हमे एक धुँध से आना है एक धुँध में जाना है!!!

साहिर: मेरे पसंदीदा गीतकार

साहिर: मेरे पसंदीदा गीतकार

साहिर मेरे पसंदीदा गीतकार रहे है क्योकि उनके गीतों में कोरा आदर्शवाद नहीं था  और ना ही उनमे भटकाव भरी रूमानियत  थी .  भजन भी उनके कलम से निकलता था तो ऐसा लगता था कि  जिंदगी को ही सच मानने वाले ने परम सत्ता से कैसे सम्बन्ध बना लिया ? कहने का मतलब उनके अनुभव का दायरा विशाल था और इस बात को समझना लगभग नामुमकिन है कि कैसे वे विपरीत छोरो पर विचरण कर लेते थे एक वक्त में ही.

अब ये गीत ही देखिये.  भारतीय दर्शन की एक जबरदस्त झलक दिखती है इस गीत में.  एक  प्रोग्रेसिव शायर की कलम से निकला है ये दार्शनिक गीत.  है ना ये अजूबा!!   ये गीत मुझे बहुत रूहानी सुकून देता है.  सच में ये जीवन एक साबुन का बुलबुला है कब ये फूट जाए कोई नहीं कह सकता.  कब हम अनंत की यात्रा में निकल जाए इस माया को छोड़कर जिससे हम चिपके रहते है कोई कह नहीं सकता.   इसी अनंत की रहस्यमय यात्रा की तरफ इशारा करता है साहिर का ये गीत.  ये तो सब जानते  है कि इसी अनंत की यात्रा की कहानी है हमारा भारतीय दर्शन. 

*******************************

संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है 
एक धुँध से आना है एक धुँध में जाना है

 
ये राह कहाँ से है ये राह कहाँ तक है 

ये राज़ कोई राही समझा है न जाना है

 
एक पल की पलक पर है ठहरी हुई ये दुनिया

 एक पल के झपकने तक हर खेल सुहाना है 

 
क्या जाने कोई किस पल किस मोड़ पर क्या बीते

 इस राह में ऐ राही हर मोड़ बहाना है
 
गीतकार: साहिर
 
संगीत: रवि 

चलचित्र: धुंध (1973)



आडिओ संस्करण: 

http://smashits.com/dhund/sansar-ki-har-shae/song-72665.html 

Pic credit: साहिर 

17 responses

  1. **********

    उन सबको विशेष धन्यवाद जिन्होंने बहुत गहराई में जाकर इस पोस्ट को पढ़ा.. कुछ उल्लेखनीय नाम है..

    अनुराग शर्माजी जी (USA) जिन्होंने पढ़ के अपनी सहमती जताई. सुधीर दिवेदीजी , प्रभु चैतन्यजी (Patna), इन्द्रजीत कौर (Jalandhar), सुरिंदर चौहानजी, हर्ष वर्माजी, सत्यनारायण मिश्राजी और साहिल कुमारजी( Ghaziabad)

    **********************
    A conversation with Dharmendra Sharmaji ( UAE) on Facebook:

    Incredible writing !!!!!!! love it

    My comment for Dharmendraji:

    धर्मेंद्रजी आपकी प्रसंशा के लिए आपको धन्यवाद.. जब अच्छे पाठको के विचार पोस्ट पे मिलते है तो उस ख़ुशी को मापना आसान नहीं होता.

    साहिर आज भी जिन्दा है क्योकिं दुखो ने उन्हें जब जिन्दा थे तभी मार दिया था जो दर्द बन के उनके शायरी-गीतों में बह निकली. वैसे भी मुर्दादिलो के बीच जिन्दा रहने से कोई फायदा नहीं.

    *******************

  2. A message for Nishant Mishraji ( New Delhi):

    सादगी सोच में या जिंदगी में इतनी आसान नहीं होती. ना आसान होती है सादी और गहरी सोच वालो का सम्मान करना. अब तो आप किस कालेज में पढ़े है, कहा नौकरी करते है, किस बाप के बेटे है, अमीर है या गरीब इस से किसी की सोच को हम महत्त्व देते है.

    खैर इसी सोच से जुडी एक कहानी है पता नहीं कितनी प्रमाणिक है.. साहब जब लोग आइस क्रीम खाकर डिब्बे फेंकने लगे तो ये एक समस्या बन गयी. विशेषज्ञ लोग मिले और विचार विमर्श हुआ पर हल ना निकला. तब किसी बहुत साधारण कर्मचारी ने ये सुझाव दिया क्यों ना कोन बनाया जाये ताकि खाके फेंकने का सवाल ही ना पैदा हो. और इस तरह कोन या साफ्टी वाली आइसक्रीम का जन्म हुआ.

