने इलाहाबाद के होते हुए भी नागपुर में पहले पहल मिले🙂 बीच में शायद राजेश वखारिया जी ही जैसा कोई शख्स दिख रहा है🙂 बगल में हम है और उसके बाद शम्मी जी है जिनसे सम्मलेन समाप्ति पर कार में काफी रोचक बाते हुई!

विराग से मिलकर काफी प्रसन्नता हुई और उसकी एक वजह ये थी कि हम इन्टरनेट पर अक्सर बातचीत करते रहते है..और ये सिलसिला काफी पुराना है

विराग से मिलकर काफी प्रसन्नता हुई और उसकी एक वजह ये थी कि हम इन्टरनेट पर अक्सर बातचीत करते रहते है..और ये सिलसिला काफी पुराना है

स्वर्णकार जी जो शायद विलासपुर से पधारे थें मेरे कमरे में ही रुके थे। अध्यात्म और अधिकारों का गठजोड़ बहुत हुआ फुरसत के क्षणों में इनके साथ

स्वर्णकार जी जो शायद विलासपुर से पधारे थें मेरे कमरे में ही रुके थे। अध्यात्म और अधिकारों का गठजोड़ बहुत हुआ फुरसत के क्षणों में इनके साथ

राजेश जी मिलना होगा सोचा ना था। बहुत पुराने साथी है मेरे।  खैर दिल्ली और इलाहाबाद के वकील मिले तो आपस में :-)

राजेश जी मिलना होगा सोचा ना था। बहुत पुराने साथी है मेरे। खैर दिल्ली और इलाहाबाद के वकील मिले तो आपस में🙂

गोकुल से मेरी पहली मुलाक़ात वर्षो पहले हुई थी  इन्टरनेट पे अपने ही किसी पोस्ट पर चर्चा के दौरान। और मिलना सालो बाद नागपुर में हुआ

गोकुल से मेरी पहली मुलाक़ात वर्षो पहले हुई थी इन्टरनेट पे अपने ही किसी पोस्ट पर चर्चा के दौरान। और मिलना सालो बाद नागपुर में हुआ

अनाडी" जी जो लखनऊ से पधारे ने जो "चाय" पिलाई कि उसकी मिठास अभी भी बनी हुई है. इन्होने ये तो साबित ही कर दिया कि हास्य और व्यंग्य वो विधा है कि जिसकी मार बहुत गहरी होती है

अनाडी” जी जो लखनऊ से पधारे ने जो “चाय” पिलाई कि उसकी मिठास अभी भी बनी हुई है. इन्होने ये तो साबित ही कर दिया कि हास्य और व्यंग्य वो विधा है कि जिसकी मार बहुत गहरी होती है

 

मन में जगह कर गया. आप जैसे और लोगो की जरुरत है जो देश में बेहतर सोच को जन्म दे सके

पांडुरंग कट्टी से मै पहले कभी नहीं मिला था सो मिलना मन में जगह कर गया. आप जैसे और लोगो की जरुरत है जो देश में बेहतर सोच को जन्म दे सके

अर्नब गांगुली से भी मेरी ये पहली मुलाक़ात थी !

अर्नब गांगुली से भी मेरी ये पहली मुलाक़ात थी !

अमर्त्य का लगाव देखकर प्रसन्नता हुई. अमर्त्य में अच्छा ये लगा कि कम से कम कुछ लोग तो पढने में यकीन रखते है गहरे में जाकर। दीपिका जी का योगदान इस मामले में महत्त्वपूर्ण है कि डाक्यूमेंट्री विधा को एक ऐसे मुद्दे में इस्तेमाल कर रही है जिसको वाकई विस्तार की जरूरत है. बहरहाल दोनों लोगो से मिलकर ख़ुशी हुई.

अमर्त्य का लगाव देखकर प्रसन्नता हुई. अमर्त्य में अच्छा ये लगा कि कम से कम कुछ लोग तो पढने में यकीन रखते है गहरे में जाकर। दीपिका जी का योगदान इस मामले में महत्त्वपूर्ण है कि डाक्यूमेंट्री विधा को एक ऐसे मुद्दे में इस्तेमाल कर रही है जिसको वाकई विस्तार की जरूरत है. बहरहाल दोनों लोगो से मिलकर ख़ुशी हुई.

