वैलेंटाइन डे: लो आया मौसम प्यार के बिक्री का!

क्या प्रेम आज भी इतना ही मासूम है इस फूल की तरह?

क्या प्रेम आज भी इतना ही मासूम है इस फूल की तरह?

कल तथाकथित प्यार करने वालो का परम पुनीत दिवस है। कुछ कहने की जरूरत नहीं है कि फर्जी इमोशंस के साथ बहुत सारे गुलाबो का आदान प्रदान होगा। गुलाब का तो पता नहीं पर वो अगर समझदार लड़की होगी तो उसका काम तो लह गया क्योकि गुलाब तो मुरझा जायेंगे, चाकलेट उदर में समा जायेंगे लेकिन गिफ्ट हो सकता है अगले साल भी किसी और को देने में काम आ सकते है। क्योकि एक साल में बहुत से इस साल वैलेंटाइन डे मनाने वालो लड़कियों के बॉयफ्रेंड इनके द्वारा ऐक्स्ड (axed ) कर देने के कारण एक्स-बॉयफ्रेंड हो जाते है। एक्स- गर्लफ्रेंड भी अस्तित्व में आ जाती है। खैर ये सब पुराने प्रेमी नहीं कि जाके किसी सॉलिड रॉक के ऊपर कोई दुखांत सा गीत गाये। इतने संवेदनशील नहीं कि शोक मनाये। कुछ एक जो थोड़े दुखी होंगे वो जरूर सॉलिड रॉक कुक्कुर धुन में रचे गीत जैसे” जो भी मै कहना चाहू बर्बाद करे अल्फाज़ मेरे को गाने या सुनने के बाद “तू नहीं सही कोई और सही” को चरितार्थ करते हुएँ किसी नए के दामन से लिपट जायेंगें। अब कितने सारे आप्शन माने विकल्प  “जोड़ी ब्रेकर” के रूप में भटक रह होते है। वो तो पुराने प्रेमी थे जो बेचारे कितने साल महीने आंसू टपकाते थें प्यार की आग में तन बदन जल गया” गाते थें। अब तो आप इतने व्यापक विकल्पों वाले है कि मौका मिले तो “मेरे ब्रदर की दुल्हन” भी आपकी हो सकती है।

बाज़ार में देख रहा हूँ कि भोजपुरी गीतों के रोमांटिक एल्बम भी बहुत सारे आ गए है जिसके ऊपर “लभ” वाले चिन्ह बने हुएं है। मतलब प्यार का व्यापार ग्रामीण संस्कृति में गहनता से व्याप्त हो गया है। अहसास तो यही होता है। वर्ना ये अजंता-एलोरा की आधुनिक संस्करण तो भोजपुरी वाले “लभ” में इंटरेस्ट दिखाने से  रही। जितनी तेज़ी से भारत ग्लोबल हुआ उतनी तेज़ी से लव का ग्राफ भी बढ़ा ये तय है। दोनों में समानुपाती रिश्ता सा लगता है। खैर एक चीज़ ये है कि इंडिया ने अब इतनी फ्रीडम जरूर दी है कि अगर इतने सारे आप्शनस लॉन्ग टर्म, शार्ट टर्म, लिव-इन के बावजूद भी आप अगर अकेले रह गए तो आप अपने सेक्स के साथ भी लव कर सकते है। इससे आप का कॉन्फिडेंस लेवल तो बढेगा ही और साथ में आप सब पे धौंस जमा सकते है प्रोग्रेसिव बन कर। कम से कम लोगो को अपने अनुभव से उत्पन्न प्रोग्रेसिव लेक्चर तो झाड़ ही सकते है। थोडा अच्छा लिख लेते हो तो क्या पता आप एक दो नोवेल भी लिख दे और पुरस्कार वगैरह मिल गया, जो ऐसे थीम पे अन्तराष्ट्रीय या राष्ट्रीय जगत में कुछ न कुछ मिलना तय ही है, तो युवा वर्ग की नब्ज़ पकड़ने वाले तमगो सहित आप की लेखक के रूप में उभार तय है। 

