हत्या को आत्महत्या बताने के पीछे का खेल

पुलिस को गरियाना बिल्कुल उचित नहीं क्योकि पुलिस भी इसी सिस्टम में रहकर ही संचालित होती है। इसकी सिस्टम से अलग सत्ता नहीं है।

पुलिस को गरियाना बिल्कुल उचित नहीं क्योकि पुलिस भी इसी सिस्टम में रहकर ही संचालित होती है। इसकी सिस्टम से अलग सत्ता नहीं है।


जैसे कि अंदेशा था दिल्ली में १६ दिसम्बर की रात हुए सामूहिक दुष्कर्म के प्रमुख अभियुक्त ने आत्महत्या कर ली।  सरकारी सूत्रों की माने तो इस अति संवेदनशील प्रकरण में शामिल इस अभियुक्त ने तीन और बंदियों को अपने में समेटे हाई प्रोफाइल तिहाड़ जेल के एक बैरक में भोर के वक़्त आत्महत्या कर लिया। जाहिर है इस अभियुक्त की मौत के बाद इस गैंग रैप के असल कारण तक पहुचना असंभव हो जाएगा। किसी भी औसत दर्जे के विश्लेषक को भी ये समझने में जो अगर थोडा भी सचेत होकर इस मामले को १६ दिसम्बर की रात से ये कवर कर रहे हो समझ में आ जाएगा आसानी से अगर पहले नहीं   समझा तो अब कि ये गैंग रैप असल में पूरी तरह से सुनियोजित था। किसने इस प्रकरण को मास्टरमाइंड किया बस अब यही एक बात पहेली बन के रह जायेगी। ठीक उसी तरह जिस तरह सबूतों की छेड़छाड़ के कारण आयुषि हत्याकांड एक पहेली बन के रह गयी ये मामला भी बन के रह जाएगा। कोर्ट से दोषी सजा पा जायेंगे और इस मामले का पटाक्षेप हो जायेगा। ये मामला भी इतिहास के गर्भ में समा जाएगा।

एक नामी सेक्युलर पब्लिकेशन का भी यही मानना है कि ये हत्या है आत्महत्या नहीं पर जैसा सेक्युलर प्रकाशकों के साथ होता है इस मामले को ख़ास रुख देने की कोशिश की गयी है। ये बताया गया इस सेक्युलर मैगज़ीन के द्वारा कि ये पुलिस की मिलीभगत या पुलिस की भूमिका इस सामूहिक दुष्कर्म में ना पते चले इसलिए इस प्रमुख अभियुक्त को सुनियोजित तरीके से खत्म कर दिया गया। ये तय है कि इस सेक्युलर प्रकाशक के अलावा जितने और मेनस्ट्रीम मीडिया के प्रकाशक है वे भी यही सतही कारण देंगे या फिर ये राग अलापेंगी कि भारतीय जेल सुरक्षित नहीं है। लेकिन यही मेनस्ट्रीम प्रकाशक और ऐसी सेक्युलर पत्रिकाएँ खामोश रह जाती है जब नक्सली समर्थक बिनायक सेन को सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर जमानत दे दिया कि जेल के अन्दर सख्त सुरक्षा के चलते किसी तरह के खतरनाक चिट्ठी पत्री का आदान प्रदान नहीं हो सकता। जबकि ये असलियत सबको पता है कि जेल के अन्दर ही माफिया जिन्हें वी आई पी कैदी कहा जाता है ना सिर्फ हर तरह के ऐशो आराम भोगते है बल्कि जेल के अन्दर रह कर ही हर तरह की अवांछित गतिविधियों को अंजाम देते है। 