श्रीनिवास से मिला तो समझ में आया कि इस फेमिनिज्म ने कितना नुक्सान पहुचाया है घरो को उजाड़कर

श्रीनिवास से मिला तो समझ में आया कि इस फेमिनिज्म ने कितना नुक्सान पहुचाया है घरो को उजाड़कर

प्रकाश ने जो सहूलियत प्रदान की सम्मलेन में और सम्मलेन के खत्म होने के बाद बारिश में भीगते हुए कुछ दूर तक छोड़ना याद आता है. पहले भी नागपुर आया था तो तब भी मिलना इनसे अच्छा लगा था. प्रकाश में सम्मलेन मेंकोई पेपर तो नहीं पढ़ा लेकिन अगर ये कुछ कहते तो उसको सुनना दिलचस्प रहता।

प्रकाश ने जो सहूलियत प्रदान की सम्मलेन में और सम्मलेन के खत्म होने के बाद बारिश में भीगते हुए कुछ दूर तक छोड़ना याद आता है. पहले भी नागपुर आया था तो तब भी मिलना इनसे अच्छा लगा था. प्रकाश में सम्मलेन मेंकोई पेपर तो नहीं पढ़ा लेकिन अगर ये कुछ कहते तो उसको सुनना दिलचस्प रहता।

रविन्द्र दरक से पहले मै नहीं मिला था लेकिन इस उम्र में एक गंभीर मुद्दे पर इतनी सक्रियता देखकर मन में बल का उदय हुआ

रविन्द्र दरक से पहले मै नहीं मिला था लेकिन इस उम्र में एक गंभीर मुद्दे पर इतनी सक्रियता देखकर मन में बल का उदय हुआ

गंभीर चर्चा बिना खाए पिए कैसे हो सकती है :P

गंभीर चर्चा बिना खाए पिए कैसे हो सकती है😛

पारंपरिक मीडिया में नागपुर अधिवेशन सुर्खियों में रहा

पारंपरिक मीडिया में नागपुर अधिवेशन सुर्खियों में रहा

पारंपरिक मीडिया कब तक हमको इग्नोर करती!!

पारंपरिक मीडिया कब तक हमको इग्नोर करती!!

नागपुर का टाइम्स ऑफ़ इंडिया क्यों पीछे रहता भला

नागपुर का टाइम्स ऑफ़ इंडिया क्यों पीछे रहता भला


20 responses

  1. Deewaker Pandey, New Delhi, said:

    Government is no less than English government before freedom. They were dividing based on religion and cast but this government is breaking the family just for vote.

    Author’s Response:

    English people still followed some ethics, some values but Congress government in previous years simply roped in corrupt practices to remain in power..

  2. इन पाठको को अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए धन्यवाद🙂

    Rajesh Vakharia, President, Nagpur SIFF; Manjoy Laxmi, Nagpur;Gary Schultz, Washington, USA; Supriya Mukherjee, New Delhi; Yogesh Pandey, Lucknow, Uttar Pradesh;Raju Bawane, Bilaspur, Chattisgarh; Nikhil Garg, Noida, Uttar Pradesh; Sandeep Pandey, Gorakhpur, Uttar Pradesh;Biswaksen Tripathy, Sambalpur, Orissa; Shiv Dewangan, Honk Kong; Rajendra Tiwari, Lucknow, Uttar Pradesh; Masculist Kailash, Pune, Maharashtra; Kishore Aniket; Rajesh Kumar Kesarwani; Deepak Dhabai; Rajkumar Pandey, Nagpur; Emir Sadek,Istanbul, Turkey; Sherwyn Golgi;Jeremy Lofton; John Martin, Men’s Rights Association, Kasol, Himachal Pradesh; Mumtaz Qureshi; Sachin Mishra; Om Prakash Tiwari; Anand G. Sharma, Mumbai; Praful Kr, Mumbai; Mra Chetan Antifeminist; Kunal Sinha, USA; Himanshu B. Pandey, Siwan, Bihar; Jyoti Ghag; India Against Corruption, Washington, USA; Sdebasis Pandey, Puri, Orissa; Rekha Pandey, Mumbai; Udayan Supkar, Bhubneshwar, Orissa; Chandrapal S. Bhasker, United Kingodm; Vijay Charu, Kathmandu, and Vikash Chaurasia, Mumbai.

  3. Author’s Words For Senior BJP Leader Manoj Joshi in Rajasthan:

    मनोज जी ये एक घातक क़ानून है। आप बीजेपी के सीनियर लीडर्स को समझाए की अगर हिन्दू लोगो का आप पक्ष लेते है तो इस खतरनाक कानून को लोकसभा में पारित ना होने दें. ये कांग्रेस हिन्दू परिवारों को तोड़ रही है.