वैलेंटाइन डे के ठीक एक दिन के बाद भट्ट कैम्प की मर्डर थ्री रिलीज़ हो रही है। ये सीरिज मैंने नहीं देखी है और ना मै चाहता हूँ कि इस सीरिज की कोई फ़िल्म देखने का सौभाग्य कभी भविष्य में बने लेकिन इस नयी फ़िल्म के पोस्टर में लिखी पंच लाइन आज के लव की हकीकत बयान कर देती है। लिखा है कि आप अपने प्रेमी को कितना जानते है? मतलब साफ़ है कि अगर आप सचेत नहीं है तो लव के बाद धोखा अवश्य है। वैसे अच्छा है वैलेंटाइन डे के ठीक एक दिन के बाद ही बहुत सारे नए नए प्रेमी भूतपूर्व प्रेमी हो जायेंगे। एक्सपीरियंस बढेगा युवाओं का। कैसी संस्कृति है कि वफ़ा की सोच भी रखना जुर्म से कम नहीं। सब में मिलावट, सब में खोट है चाइनीज़ माल की तरह। कब फुस्स हो जाए पता नहीं। एक युग था कि सरल और सीधा होना सम्मानजनक था। आज आप के नाकाबिलियत का परिचायक है। आप के विरुद्ध निकम्मेपन का तमगा है। शातिर दिमाग होना ही बुद्धिमानी बन गया है। खैर ये लव करने वाले प्रेमी उगते रहे, पनपते रहे। लेकिन चूँकि गाँव में “लभ” पाँव पसार चूका है इसलिए सरकार को जैसे शहर में लव के डाक्टर माने साइकोलोजिस्टस है जो प्यार के साइड इफेक्ट्स डिप्रेशन या टीनेज प्रेगनेंसी के केसेस को देखते है ऐसे कुछ डाक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रो में नियुक्त किये जाए। ताकि कम से कम प्रेम के बाद जो शॉक्स झेंले पड़े उनका निदान वैज्ञानिक तरीके से हो। खैर मेरी तरफ से सब प्रेमी जनों को शुभकामनायें। 

मेरे अन्दर तो साहिर की यही पंक्तियाँ उभर रही है:

हर चीज़ ज़माने की जहाँ पर थी वहीं है,
एक तू ही नहीं है

नज़रें भी वही और नज़ारे भी वही हैं
ख़ामोश फ़ज़ाओं के इशारे भी वही हैं
कहने को तो सब कुछ है, मगर कुछ भी नहीं है

हर अश्क में खोई हुई ख़ुशियों की झलक है
हर साँस में बीती हुई घड़ियों की कसक है
तू चाहे कहीं भी हो, तेरा दर्द यहीं है

हसरत नहीं, अरमान नहीं, आस नहीं है
यादों के सिवा कुछ भी मेरे पास नहीं है
यादें भी रहें या न रहें किसको यक़ीं है

 

प्रेम का एक एक स्वरूप ये भी है!

प्रेम का एक स्वरूप ये भी है!


Reference:

Kavita Kosh

Pics Credit: 

Internet

11 responses

  1. @ Vishal Sabharwalji..

    Haha. ..Very nice…. Deceit is respected and its a sure sign of Kaliyuga.

    Author’s Response:

    Youngsters of our times see gentleness and simplicity as something akin to drawbacks. For them biking on roads in great speed is the only sign of great understanding, great skillfulness! I wonder how can they fall in love?..And such guys are no less than heroes in eyes of equally crazy girls!

  2. Ghanshyam Das, United Arab Emirates:

    I asked one of my subordinates few years back, that why are you so enthusiastic about the coming 14th Feb next Day? It is just like any other day. She replied, “Sir, aap ke matlab ki baat nahi hai, aap ka jamana gujar gaya”.