ये तो उसी वक़्त समझ में आ गया था कि मामला उस तरह का है नहीं जैसा कि दर्शाया जा रहा है जब पुलिस के अधिकारियो ने अपने से उच्च अधिकारी को लड़की का बयान सही तरह से लेने में बाधा डाल दिया। इस सन्दर्भ में आप घटना के तुरंत बाद ही लिखा गया ये लेख पढ़ सकते है जिसमे मैंने उसी वक़्त ये स्पष्ट कर दिया था कि ये सिर्फ सामूहिक दुष्कर्म का मामला नहीं है। फिर लड़की को सिंगापुर ले जाने का उपक्रम और उसके बीच इंडिया गेट या अन्य जगहों पर प्रायोजित धरना प्रदर्शनों ने पूरे मामले के गौड़ तत्त्वों को उभार कर रख दिया। इससें दो बाते समझ में आती है एक तो ये कि भारतीय लोगो को नौटंकी रास आती है और दूसरा ये कि जुर्म को सिर्फ जुर्म के दायरे में रख कर समझ पाने की कला अभी भारतीयों के समझ से बाहर है। इसलिए मोमबत्ती जुलूस, बेकार की हाय तौबा में सरकार ने दो हित साधे जो सीधे उसके सत्ता बचाने से सम्बन्ध रखता था। एक तो महिलाओ के सुरक्षा से सम्बन्धी कानून में संशोधन करके महिलाओ का वोट बैंक पक्का कर लिया। दूसरा नरेन्द्र मोदी की गुजरात में हुई जीत की चमक को बाँध दिया। ये नहीं भूलना चाहिए कि सत्ता में बने रहने के मोह के लिए कांग्रेस का ही क्या किसी भी पार्टी का इतिहास घृणित और घिनौना रहा है। ये तय है कि गैंग रैप अगर मोहरा ना बनता तो कुछ और मोहरा बनता। लेकिन बनता जरूर।

इसलिए इस पूरे मामले में पुलिस को गरियाना बिल्कुल उचित नहीं क्योकि पुलिस भी इसी सिस्टम में रहकर ही संचालित होती है। इसकी सिस्टम से अलग सत्ता नहीं है। मालिक का कुत्ता है। जब चाहा मालिक ने काट लेता है। नहीं चाहेगा तो नहीं काटेगा। अब इस १६ दिसम्बर की रात को वास्तव में क्या हुआ और किस तरह और क्यों  इस घटना को उभारा गया ये तो सिर्फ ईश्वर ही बता सकता है। पुख्ता सबूतों के अभाव में मै भी बेवजह व्यर्थ ही दिमाग के घोड़े नहीं दौड़ाउंगा लेकिन कुछ केस ऐसे होते है कि जहा पुख्ता सबूतों से ज्यादा घटना के हालात ही सारी स्थिति बयान कर देते है। इसलिए ये अब आपके ऊपर है कि आप वो सच मानते है जो सत्ता के मोह में लिप्त सरकार दर्शाना चाह रही है या जो हालात चीख चीख कर बता रहे है पर आप है कि देखना और समझना ही नहीं चाहते है।

 

प्रायोजित धरना प्रदर्शनों ने पूरे मामले के गौड़ तत्त्वों को उभार कर रख दिया। इससें दो बाते समझ में आती है एक तो ये कि भारतीय लोगो को नौटंकी रास आती है और दूसरा ये कि जुर्म को सिर्फ जुर्म के दायरे में रख कर समझ पाने की कला अभी भारतीयों के समझ से बाहर है

प्रायोजित धरना प्रदर्शनों ने पूरे मामले के गौड़ तत्त्वों को उभार कर रख दिया। इससें दो बाते समझ में आती है एक तो ये कि भारतीय लोगो को नौटंकी रास आती है और दूसरा ये कि जुर्म को सिर्फ जुर्म के दायरे में रख कर समझ पाने की कला अभी भारतीयों के समझ से बाहर है

References:

The Economic Times

Delhi Gang Rape: Important Aspects Ignored By Paid Media

Kafila

Supreme Court Grants Bail  To Binayak Sen

Business Standard

Ayushi Murder Case


Pics  Credit:

Pic  One

Pic Two

17 responses

  1. True

    1. @VB Mehrotraji..