  4. Jyoti Ghag, Sammamish, Washington, said:

    Namashkar Arvind K Pandey ji, I agree that we sisters need to save our brothers, fathers & sons. We need to stand together against discrimination & violation of our Human, Constitutional Rights……Please get united to restore our Human, Constitutional & Fundamental Rights. Please save our fathers & brothers from being victims of Misuse of 498A. Please forward this post to as many Citizens as you could. Please support & add your physical presence in the quiet Protest which Washington Based NGO “Shakti for Shahid” have planed front of Rajbhavan Mumbai on 21st September 11:00 a.m. God Bless You & God Bless India.

    Author’s Response:

    Hope these words act as catalyst …This post has spread like jungle fire..It’s about to cross 100 share mark on Facebook…And I hope you would do the same at your end in spreading the word regarding this post..

  5. @ Author’s words for Masculist Virag Von Confidareji, Bangalore:

    Virag thanks for sharing this important post..I had visited Nagpur laced with a purpose…A purpose to highlight the grassroots activism in world of men’s rights…To an extent feel pretty satisfied in having published few important works in this regard..This post is one such published work…I remember your words you uttered some years back that we generally work for our interests even as we work for men’s cause..May be in my own case too this might not be far away from truth but deep within I know well that until now I have successfully kept the “cause” above one’s own interests!!

    ******************

    At another place I said:

    दुनिया कुत्ते की टेढ़ी पूछ है। इतना पता है कि आप और मैंने इसे सीधा करने का ईमानदार प्रयास किया:P

  6. Prince Mittal, Raipur, Madhya Pradesh, said:

    Bilkul sahi kaha sirji aap ne..Aise kanun tabhi rukeng jab police walo or rajnetaow ki biwi unke upar 498a lagaegi tab dekheng y bach k kaha jate hai…

    Author’s Response:

    जब खुद पे गुजरती है तभी सही अहसास जाग्रत होते है ..

  7. Author’s word for Mile Sur Mera Tumhara ( Shwetaji), USA:

    श्वेताजी अमेरिका में रह कर भारत के उन समस्याओं के बारे में पढ़ रही है जिन पर भारत में सार्थक चर्चा अभी कम ही होती है । इस बात से कम मुझे कलम चलाते रहने का बल तो मिल ही रहा है. ये संतोष तो मिल ही रहा है।

    ग़रज़ ‘अख़्तर’ की सारी ज़िंदगी का ये खुलासा है
    कि फूलों की कहानी कहिये, शोलों का बयाँ लिखिये….

  8. Author’s words for Dr. Ashok Gupta, Pediatrician, Faizabad, Uttar Pradesh:

    आप शरीर के डॉक्टर है। मुझे लगता है हम कही “रूह” के डॉक्टर तो नहीं हा.. हा….हा😛

  9. Carlos Pena said on this post:

    This is probably the most informative article. If I could just decipher it….

    ***********************************

    Jeremy Lofton, USA, said:

    …. ????? Sometimes I wonder how the language barrier was even broken.

    ****************

    Author’s words for both of them:

    Well, exact translation is not possible due to constraints of time..However, go through these links which would at least let you have the essence of this post:

    ****************
    http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-09-01/allahabad/41662123_1_international-men-save-indian-family-foundation-rights-activists

  10. @ Prakhar Pandey, Poet, Gwalior, Madhya Pradesh, said:

    थैंक्स तो आपको हो जो लोगो का ध्यान एक जरूरी चीज़ पे ले गए आप ….

    Author’s Response:

    अच्छा जी। । चलिए मान ली हमने आपकी बात🙂

  11. Arvind Sharma, Banker, Indore, said:

    Arvindji,u have raised really a very thought provoking point but the govt is, as u have said, out to destroy the entire social structure with family as its primary and basic unit.

    Author’s Response:

    I am sure these anti-people government ( read anti-Hindu) shall be compelled to hear the collective voice of spirited souls and take appropriate measures..

  12. @ Author’s words for Swarup Sarkar, Men’s Rights Activist, New Delhi:

    धन्यवाद अपनी उपस्थिति इस पोस्ट पे दर्ज कराने के लिए। नागपुर आना सफल रहा इस मामले में कि आपसे मुलाक़ात हो गयी। .उन लोगो से भी जो जानते एक दुसरे को वर्षो से थें पर मिले कभी नहीं थें असल ज़िन्दगी में !!!

  13. Anjeev Pandey, Journalist, Nagpur, Maharashtra said:

    खामोश नहीं, मानसिक गुलामी की बेड़ियों में जकड़े हुए हैं। जिस दिन समझ में आएगा, फिर संग्राम हो जाएगा। पूर्ण आजादी।

    Author’s Response:

    और वो सुबह जल्दी आये जब चेतना इस मानसिक गुलामी की जड़ काट कर रख दे !!!

