इस असीम संभावनाओ से भरे भारत देश को टॉनिक नहीं सर्जरी की जरूरत है

 सार्थक बदलाव सिर्फ उम्मीद के सहारे नहीं होते

सार्थक बदलाव सिर्फ उम्मीद के सहारे नहीं होते


उम्मीद पे दुनिया कायम है. ऐसा मैंने बहुत से लोगो को कहते सुना है, महसूस करते देखा है. पर क्या उम्मीद के भरोसे चमत्कारी परिणाम की उम्मीद की जा सकती है? नहीं, बिल्कुल नहीं. सिर्फ उम्मीद का दामन थामने से काम नहीं चलता. बड़े और सार्थक बदलाव सिर्फ उम्मीद के सहारे नहीं होते बल्कि उम्मीद और कुशल नीति के समुचित सम्मिश्रण के दम पे होते है. अभी कुछ दिनों पहले मै अपना ही किसी पुराने मित्र को लिखा पत्र पढ़ रहा था. उस में अपने मित्र को जो सिर्फ प्रतीकात्मक तरीको को सब कुछ मान बैठा था को ये समझाने की चेष्टा थी कि सिर्फ मोमबत्ती जुलूसो इत्यादि क्रियाकलापों से बात नहीं बनती. उस पत्र का सम्पादित अंश मै आप सब के सामने रख रहा हूँ.  वैसे ये अजीब सी बात है कि मै अपना लिखा हुआ जब कई सालो के बाद पढता  हूँ तो ऐसा महसूस होता है कि जैसे किसी दूसरे का लिखा हुआ पढ़ रहा हूँ, ये यकीन कर पाना मुश्किल होता है कि मैंने खुद ये बाते कभी किसी को लिखी थी. सो सबकी तरह मै अपना ही लिखा एक अजनबी की भांति पढता हूँ और अब यही कर रहा हूँ इस पत्र को दुहराते वक्त.

” मित्र जिस देश में कफ़न से लेकर चारा तक में घोटाला हो रहा है वहा पे सिर्फ आशावाद या प्रतीकात्मक कदमो से काम तो नहीं चलने वाला. ये तो वही बात हो गयी कि जिस मरीज़ को सर्जरी की जरूरत हो उसे डॉक्टर साहब टॉनिक देकर घर जाने को कह दे!!  इस असीम संभावनाओ  से भरे देश को टॉनिक नहीं सर्जरी की जरूरत है. हमारे यहाँ के काबिल नौकरशाह जब पढ़ लिख कर कुर्सी पर बैठते है तो पैसा लूटने की मशीन बन जाते है. कामनवेल्थ से पहले की लूट खसौट पे गौर करो.  मायावती के जिन्दा लोगो के “welfare ” के बजाय  बेजान मूर्तियों से लगाव को देखो. मधु कौडा ने झारखण्ड जैसे कम विकसित राज्य में भी चार हज़ार करोड़ का घोटाला कर दिया इस पर भी गौर करो!! अब बताओ मित्र क्या सिर्फ प्रतीकात्मक आशावाद से इस देश का कल्याण हो सकता है ?

मित्र आपने कभी गौर किया है कि जो एलिट क्लास कभी वोट  देने भी नहीं निकलता पर फिर भी हर सुविधा का पूरा हिस्सा डकार जाता है अपने से कम हैसियत वालो को समाज पर बोझ  समझता है और इनसे दूरी  बना के रखता है. ये अलग बात है कि इस देश को भूखे नंगे किसान, साधनविहीन लोग ही चला रहे है. आश्चर्य नही कि  बाहर वाले इन्हें “slumdogs ” कहते है और हम इस पर ताली बजाकर जय हो करते है. आप का कहना है कि छोटी सी पहल बहुत दूर तक ले जाती  है. सही कह रहे हो मित्र.  आशावाद के दृष्टिकोण से पर यथार्थ में तो वोही होता है जो मुक्तिबोध बाबा कह रहे है इस कालजयी कविता में :
                           
 “भूत बाधा ग्रस्त
कमरों को अंध -श्याम साँय-साँय
हमने बताई तो
दंड हमी को मिला
बागी करार दिए गए ,
चांटा हमी को पड़ा ,
बांध तहखाने में-कुओ में फेंके गए
हमी लोग !!
क्योंकि हमे ज्ञान था ,
ज्ञान अपराध   बना !!
 
खैर मै घोर आशावादी हू इसलिए मै सार्थक पहल वाली तुम्हारी बात की  मै उपेक्षा नहीं करना चाहूँगा. ये जानता हू कि भ्रष्टाचार से भरे समाज में प्रतीकात्मक कदमो से कोई ख़ास बात नहीं बनने वाली पर फिर भी  दुष्यंत साहब कि ये पंक्तिया भीतर एक अच्छा एहसास पैदा करती है:  कौन कहता है कि आसमां में छेद नहीं होता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो.”

इस असीम संभावनाओ  से भरे देश को टॉनिक नहीं सर्जरी की जरूरत है

इस असीम संभावनाओ से भरे देश को टॉनिक नहीं सर्जरी की जरूरत है

Pics Credit:

Pic One 

Cartoon Borrowed From Internet

6 responses

  1. @Sudhir Dwivedi, New Delhi, said:

    बिल्कुल सही फरमाया अरविन्दजी आपने!

