राजेश खन्ना: सबके नैनो को सावन भादो करके चले गए तुम

 

राजेश खन्ना : अब क्षितिज के उस पार

राजेश खन्ना : अब क्षितिज के उस पार


राजेश खन्ना का यूँ  ही अचानक क्षितिज के उस पार चले जाना दुखी करता है. अभी उनकी उम्र ही क्या हुई थी लेकिन कलाकारों की मौत का जो सिलसिला पिछले साल से शुरू हुआ है वो अब तक बना हुआ है. जगजीत सिंह, शहरयार,  मशहूर संगीतकार रविजी, हिंदी के लेखक श्रीलाल शुक्ल, शम्मी कपूर, फिर हमारे चहेते हनुमान दारा सिंह और अब राजेश खन्ना. ऐसा लगता है कि देवलोक का माहौल बहुत ग़मगीन हो गया है तभी पृथ्वी के सभी बड़े कलाकार एक के बाद  ऊपर के लोको में चले जा रहे है. खैर राजेश खन्ना की मौत के बाद  ये एहसास मुझे हो चला है कि मौत भी कोई चीज़ होती है जो “आनंद” को भी शोक में   परिवर्तित कर सकता है. हिंदी फ़िल्म जगत को पहला सुपरस्टार देने वाला अब यादो का हिस्सा बन गया है. ये सुपरस्टार क्या चीज़ होती है मुझे ज्यादा नहीं पता पर राजेश खन्ना का जादू  सत्तर के दशक में यूँ चढ़ा कि माएं अपने बच्चो का नाम राजेश रखने लगी, युवतियों के अन्दर का पागलपन थोडा और बढ़  चला और नाई के दुकान पे एक और हेयर स्टाइल का उदय हो गया. बुरा हो एंग्री यंगमैन अमिताभ के अवतार का जिसने राजेश की आभा को ग्रहण लगा दिया बहुत जल्द ही पर तब तक राजेश का जादू एक अमरता को प्राप्त कर चला था.

जैसा सब अच्छे  कलाकारों के साथ होता है राजेश को भी आरंभिक दिनों में सब ने नकार दिया. चोटी की अभिनेत्रियों ने काम करने से मना कर दिया. शुरुआती फिल्मे पिट गयी बाक्स ऑफिस पे. फिर जाके आराधना मिली जिसको लेके राजेश खन्ना खुद ही सशंकित थे क्योकि नायिका प्रधान फ़िल्म में इनके लिए कुछ ख़ास नहीं था. पर जब सफलता मिलनी  होती है तो मिल के रहती है यूँ ही जैसे रेगिस्तान में झरने का फूट  पड़ना. कम से कम बालीवुड में सफलता का सिलसिला ऐसे ही शुरू हो जाता है सब  तर्कों  को धता बता के.  तो एक नायिका प्रधान फ़िल्म ने भारतीय रजत पटल को उसका पहला सुपरस्टार दिया.

बालीवुड में वैसे सुपरस्टार को कुछ ख़ास एक्टिंग नहीं करनी पड़ती. कम से कम आज कल के तथाकथित “खान” सुपरस्टारों को देख तो यही समझ में आता है. अमिताभ का भी यही दुखड़ा रहा है कि उनसे किसी ने ढंग की एक्टिंग नहीं करवाई  सिवाय ढिशुम ढिशुम के. खैर राजेश खन्ना के हाथ कुछ अच्छी फिल्मे आई जिनमे उन्हें एक्टिंग के अपने कुछ ख़ास शेड्स दिखाने का मौका मिला. ये एक महज सयोंग ही है कि ऋषिकेश मुखर्जी ने ही राजेश खन्ना और अमिताभ दोनों को कुछ फिल्मे प्रदान कि जिनमे उन्हें वास्तविक अभिनय से दो चार होना पड़ा. ये भी क्या अद्भुत  संयोग है कि इन दो फिल्मो “आनंद” और “नमक हराम” में दोनों ने साथ काम किया. आनंद एक कालजयी फ़िल्म बन के उभरी. आनंद तो अमर हुआ ही पर बाबु मोशाय भी कभी ना मरने वाली लोकप्रियता को प्राप्त हो चला. आनंद उपनिषद् के इस सत्य को प्रतिपादित करता था कि इंसान कभी नहीं मरता है. मौत एक तमाशा है जिसमे आत्मा को नए कपडे लत्ते मिल जाते है. इस भाव को राजेश खन्ना ने अद्भुत तरीके से परदे पे प्रस्तुत किया.

राजेश खन्ना के एक्टिंग में एक ख़ास तरीकें की नाटकीयता थी मगर जब कभी सधा हुआ अभिनय करने का मौका मिला उन्होंने कर दिखाया.  शुरुआती दौर में नंदा के साथ आई  यश चोपड़ा की “इत्तेफाक” इस बात की पुष्टि करती है. खैर अमर प्रेम, कटी पतंग, कुदरत, सौतन, थोड़ी सी बेवफाई, अवतार, डोली, रोटी और आन मिलो सजना इनकी कुछ उल्लेखनीय फिल्मे है. इनकी सफलता के बारे में बात करना और किशोर कुमार, आर डी बर्मन, मजरूह, आनंद बक्षी, एस डी बर्मन,  लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, कल्यानजी आनंदजी, हेमंत कुमार और खैय्याम इत्यादि का जिक्र ना करना मतलब दाल में से नमक का गायब कर देना है. किशोर कुमार ने ही रूमानियत के सुपरस्टार राजेश खन्ना और यंग्री यंग मैन अमिताभ को वो दर्जा दिलवाया जो किसी के लिए दुर्लभ  होता है. किशोर कुमार के चले जाने के बाद ये दोनों  धडाम से नीचे आ गिरे.  सोचिये अगर किशोर ना होते तो “मेरे सपनो की रानी” कहा से आती इस शानदार तरीके सें ? सोचिये अगर  “ओ मेरे दिल के चैन” के चैन किशोर ना होते तो क्या राजेश तनूजा को इम्प्रेस कभी कर पाते!  और रोटी में गाया ये गीत “ये जो पब्लिक है ये सब जानती है”  तो एक कालजयी मुहावरा ही बन गया. और इस फ़िल्म में किशोर कुमार का गोरे रंग पे कटाक्ष ” गोरे रंग पे ना इतना गुमान कर” सिर्फ मुमताज़ पर ही नहीं सिमट के रह गया वरन  इस गीत के बाद भारत में पैदा हुई हर गोरी लड़की के व्यक्तित्व को बेधता चला गया.

खैर ईश्वर इनकी आत्मा को शांति प्रदान करे. कहते है जाने वाले कभी लौट के नहीं आते. सिर्फ इनकी याद रह जाती है. सही बात है ” कुछ लोग जो बिछुड़ जाते है वो हजारो के आने से मिलते नहीं“. पर “आनंद” कभी मरते नहीं बस इसी रंगमंच पर  रूप बदल के आ जाते है और ये बोध  इस दुःख में एक मुस्कान की लहर तो पैदा ही कर देता है. पुनर्मिलन की उम्मीद तो बंधा ही देता है.

मेरे कुछ पसंदीदा गीत राजेश खन्ना पे फिल्माए हुए:

१. मेरे नैना सावन भादो ( मेहबूबा)

२. कुछ तो लोग कहेंगे  (अमर प्रेम)

३. जिंदगी प्यार का गीत है  (सौतन)

४. हज़ार राहे मुड़ के देखी (थोड़ी से बेवफाई)

५. वादा तेरा वादा (दुश्मन)

६. सजना  साथ निभाना (डोली)

७. प्यार दीवाना होता है ( कटी  पतंग)

८. ये रेशमी जुल्फे  ( दो रास्ते)

९. जीवन से भरी तेरी आँखें (सफ़र)

१०. जुबान  पे दर्द भरी दास्ताँ( मर्यादा)

११.  वो शाम कुछ अजीब थी  (खामोशी)

१२. यूँ ही तुम मुझसे बात करती  हो  (सच्चा झूठा)

१३. मेरे दिल में आज क्या है (दाग)

१४. कही दूर जब दिन ढल जाए (आनंद)

१५. जिंदगी एक सफ़र है सुहाना   (अंदाज़)

आनंद मरा नहीं करते!!!

आनंद मरा नहीं करते!!!

Pics credit:

Pic One 

Pic Two

 

10 responses

  1. अरविंद जी आपने सही कहा …काका सभी के चहेते थे ..पर ये तो दुनिया का दस्तूर है …जो आया है सो एक न एक दिन जाना ही होगा …हार्दिक श्रद्दांजलि …

    1. @Sanjay Verma

      सही है….जन्म हुआ है तो मरण भी निश्चित है..

      अगर तुम ना होते से ये टाइटल ट्रैक सुने..

      http://www.dhingana.com/hindi/agar-tum-na-hote-songs-asrani-madan-puri-oldies-33ec5d1

  2. Dilip Kawathekar, Indore (Madhya Pradesh) said:

    ये तो नियति है, मगर ये क्यों है ?

    Author’s Response:

    इसका सही सही जवाब सिर्फ ब्रह्माजी ही दे सकते है …पर आप ये “कुदरत” फ़िल्म का बहुत ही कम सुना गया ये बेहद सुंदर गीत सुने जो चंद्रशेखर गाडगिल जी की आवाज में है..

    दुःख सुख की हर एक माला कुदरत ही पिरोती है..

    [audio src="http://sound28.mp3pk.com/indian/kudrat1980/kudrat07(www.songs.pk).mp3" /]

  3. Dhanyavad in mitro ka jinhone is lekh ko padhne me apni ruchi dikhayi..

    Sanjay Verma, Jabalpur (Madhya Pradesh); Swami Prabhu Chaitanya , Patna (Bihar); Chaitanya , Bhopal (Madhya Pradesh); Anjeev Pandey , Nagpur (Maharashtra), SC Mudgal, New Delhi; Himanshu B. Pandey, Siwan (Bihar); Himanshu B.Pandey, Ahmedabad (Gujarat); Rajesh Kumar Singh,Jaipur (Rajasthan); Raveendra Kumar, Bhubaneswar (Orissa) and Mithilesh Mishra, New Delhi…Dhanyavad aap sabhi ko…

  4. Aap sab ke liye ek geet ….Daakiya Daak Laya…

    http://www.raaga.com/play/?id=107287

    Movie: Palko Ki Chaav Mein..Lyricist: Gulzar; Music: Laxmikant Pyarelaal

  5. These readers also came to like this post a lot.

    Parmod Srivastava, Video Editor (Sahara Samay), New Delhi; Srikant Nagarpurkar, Hyderabad(Andhra Pradesh); Surendra Kumar; Shyam Sankat,Bhopal (Madhya Pradesh); Shashi Shekhar, New Delhi; Arvind Godara; Kumar Vidrohi, New Delhi; Niraj Rai, Balia (Uttar Pradesh) and Rakesh Pandey, Bhopal (Madhya Pradesh).

  6. Few words for my friend Amit Chaturvedi, New Delhi:

    Pretty late remembrance on your part! But ,at least, you didn’t forget provides me solace.. It’s no “Ittefaq” (Coincidence) that I am making you listen this beautiful song from “Anurodh”..I always used to sing this song in happy mood..Now when I am singing it today, it’s becoming tough to keep the emotions in check..

    Lyrics: Anand Bakshi : Music composed by : Laxmikanth Pyarelal

  7. A lot depends on how the song is picturized..I love this song not only for beautiful verses by Majrooh Sultanpuri, excellent composition by R D Burman, terrific singing by Kishore Kumar, but also for its mesmeric picturization..Absolutely stunning romantic song picturized in a perfect setting….A meaningful one as well. The verses are not only talking about romance in some absurd way like “Tum mujhko chand laake do” but they are having a take on it in a balanced way.. The movie was full of typical Bollywood elements ( and that’s why I don’t like this movie) but the songs stand apart.

  8. Anand Prakash, Nagpur (Maharashtra) said:

    Your deep inner voice….

    Author’s response:

    It’s a sad commentary on present times..

  9. Many thanks to Jyotsna Pathania, Reviewer based in Pathankot ( Punjab)and Dubeyji, Ranchi (Jharkhand) for showing interest in this post…

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