  14. Rakesh Pandit, New Delhi said:

    “ऐसा ही संशोधन मुस्लिम पर्सनल कानून पर क्यों नहीं लागू होता? “” Most Important Point !!! Good…

    Author’s Response:

    गलत मौको पर खामोश रहना हिन्दुओ की कमजोरी है और इसलिए इस तरह के कानून बन रहे है …

  15. It’s a matter of great honour for me that even the ones who have no clue regarding Hindi Language bothered to use translation facilities to read this article in foreign landscape..Have a look at this comment:

    ******************************************

    Happy Human said:

    Carlos Pena It is in Hindi language. Its really indeed a good article. But rewriting it in English will take a lot of time.

    I thought to translate it for you using GoogleTranslate and then post it here.But Google Translate did a very job in translation of this page, the whole article became very weird when translated by it to English….

    Author’s Response:

    Feel honoured that conscious people like you all came to have a look at this article..Bit sad that language issue has set roadblocks ..Well, constraints of time do not allow me to have the translation of this lengthy post..I have already shared links with readers on this thread in response to Carlos …Hope if you have a look at them you all at least be able to have the essence of the post..

  16. Abha Chawala Mohanty said:

    KAUN KAREGA ??…PHAL KIS KE???…KANOON TO SIRF KUCH EK KE LIYE RAH GAYA …JAB TAK PURUSH JAGRUK HO KAR GHAR SE BAHAR NAHI AYEGA….PEDA YOOHI RAHEGI…

    Author’s Response:

    सही बात है पुरुष जागरूक होकर जब तक सही तरीके से प्रोटेस्ट नहीं करेंगे तब तक वे इस तरह का उत्पीडन सहते रहेंगे। लेकिन समस्या ये है की बड़ी संख्या में जो अपने को पुरुष कहते है वे वास्तव में नारी है इसलिए ऐसी जागरूकता उनमे आये कैसे??..

  17. This National Meet is the best as described by most attendees. This is a four months vigorous efforts of Vakhariaji, Ravindra Darak, Prakash Thakre, Amit Tumdam, Polade, and other members of Nagpur chapter (sorry for not remembering the names). Thus a memorable event to be remembered through out my life.
    Arvindji write up is as usual perfect. He has described the excerpts of the event very nicely and is a kinda recall of memory.
    We need Arvindji kind of personality, who can spread our anguish voices of truth, as our other MRAs are doing.

    1. @ Mra Joy Anto…

      True….Rajesh Vakharia and his teammates did a commendable job overcoming so many odds..Another significant aspect, at personal level, was that I came to meet so many good people like you and in turn heard so many fascinating views as to how to bring real changes in a society marred by so many corrupt practices..The Conference certainly helped me a lot to add new dimensions in my own perspective regarding men’s movements in India…And lastly, thanks for the compliments…

  18. Mens Rights, Bangalore, said:

    Another excellent piece from you. I suggest that for the benefit of foreigners who cannot understand Hindi and also for easy assimilation of the essence of an article, writers like you could add a lot of pictures and maybe some videos. Just a thought that came across my mind. But this suggestion has a negative side. It could delay the process…….

    Author’s Response:

    Good advise but practically not feasible due to limited resources at my end..I have to regularly write both in English and Hindi besides having to write on variety of issues as suggested by various publications under professional obligations..So besides constraints of time I lack resources..Worse, I do not have enough finance to hire staff..I have to single- handedly deal with all the aspects related with publication..It’s only Lord’s grace that I have been able to do this sort of quality work for such a long period…

    And one thing more..I am writing articles in Hindi for a vast section of people who don’t understand Englsih ..I am trying my best that they come to know well the issues which really matter…

    Anyway, I would try to implement your brilliant suggestion…

  19. Kavita Jain said:

    …Gr8 one…………… even I also want such type of commission or helpline for men…… me also victim of false 498A cases………….. and against with all feminist……..

    ******************************

    Mens Rights said:

    Kavita Jain, men’s rights issues are way beyond 498A and DV. These draconian laws are a mere reflection of the social bias against men. They are a manifestation of the symptom and not the disease itself. The disease is the continuous social oppression of men and the male disposable mindset in society, to name just two of the factors……

    ******************************

    Author’s Response:

    Mens Rights has said so well that I do not feel to say anything more on it ..But will definitely say thanks for your encouraging words…

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Tuesdays with Laurie

"Whatever you are not changing, you are choosing." —Laurie Buchanan

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