      खेल को समझना चाहिए ..हम या तो तमाशाई बन जाते है या फिर उसमे गधो की तरह शरीक हो जाते है …

  2. Many thanks to these readers for making their presence felt on this post…

    Swati Kurundwadkar, New Delhi;Rajendra Gagare,Ahmednagar, Maharashtra; Anupam Verma, New Delhi; Deepak Sarin; Sudhir Gawandalkar, Bangalore,Karnataka; Chandrapal S. Bhasker, United Kingodom; Sudesh Sharma, Bhiwadi, Rajasthan;Praful Kr, Mumbai, Maharashtra; Swami Prabhu Chaitanya, Patna, Bihar; Deewakar Pandey, New Delhi.

  3. Ramakant Pandey, Rudrapur, West Bengal, said:

    पर ये खेल एक हाथ से नहीं हुआ। पूरा खेल दोनों हाथो की देन है। गन्दगी और बदबू छुपती नहीं। एक न एक दिन बाहर आ ही जायेगी। इंतज़ार करना होगा।

    Author’s Response:

    पर क्या तब तक लोगो की चेतना में ऐसी किसी घटना का भान भी रहेगा .

  4. Anand G. Sharmaji, Mumbai, said:

    One should learn to see through the “Intention” behind the facade of “Pretension”..

    Author’s Response:

    ये आप जैसे सचेत लोगो को ध्यान में ही रख कर लिखा …केवल कुछ लोग ही है जो खेल को अच्छी तरह से समझ रहे है। और ये खेल है बहुत खतरनाक इस देश के लिए। इसलिए समझना और सचेत रहे कम से कम कुछ लोग भी तब भी काम चल जाएगा।

  5. आदरणीय अरविंद जी,
    जाहीर है कि राम सिंह कोई उल्टा-सीधा बयान नहीं दे पाये, इसीलिए उसको मार कर आत्महत्या साबित किया गया | रही बात महीला वोट की तो यह कानून तो सीधे तौर पर महिलाओं के खिलाफ हैं क्योंकि जो लड़कियां अपना बलात्कार नहीं चाहती वो भला किसी निर्दोष पर झूठा दोषारोपण कर के क्या हासिल करेंगी | यहाँ तो सरासर उस शोषक वर्ग को फाइदा है जो अब सोलह वर्ष की कन्याओं के साथ भी बलात्कार कर के उसे कोर्ट मे सहमति से सेक्स साबित कर देगा ……. जो निरीह लड़कियां बची थी वो भी अब असुरक्षित हो गईं |

    1. @Baijnathji…

      बैजनाथ जी इस खेल को समझने के लिए जस्टिस वर्मा कमेटी की रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन करना पड़ेगा। कानून से किसे फायदा होता है ये हम सबको पता है। मुद्दा ये नहीं कि कानून से नफा नुक्सान किसका होगा लेकिन कानून तो बन गया ना। और यहाँ सिर्फ उल्टा सीधा बयान देने तक ही बात नहीं थी। इस आदमी के तार निश्चित ही मास्टरमाइंड तक जाते होंगे और तभी इसे खत्म कर दिया गया। अफज़ल और कसाब के लिए घड़ो आंसू बहाने वाली मानवाधिकार संस्थाएं आगे नहीं आई आंसू टपकाने के लिये। और सोचिये इस न्याय परंपरा का कि आप जेल में भी किसी को टपका सकते है। रहा सवाल उम्र को कम कर देने का तो वो इस पोस्ट का बिंदु नहीं है सो कोई टिप्पणी नहीं।

      हां मूल पोस्ट पर आकर टिप्पणी देने के लिए अलग से धन्यवाद क्योकि इसका अपना विशेष महत्त्व है।

  6. Baijnath Pandey, Patna, Bihar, said:

    कुछ खेल कॉमन सैन्स से भी समझ मे आ जाते हैं क्योंकि कोर्ट और कमिटी भी इसी सिस्टम की हिस्सा है जिस सिस्टम की बात आपने अपने पोस्ट मे की है | और, चुकी आपने वोट बैंक के लिए इस सहमति से सेक्स वाले कानून की चर्चा अपने पोस्ट मे की थी इसीलिए इसका जिक्र भी आवश्यक हो गया था..