    Author’s Response:

    You should have said that you are too immature to realize that “true love can come at any age.”

  3. Ajay Tyagi:

    …..”प्यार की बिक्री का मौसम”

    Author’s Response:

    कार्ड खरीदो, फूल खरीदो, चाकलेट खरीदो, रेस्त्रा में जाओ।।सिर्फ खरीदने का ही उपक्रम तो है सारी दुनिया में।कार्ड खरीदो, फूल खरीदो, चाकलेट खरीदो, रेस्त्रा में जाओ।।सिर्फ खरीदने का ही उपक्रम तो है सारी दुनिया में।

  4. Ghanshyam Das, United Arab Emirates, said:

    I asked one of my subordinates few years back, that why are you so enthusiastic about the coming 14th Feb next Day? It is just like any other day. She replied, “Sir, aap ke matlab ki baat nahi hai, aap ka jamana gujar gaya”.

    Author’s Response:

    You should have said that you are too immature to realize that “true love can come at any age.”

  5. Ghanshyam Das,United Arab Emirates, said:

    Arvind K Pandey ji, there is nothing like true love in this material world, we love only our imaginations/perceptions of personalities, and not the real persons. if the behaviour of the beloved changes, or he/she insult or hurt the lover the image get broken along with the so called true love. all is maya, illusion, and with an expiry date🙂

    Author’s Response:

    I don’t know whether or not you ever fell in love but what you are trying to convey cannot be heart felt unless you have been in love. I disagree totally with you that there is no such thing as true love. It’s is very much there but souls who can exhibit that have gone missing or they have become lesser in number.

    Anyway, it’s never easy to bear the pangs of separation, especially if the soul is truly sensitive one. A fact which only Krishna-oriented hearts alone can truly feel. It’s one of the sharpest pain to imbibe. That’s all I know Ghanshyam Dasji..

    Hindi Version Of The Same Comment:

    पता नहीं आपने प्यार किया है कि नहीं पर आप जो बयान कर रहे है वो कोई आसान बात नहीं . शायद किसी का यूँ ही बदल जाना उसकी फितरत हो। पर सोचिये उस संवेदनशील दिल पे क्या गुजरती होगी जिस पे ये गुजरती है। कोई कृष्ण ह्रदय ही ठीक ठीक महसूस कर सकता है। बेहद दुःख होता है।

  6. Yamini Tripathi, Bhopal, Madhya Pradesh, said:

    सही कहा आपने अरविन्दजी वो जमाना चला गया ..और जो वैसा हो भी वो आउटडेटेड कहा जाता है।

    Author’s Response:

    अरे इतने दिनों के बाद आपका आगमन देखकर बहुत ख़ुशी हुई। पता नहीं आप तलत की प्रशंसक है कि नहीं। लेकिन आप कि बात पढ़ते ही अचानक ये गीत याद आ गया ..अगर सुन सके तो जरूर सुने :

    मेरी याद में तुम ना आंसू बहाना

    http://smashits.saavn.com/audio/player.cfm?vt1xD5gO1JXd5ACk7rxoUrcQh+Gk/s//

  7. Shubhranshu Pandey’ Butul’ :

    लोगों को इससे क्या मतलब है कि आखिर इस त्योहार का मतलब क्या है ? क्यों है? उन्हे तो बस बाजार के साथ चलने में मजा आता है. जो बिकता है वो चलता है.

    आज से 15 साल पहले तक इसका प्रचार पेपर से किया गया फ़िर उस समय के कार्ड कम्पनियों ने इसे एक त्योहार का रुप देने के लिये हर सम्भव प्रयास किये. आज ये जिम्मा मोबाइल कम्पनियों ने उठा रखा है. लोगों को तो बस अपने आप को आधुनिक बताने के लिये फ़िजुल कि हरकत करने में आनन्द आता है.
    ये दिवस आज मध्यम वर्ग में अपनी पैठ जमा चुका है.