    Author’s Response:

    हमे सिर्फ प्रतीकात्मक तौर तरीको के मोह में ना पड़कर व्यवस्था से लड़ने का कारगर तरीका ढूदना पड़ेगा…अपने उदगार व्यक्त करने के लिए आपको धन्यवाद सुधीरजी.

  2. Dharmendra Sharma, United Arab Emirates, said:

    सही बात है..

    Author’s Response:

    जब पानी सर के ऊपर से गुजर रहा तो उस वक्त प्रतीकात्मक तौर तरीको को आजमाना एक प्रकार की कायरता होती है..हकीकत ये है कि हम में एक प्रकार कि बुजदिली घर कर गयी है. हम व्यवस्था को बदलना ही नहीं चाहते है ठीक ठाक से. कुछ हुआ तो बस मरहम लगा दो भले ही सड़े गले अंग को काटने की नौबत ही क्यों ना आ गयी हो.

  3. धन्यवाद आप सभी पाठकगण लोग को इस लेख पर अपनी उपस्थिति जताने के लिए.

    Prabhakar Vishwakarma, Mirzapur (Uttar Pradesh); Atul Tripathi, Orai (Uttar Pradesh); Inderjit Kaur,Jalandhar(Punjab); Jatinder Sharma, Bureau Chief, Daily Aaj Ka Jalandhar (Punjab); Vilma Delatorre, La Habana ( Cuba);Indu Upadhyaya; Vipin Singh, Devas (Madhya Pradesh); Himanshu B. Pandey, Siwan (Bihar); Anjeev Pandey, Nagpur (Maharashtra); Yogesh Pandey, Lucknow (Uttar Pradesh);Rajiv Gangar, Mumbai (Maharashtra); Deepak Kulkarni; Arvind Sharma, Indore (Madhya Pradesh); Himanshu Singh, Hyderabad (Andhra Pradesh); Shikha Shuklaji, Jaipur (Rajasthan); Shruti Sikarwar, Bangalore (Karnataka) and Pankaj Kr Singh, New Delhi;

  4. Sw. Prabhu Chaitanya | Reply

    यह लेख भी रेचन से अधिक क्या है मित्र ?

    जहाँ सब कुछ का मूल्य पैसों से ही तुलता हो
    चौथा स्तम्भ लगभग बिका हुआ हो
    I A C का हश्र देखिये क्या हुआ
    गहन मीमांसा की आवश्यकता है मित्र
    और
    और बहुत सारी बातें है
    बहुत सारे पहलू हैं
    मैं आशावादी नहीं हूँ

    1. कम से कम आपके शब्दों में ईमानदारी तो झलकती है प्रभुजी…निरर्थक आशावाद का मै भी समर्थक नहीं. पर बात ये है कि आशावाद के अभाव में मै निराशावादी भी नहीं होना चाहता. लिहाजा हर वो किरण सम्मानीय है जो राह दिखाती है. बस ऐसी ही किरणों को मै प्रमोट करता रहता हू. क्या पता कब क्रान्तिकारी बदलाव आ जाए? बाकी तो आपने कह ही दिया कि तम अपने चरम पर है.

      वर्डप्रेस पे आने के लिए साधुवाद.

  5. Anupam Vermaji, New Delhi, said:

    बिल्कुल सत्य कहा है Arvind K Pandey Ji

    ***************
    Author’s Response:

    अनुपमजी आप बहुत गंभीर क़िस्म के पाठक है. लिहाजा आपकी सहमती मेरे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है. खैर, हम कामचलाऊ तौर तरीको के अभ्यस्त हो गए है. अगर देश के लिए कुछ सार्थक करके जाना है तो ऐसे तरीको से ऊपर उठाना पड़ेगा.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

The great Rudolf Steiner Quotes Site

Quotes and fragments from the work of the great visionary, thinker and reformer Rudolf Steiner

Bhavanajagat

Welcome to Noble Thoughts from All Directions to promote the well-being of man and to know the purpose in Life.

Serendipity

Was I born a masochist or did society make me this way? I demand unconditional love and complete freedom. That is why I am terrible.

John SterVens' Tales

Thee Life, Thee Heart, Thee Tears

Indowaves's Blog

Just another WordPress.com weblog

Una voce nonostante tutto

Ognuno ha il diritto di immaginarsi fuori dagli schemi

Personal Concerns

My Thoughts and Views Frankly Expressed

I love a lot

Just another WordPress.com site

the wuc

a broth of thoughts, stories, wucs and wit.

A Little Bit of Monica

My take on international politics, travel, and history...

Atlas of Mind

Its all about Human Mind & Behavior..

Peru En Route

Tips to travel around Perú.

Health & Family

A healthy balance of the mind, body and spirit

मानसिक हलचल

ज्ञानदत्त पाण्डेय का हिन्दी ब्लॉग। मैं यह ब्लॉग लिखने के अलावा गाँव विक्रमपुर, जिला भदोही, उत्तरप्रदेश, भारत में रह कर ग्रामीण जीवन जानने का प्रयास कर रहा हूँ। रेलवे से ज़ोनल रेलवे के विभागाध्यक्ष के पद से रिटायर्ड अफसर।

Monoton+Minimal

travel adventures

Stand up for your rights

Gender biased laws

The Bach

Me, my scribbles and my ego

Tuesdays with Laurie

"Whatever you are not changing, you are choosing." —Laurie Buchanan

%d bloggers like this: