नेता नहीं जानते: गरीब और गरीब बनते है जब अय्याशी और बदतमीज़ी बने सरकारी

सरकारी पैसे का दुरुपयोग गरीब सरकार के द्वारा

सरकारी पैसे का दुरुपयोग गरीब सरकार के द्वारा

मुझे ये समझने में खासी दिक्कत होती है कि हमारे जो थोड़े सुलझे हुए नेता बचे है वो क्यों ओछी और बचकानी हरकतों पे उतर आते है? ये श्रेय और प्रेय का भेद उन्हें क्यों नहीं समझ में आता जब वे गद्दी पे बैठते है? क्रिकेट के सबसे लुच्चे देशी संस्करण आईपीएल में कोलकाता नाइटराइडर्स की जीत को सरकारी जश्न समारोह में तब्दील करना कितना जरूरी था? क्या आईपीएल की हकीकत लोगो को मालूम नहीं? ललित मोदी और लेखक से राजनेता बने शशि थरूर ने अपना सब कुछ खोया इसी आईपीएल में मौजूद खतरनाक तत्त्वों के चलते जिसमे मुनाफे के गणित के खातिर हर घिनौनी हरकत हो सकती है. सही बात है आज पैसा सब कुछ है. यही खिलाडी जब राष्ट्रीय टीम में खेलते है तो हज़ार बहाने बनाते है ख़राब परफार्मेंस के लिए मगर जब कार्पोरेट जगत के मठाधीशो के लिए बोली में बिक कर इनके टीमो के लिए खेलते है तो “कोरबो लोड़बो जीतबो रे” के आलावा कुछ नहीं सूझता क्योकि कुछ तो मालिको का क्रूर दबाव रहता है और फिर पैसो का नशा तो है ही.

इसके पहले मै इस सरकारी पैसे के दुरुपयोग के बारे में कुछ कहू ये जान लेना बेहतर रहेगा कि कैसे कैसे हादसे, किन तत्त्वों से इस संस्करण का देशी संस्करण तैयार हुआ है. अभी अभी प्राप्त एक खबर के अनुसार कोलकाता नाइटराइडर्स के लिए किसी वक़्त खेले पाकिस्तानी क्रिकेटर उमर गुल के भाई के खतरनाक आतंकवादियों के संपर्क में रहने के सबूत मिले है. ये सब को पता है कि जब पूरा देश पाकिस्तानी क्रिकेटरों को आईपीएल में ना शामिल करने का पक्षधर था खंडित व्यक्तित्व के मालिक शाहरुख़ खान ने सबसे ज्यादा पाकिस्तानी रूख का पक्ष लिया था. इतना ही नहीं इनके लिए बाढ़ पीडितो के पक्ष में पाकिस्तानी चैनल के द्वारा प्रायोजित एक कार्यक्रम भी करके चले आये जबकि पूरा देश २६/११ को हुए हमलो पर अपना शोक प्रकट कर रहा था. इतना अत्यधिक प्रेम उमड़ा पाकिस्तान के लिए कि देश में व्याप्त शोक की लहर की उपेक्षा करना इन्होने जरूरी समझा. इस समारोह से सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई कैसे होगी ये तो राम जाने पर खबर ये आई है कि शाहरुख़ करीब तीस करोड़ रुपये एक फुटबाल क्लब में लगाने वाले है. तो ये है स्पोर्ट्स का धंधे में तेज़ी से रूपांतरण और साथ में विकृत होती हमारी मानसिकता.

एक टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन के बाद आईपीएल के पांच खिलाड़ियों टी.पी सुधीन्द्र (डेक्कन चार्जर्स), मोहनिश मिश्रा (पुणे वॉरियर्स), अमित यादव (किंग्स इलेवन पंजाब), शलभ श्रीवास्तव (किंग्स इलेवन पंजाब) और प्रथमश्रेणी क्रिकेटर अभिनव बाली को स्पॉट फिक्सिंग में लिप्त पाए जाने के सबूत मिलने के बाद इन पांचो खिलाड़ियों को निलम्बित कर दिया गया है. इस मामले में अब उच्च स्तर की जांच चल रही है। अब आते है कोलकाता में हुए जश्न पर. इस भव्य जश्न में लगभग ४५ लाख रुपये के करीब खर्च हुए जिसमे करीब २५ सोने की चैन, मेडल्स इत्यादि बटे. बहुत संभव था इससें ज्यादा भी खर्च हो सकता था अगर ममता दीदी ने पश्चिम बंगाल की गरीबी का रोना ना रोया होता कि हम तो बहुत गरीब प्रदेश है सिर्फ आशीर्वाद के आलावा हम क्या दे सकते है! ये समारोह कार्य दिवस के दिन हुआ महीने के अंत में जब सभी कार्यालयों में जरूरी काम काज निबटाएं जाते है लेकिन इडेन गार्डेन पहुचने की अफरा तफरी में एक तरह का अघोषित अवकाश सा हो गया और इस तरह गरीब प्रदेश थोडा और गरीब हो चला करोडो के नुकसान के साथ. वैसे भी बंद प्रिय ये प्रदेश दो लाख करोड़ के लगभग के कर्ज अदायगी के भंवर में फंसा हुआ है. वैसे कितनी जागरूक जनता है बंगाल कि एक फालतू टूर्नामेंट के जश्न समारोह में भारी संख्या में उमड़ पड़ी. ममता बनर्जी जिनके पास एक अच्छी सोच है का बयान तो और हास्यास्पद है कि केकेआर की जीत दुनिया की जीत के बराबर है.

ममता दीदी ने ये समझने की कोशिश जरा भी नहीं कि ऐसी दोयम दर्जे की जीत कोई मायने नहीं रखती. क्या महत्व है इस तरह के आयोजन का? इसको बंगाल के लोगो की जीत के रूप में किस तरह देखा जा रहा है जबकि कैप्टन से लेकर जैक कालिस या अन्य खिलाडी जैसे मनोज तिवारी वगैरह का बंगाल से कुछ लेना देना नहीं है. ये बहुत तकलीफदेह है कि बंगाल की विजय हजारे ट्राफी में जीत जो कि वाकई बंगाल की जीत कही जा सकती थी को बिल्कुल भी सम्मान के लायक नहीं समझा गया. इसी से समझ में आ जाता है कि ये देश विकास के नाम पे किस दिशा में चला जा रहा है. इस तरह के टूर्नामेंट जो क्रिकेट के गौरवमयी इतिहास में एक भद्दा दाग है जिसमे अय्याशी, बदतमीज़ी (शाहरुख़ खान का वानखेड़े मैदान में तमाशा याद करे) आदि तत्वों का समावेश है को हम किस तरह से सरकारी आयोजन का हिस्सा बना सकते है जिसमे गरीब जनता का पैसा पानी की तरह बहाया गया?

क्रिकेट से मुझे आपत्ति नहीं. ये भी एक खेल है मगर जब खेल एक खेल ना होकर महज तमाशा बन जाए तो हर खेल प्रेमी को तकलीफ होगी. ये समझने की कोशिश करे कि अगर एक गरीब आदमी को पैसो की जरुरत पड़े तो सरकारी मशीनरी तमाम तरह के पेंच लगा देंगी और यदि दे भी दिया भूल से तो इस तरह वसूलेंगी कि ना दे पाने की स्थिति में कर्जदार बेचारा आत्महत्या कर ले. इधर देखिये बॉलीवुड के सितारे जिनमे से ज्यादातर टैक्स चोर है और माफिया से सम्बन्ध रखने वाले है उन पर पैसा बहाने के लिए सरकार के पास कितना धन है गरीबी का रोना रोने के बावजूद.

हम वाकई महान देश में रहते है. मुझे अपने मित्र रवि हूडा जी की बात बहुत सटीक जान पड़ती है:” आईपीएल बस कुछ कंपनियों के उत्पाद बेचने के लिए नंग्नता और व्याभिचार का प्रदर्शन मात्र है. आज हर सुख सुविधा का साधन होने के बावजूद भी हम मानसिक रूप से अपंग हैं. वह ही देखते हैं और करते हैं जो लालची व्यवसायी चाहते हैं. किसी गरीब कन्या के विवाह के लिए या किसी अनाथ बालक के भरण पोषण के लिए हमारी जेब से १०० रूपये नहीं निकलते परन्तु आईपीएल या फार्मूला वन की प्रथम पंक्ति में बैठने के लिए हज़ारों रूपये व्यर्थ व्यय करते हैं ! अवश्य ही हमारी युवा पीढ़ी को भटकाने और भ्रमित करने का कोई गहरा षड्यंत्र है.”

ये है युवाओ के आदर्श बदतमीजी में लिप्त!

ये है युवाओ के आदर्श बदतमीजी में लिप्त!

References:

Kolkata Knight Riders’ IPL win celebration

Waste Of Money On Celebrations

India Today

Views Of Other Big Names

Fight At Wankhede 

Shahrukh  Supports Pakistani Team After 26/11

Shahrukh Invests In Football Club

Ravi Hooda

Pics Credit:

Pic One

Pic Two  

14 responses

  1. Rishi Shukla, Raipur (Chattisgarh) said:

    IPL याने इंडियन पियक्कड़ लीग ……….इंडियन पकाऊ लीग…

    Author’s Response:

    इंडियन पगलई लीग .

  2. Radhakrishna Rao, Bangalore, said:

    Why is indian capital not being used for right purpose..to develop science,engienering, healthcare, infrastructure?

    Author’s Response:

    That’s a part of big conspiracy..That’s a scheme to allow capitalists forces to rule on this nation in a different way..

  3. Author’s words for Praveen Trivediji, who liked this post:

    धन्यवाद प्रवीण त्रिवेदीजी ..आप बहुत भयंकर सीरिअस रीडर है ..उम्मीद है अब भी वैसे ही पढ़ रहे होंगे ये महसूस करने के लिए कि आपको और मुझे देने के लिए सरकार के पास कुछ नहीं पर इन बेकार के लोगो के पास जो काले धन से मालामाल है इनको देने के लिए गरीब सरकार के पास सब कुछ है .

  4. Thanks Sudhir Dwivedi, New Delhi; Abha Chawla Mohanty ; Dubeyji, Ranchi( Jharkhand); Arjun Jaiswal; Satishji, Nasik (Maharashtra) and Nitin Jain, Bastar (Chattisgarh) for liking the article..

  5. Anupam Vermaji, New Delhi, said:

    Absolutely correct…very well elaborated the matter….agreed with u !!!

    Author’s Response:

    Thanks for your encouraging remark..

  6. Amit Dubey, Engineer, Hyderabad (Andhra Pradesh):

    इस समाज ने ही बॉलीवुड को ऊँचा दर्जा दिया है .. मुझे रेडलाइट् एरिया और बॉलीवुड में कोई अंतर समझ में नहीं आता बल्कि मै रेडलाइट् को बॉलीवुड से अच्छा दर्जा दूंगा क्योकि वो इस समाज की भूख को मिटाते हैं और बॉलीवुड इस समाज को गन्दगी में धकेलता है कला के नाम पर….असभ्यता इनकी पहली सीढ़ी है… जितना ही उल्टा सीधा करते हैं उतना ही पैसा पाते हैं.

    Author’s response:

    आपकी बात से मै पूर्णतयः सहमत हू..गलत मूल्य को प्रचारित प्रसारित कर रहा है बालीवुड..ये हमारे ऊपर है कि हम किस तरह से अपने को इनसे बचा कर कुछ अच्छा कर जाते है..

  7. Dharmendra Sharmaji, UAE, said:

    “दुखद सत्य, देश बिके या मैया, इन्हें चाहिए बस रुपैया , रुपैया केवल रुपैया …..”

    Author’s Response:

    मुझे जो कहना था वो मैंने अपने लेख में कह दिया..ये गीत सुने ..बहुत कुछ ये गीत ही कह देता है..मेरे बचपन की यादो में शामिल है ये गीत भी..

  8. Thanks Anand G. Sharma, Mumbai; Akshay Singh, Howrah( West Bengal); Keerat Raghuwanshi, Pipariya (Bihar); Kartikay Bansal, Firozabad( Uttar Pradesh); Mahipal Chauhan, Vikasnagar; Mithilesh Mishraji, Indian Society of Journalists and Authors, New Delhi; Guru Mahagyaani; Nita Pandeyji, Chennai (Tamilnadu); Utkarsh Mishra,Bilaspur(Chattishgarh); Anirudh Pratap Singh Yadav, Bikaner (Rajasthan), Rekha Pandey, Mumbai; Gaurav Kabeer, New Delhi, Charan Singh, Karnal(Haryana), Raj Kaurji and Chandrapal S Bhasker, United Kingdom, for liking the post…

  9. Lalita Jha, New Delhi, said:

    एक सिर्फ कोलकाता का टैग होने से ममता दी ने पानी की तरह आम जनता का पैसा बहा दिया …

    Author’s response:

    ललिता जी आपने ने तो एक लाइन में दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया..चलिए इसी बात पे आप ये गीत सुनिए ..जब कोई बहुत बड़ा दुःख या अवसाद मनुष्य को घेरे तो गीत सुनना चाहिए..

    पता नहीं आप गीत सुनती है कि नहीं पर पानी पानी होकर ये आधुनिक जमाने का बड़ा सुकून देने वाला गीत याद आ रहा है..पानी दा रंग: (Vicky Donor 2012)

    http://www.dhingana.com/pani-da-rang-male-song-vicky-donor-hindi-latest-27af4b1

  10. Ravi Hoodaji, Canada, said:

    अत्यंत सटीक लेख है अरविन्द जी , पंक्तियाँ बिलकुल आपके हृदय का उदगार लगती हैं….

    Author’s response:

    ये सिर्फ इस कोशिश का नतीजा है कि जो भी लिखू वो मेरे अहसास की भूमि से परे ना हो…

    ************************************

    Thanks Kumar Vidrohiji, New Delhi, and Himanshu B. Pandey, Siwan (Bihar) for liking it….

  11. @Personal Concerns

    Many thanks for this delayed appreciation😛 ..Anyway, the best thing is that its evergreen..

  12. Anand Prakash, Nagpur( Maharashtra) said:

    Very aggressive stance… And very true!

    Author’s response:

    Thanks for your encouraging remark..The government has little or no money to offer to real creative souls, who in want of financial assistance are forced to live in penury. To have few hundred rupees, they have to adhere to so many rules and regulations but these spoiled stars, already having enough black money, have easy access to taxpayers’ money..

  13. Thanks Navin Jha; Shashikant R Pandey, Ahmedabad(Gujarat); Saket Vinayak, प्रबंध संपादक “इन्कलाब” हिंदी मासिक पत्रिका, Bhagalpur(Bihar) and Ashok Kumar Soni, Patna(Bihar) for appreciating the content..

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