    अब आगे क्या होगा अल्ला जाने रे…

    Author’s Response:

    शुभ्रांशु भाई स्त्री जात हमेशा ही जैसे सड़क पे भालू नाचता है वैसे ही नचाती चली आई है लडको को। नए दौर में तौर तरीके बदल गए है। वैलेंटाइन बन के नचाना आधुनिक समय का नया तरीका है। भारतीय परंपरा में राधा कृष्णा के रूप में प्रेम हमेशा से सम्मानीय, अच्छे मूल्यों के साथ रहा है। हां युग बदला तो बाते भी नयी हो गयी, तरीके भी बदल गए, नतीजे भी बदल गए। कार्ड, चाकलेट, काकटेल, और न जाने क्या क्या पैदा हो गया। इस प्रेम गेम में फर्क इस बात से पड़ जाता है कि कोर वैल्यूज क्या है। लेकिन कोर वैल्यूज को निर्धारण करने और उनसे आपरेट करने की ताकत अब के लोगो में नहीं या इसकी जरूरत लोग महसूस नहीं करते। इतना मंथन करने की जरूरत नहीं क्योकि चढ़ी मुझे यारी तेरी ऐसी जैसे दारु देशी🙂

    http://ww.smashits.com/cocktail/daaru-desi/song-227783.html

  8. Words For Anand Prakash, Nagpur, Maharashtra:

    एक पक्के गृहस्थ और डाई हार्ड आफ़िसमय आत्मा को लेख पसंद आया ..अच्छा लगा ..वैसे साहिर, जो मेरे बहुत से जस्बातो को हुबहू बयान कर देते है बहुत सहज रूप में, ही का गीत मै सुन रहा था पता नहीं आपको पसंद आये या ना आये लेकिन मुझे बहुत पसंद है।। आप भी सुने।

    अगर मुझे न मिले तुम तो मै ये समझूंगी
    कि सिर्फ उम्र कटी जिंदगी नहीं गुजरी

    *************

    Audio Version:

    http://ww.smashits.com/kaajal/agar-mujhe-na-mile-tum/song-220033.html

  9. Ved Prakash Pandey, New Delhi:

    हा हा हा बिलकुल सही कहा …गिफ्ट हो सकता है अगले साल भी किसी और को देने में काम आ सकते है।

    Author’s Response:

    क्या करे प्रचलन ही ऐसा हो गया है …..आज कल का प्यार बहुत किफायती हो गया है😛

  10. Many thanks to these people who came and read this post:

    Rajesh Kumar Pandey, Allahabad, Uttar Pradesh; Neeraj Pandey; Shantanu Pandey; Sagar Nahar, Hyderabad, Andhra Pradesh; Baijnath Pandey, Patna, Bihar and Ravi Hooda, Canada and Ajay Tyagiji, Noida, Uttar Pradesh;

  11. Ghanshyam Dasji said:

    Arvind K Pandey ji, meri ek purani kavita aapki post ko samarpit

    ऐ गुलाब ! तुम बहुत भोले हो ।
    कोई निर्मम हाथ तुम्हे यूँ ही तोड़ लेता है,
    और खेलता है तुम्हारी कोमल पंखुड़ियों के साथ,
    और फेंक देता है फिर बाद मे कूड़ेदान मे,
    फिर भी तुम मुस्कुराते हो !
    ऐ गुलाब ! तुम बहुत भोले हो ।

    काश तुम भी अपनी डाल पर लगे काँटों की तरह,
    कठोर और नुकीले होते,
    तो कोई तुम्हे छूने की कोशिश न करता ।
    तुम क्यों इतने कोमल हो !

    Author’s Response:

    I thank the forces, who brutally trampled the rose in name of principles and idealism…It made the rose evolve to be part of world where none could reach other than silence in its most purest form…

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