    ये आपने सही कहा की मास्टर माइंड सामने आ जाता उसके कुछ भी बकने से, शायद इसीलिए कथा ही समाप्त कर दी गयी.

    Author’s Response:

    मैंने जिस कानून का जिक्र किया उसमे महिलाओ की सुरक्षा से सम्बंधित पक्ष पे ज्यादा जोर था। जिन कानूनों का जिक्र मैंने किया वे ये थें…

    http://en.wikipedia.org/wiki/Criminal_Law_(Amendment)_Ordinance,_2013

    *******************************

    http://www.lawyerscollective.org/blog/sexual-harassment-women-workplace-bill-2012-passed-lok-sabha.html

    **************

    …………….रहा सवाल इस खेल को समझने का तो मैंने तब समझा था जब लोग या तो बकैती कर रहे थे या मोमबत्ती जला रहे थें।

  7. Scott Marquardt, Hoffman Estates, Illinois, United States:

    Woah!!! Translate brother!!

    Author’s Response:

    It appears conscious readers failed to have a look at the article which appeared before the publication of this Hindi version..This Hindi version is apparently the rough translation of the same article:

    https://indowaves.wordpress.com/2013/03/14/when-murder-becomes-suicide/

    ****************

    “किसी भी औसत दर्जे के विश्लेषक को भी ये समझने में जो अगर थोडा भी सचेत होकर इस मामले को १६ दिसम्बर की रात से ये कवर कर रहे हो समझ में आ जाएगा आसानी से अगर पहले नहीं समझा तो अब कि ये गैंग रैप असल में पूरी तरह से सुनियोजित था। किसने इस प्रकरण को मास्टरमाइंड किया बस अब यही एक बात पहेली बन के रह जायेगी। ठीक उसी तरह जिस तरह सबूतों की छेड़छाड़ के कारण आयुषि हत्याकांड एक पहेली बन के रह गयी ये मामला भी बन के रह जाएगा। कोर्ट से दोषी सजा पा जायेंगे और इस मामले का पटाक्षेप हो जायेगा। ये मामला भी इतिहास के गर्भ में समा जाएगा।”

    Even the most average analyst, one who has been keeping a close eye on the sequence of events since December 16 in the aftermath of gang-rape, would easily realize, if not understood earlier, that this gang-rape was a well-planned event. Now, after the alleged murder of the prime accused, it would be hard to ascertain who exactly masterminded the whole episode. That would now remain an enigmatic episode. The whole issue would meet the same fate which came to hit the Ayushi murder case- the case that remained an unresolved issue because of the tampering with vital evidences. The other surviving accused shall face conviction and that’s all- the issue would then get dumped in the dustbin of time.

    (Translation by the author)

  8. James Portocarrero, Ukiah, California, USA:

    “किसी भी औसत दर्जे के विश्लेषक को भी ये समझने में जो अगर थोडा भी सचेत होकर इस मामले को १६ दिसम्बर की रात से ये कवर कर रहे हो समझ में आ जाएगा आसानी से अगर पहले नहीं समझा तो अब कि ये गैंग रैप असल में पूरी तरह से सुनियोजित था। किसने इस प्रकरण को मास्टरमाइंड किया बस अब यही एक बात पहेली बन के रह जायेगी। ठीक उसी तरह जिस तरह सबूतों की छेड़छाड़ के कारण आयुषि हत्याकांड एक पहेली बन के रह गयी ये मामला भी बन के रह जाएगा। कोर्ट से दोषी सजा पा जायेंगे और इस मामले का पटाक्षेप हो जायेगा। ये मामला भी इतिहास के गर्भ में समा जाएगा।”

    Any mediocre analyst who also understand this if a little too conscious of this case on the night of Dec. 16, these are covered will be understood easily if treated before so now that these gang rap actually fully planned to have this case mastermind who was just so the only thing left of puzzles. exactly the way due to tampering of evidence ayushi The massacre became a puzzle longer added it will also become a matter of guilty will find the sentence the Court. the case will climax may. these matters into the womb of history.-Arvind K Pandey (Translated by Bing)

    ****************

    Author’s Response:

    Thanks for making a valiant effort in having the translation, courtesy Bing…However, these systems offering instant translation, are yet to develop a perfect mechanism, even as they let you know the essence inherent in the piece translated.

    I have presented the exact translation to my friend Scott Marquardt 🙂 Anyway, I really need to appreciate the sense of involvement shown by James..Keep it up🙂

  9. Tamojit Das said:

    Arvind K Pandeyji, Are you suspecting December 16 episode is planned in advance?? I am interested to learn more about this.

    **************

    Author’s Response:

    I do not have enough material evidences to presume that and so it”s better I do not make any strong assertions in this regard…That’s not my style to shoot arrow in darkness..However, the point that I wish to state is that a government governed by the lust of power can go to any extent to save its throne..

    True, there are no concrete material evidences, but as I have said in my Hindi version that sometimes circumstantial evidences are strong enough to let you know the real picture..The timing of this episode, the obstruction posed in the recording of statement of the girl, the huge drama involved and now the death of the prime accused!… What else you wish to have in name of material evidences?

    Kindly, read the Hindi version with proper attention plus its English Version..Read also the piece which I wrote immediately after the incident..You would have greater insights..

    English Version:

    When Murder Becomes Suicide:

    https://indowaves.wordpress.com/2013/03/14/when-murder-becomes-suicide/

    **********
    Delhi Gang Rape: Important Aspects Totally Overlooked By The Paid Mainstream Media:

    https://indowaves.wordpress.com/2013/01/01/delhi-gang-rape-important-aspects-totally-overlooked-by-the-paid-mainstream-media/

  10. Abhi Nav:

    There is a rumour that Indian govt knew about it in advance….

    Author’s Response:

    Well, I do not pay attention to rumours but it can now be safely presumed that even if it was not pre-planned in advance, the government did cash-in-on well rape episode in its favour…Kindly, read the statement of Chief Justice of India:

    *******************

    “What happened on December 16 in Delhi was sad and bad and something extraordinary, but at the same time not unique. This was made into a kind of an iconic situation,” Kabir said at an event organised by the Calcutta High Court to mark International Women’s Day.

    http://indiatoday.intoday.in/story/delhi-gangrape-case-not-unique-chief-justice-of-india-justice-altamas-kabir/1/257244.html

    ***************************

  11. Tamojit Das said:

    Arvind K Pandeyji, As I had sough advice from you earlier and I should request you to provide me some clue for the following matter.In the wake of December 16 tragedy there are ceaseless flow of anti-male stereotyping in the media and social networking sites lashing out in violent emotional relief and it has almost become universal that Indian male:Savage Rapist.So my question goes as follows that is there anything we could do collectively to bring our Apex courts’ attention to arrest those extremely harmful negative male stereotyping ? Any Legal steps or anything of that sort? Thank You!

    **********************************

    Author’s Response:

    Well, relax we are doing well to quash the impact of negative stereotyping..Instead of wishing any higher authority to heed to your concerns, it’s better you all conscious guys work at grass root level via social media to sabotage the misimpressions..Sooner or later, all concerned bodies would be compelled to take note of your views.. Please start doing the ground work now..Rest shall be taken care of as the time advances..

  12. Tamojit Das said…

    Thank you Arvindji, I am quite sure those who are spreading nagtive stereotyping are supported and funded by capitalist MNCs for their so called ” CSR or corporate social responsibility.Capitalist fund for social cause ? Well, there is a method in this madness, as it were…

    *****************

    Author’s Response:

    Well said..Indeed, that’s the case..

  13. मुझको भी तरकीब सिखा दे यार जुलाहे!!

    1. @PD

      जीते रहे…. जिंदा रहना भले ना आये मरना आप जरूर सीख जायेंगे🙂

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