    खैर इस संयोग पे निशांतजी गौर करे..जब हम पोस्ट करते है तब आप पोस्ट करते है ये तो ठीक है..पर आपने साबुन वाले डिब्बे की बात की और आज हमने साबुन के बुलबुले की बात की मतलब अपना जीवन एक साबुन के बुलबुले के समान है. ये बताये इस साबुनमय संयोग को क्या नाम दे :- )

  3. Thanks mazemangriot for liking it…

  4. Gyasu Shaikh mentioned some bhazans of Sahir On Shrota Biradari, Facebook:

    1. Aanaa hai to aa raha mein kuchh fer nahin hai, bhagwaan ke ghar der hai andher nahin hai- Rafi sahab; Naya Daur

    2. Prabhu tero naam jo dhyaae sukh paae tero naam.- Lata di ; Hum Dono –

    3. Sansaar se bhaage firte ho bhagwaan ko tum kyaa paao ge-Lata Di; Chitralekha

    4. Khudayaa bartar teri zamin par zamin ki khaatir ye jang kyun hai- Lata ; Taaj Mahal

    5. Tora man darpan kahlaye – Asha ; Kaajal

    My response to Gyasuji:

    इस बेहतरीन सूचना के लिए धन्यवाद . ये भजन साहिर साहब ने लिखे है इससें ये समझ में आता है कि उनकी रचनात्मकता कितनी व्यापक थी ..

  5. Dharmendra Sharma said:

    Kisi ne sach hi kaha hai ki, sabse khubsurat cheejen dard dard ke sath hi upajti hain.

    ******************

    My response to Dharmendraji:

    लेखको या कवियों का जीवन वृत्तांत पढेंगे तो आप पायेंगे कि उनका दर्द से गहरा याराना रहा है चाहे शेली हो या बायरन …

    “We look before and after,

    And pine for what is not:

    Our sincerest laughter

    With some pain is fraught;

    Our sweetest songs are those that tell of saddest, thought.”

    -Shelly in “To a Skylark”

    *****************

    Now listen this song from Patita echoing the same thoughts.. The song writer is Shailendra; Music : Shankar Jaikishan ; Singer: Talat Mahmood.

  6. Dharmendra Sharma:

    ‎Arvind K Pandey Ji, A beautiful painting can not be made, only by bright shades of colours. Black colour is most important ingredient of a most beautiful painting.

    *******************

    My response:

    One can acknowledge it mentally but I feel frequent encounters with blackness would only be depressive and disastrous..

    ***************
    Dharmendra Sharmaji said:

    You are right Arvind Ji, but it is also true that the night is darkest when the dawn is very near.

    ***************

    My response:

    Yes, that’s a very good spirit to defeat the negative forces..

  7. Dilip Kawathekarji says:

    You see, when there was no light, there was Tamas, Darkness at the start of Life on this earth. But when Light came, it started the duality, but reality.Light gave us positivity, good virtues, traits, and above all Devine Insight to know HIM, the GOD, ultimate power.

    ****************************

    ‎My response to Dilipji:

    A great way to understand the interplay of Light and Darkness.

    I need to add one more insight. Please help in understanding this complex issue.

    One Ravana ( the symbol of darkness) can be eliminated but tell me if there are Ravanas everywhere isn’t the task of Super Powerhouse Of Light ( Lord Rama) increases ??

    Though a ray of light is enough to kill the darkness of room , I still feel we need to check the growth of darkness even as it is imperative to explain the importance of light.

  8. Dilip Kawathekar said:

    Indeed. Lord Ram can be explained only when Ravan is there. But even lord ram needed Vanars to fight the Tamas. We all will have to rise, and start purification from More Greys to Less Greys, to finally merge in the Ultimate Light of Gyan.

    ******************

    My response to Dilipji:

    Dilip Kawathekarji

    You hit the nail on the head ..True Rama needed Vaanars (Monkeys) to overcome the Ravana… The sad irony of our times is that Vaanars are missing as all of them have turned into leaders🙂 …We need good followers also at grass root level. Only emergence of leaders won’t be productive.

    And yes thanks for liking the post and for this beautiful bhajan.

  9. Prabhu Chaitanyaji said:

    मुझे सभी कवि अच्छे लगते हैं
    साहिर, शकील, कैफ़ी, राजिंदर क्रिशन, अनजान, नीरज, इन्दीवर, प्रेम धवन,
    सब एक से बढ़ कर एक हैं
    मगर
    मुझे सर्वाधिक प्रिय हैं
    शैलेन्द्र
    इनके गीत मेरे दिल के सर्वाधिक करीब हैं.

    My response to him:

    आप की ही तरह मुझे भी ये बहुत पसंद है.. जिस्म से रूह तक का सफ़र मैंने इनके संग ही तय किया है..और शैलेन्द्र तो बेमिसाल है ही.

    लीजिये लता का मधुमती से ये गीत सुने शैलेन्द्र जी का लिखा हुआ …मै तो कब से खड़ी..

    http://smashits.com/madhumati/aaja-re-pardesi/song-35544.html

  10. Dilip Kawathekarji said:

    Very Very subtle thought Sir. Thanks.

    ****************************

    My response:

    Thanks to you also for making the conservation a replica of perfection..

  11. Prabhu Chaitanya said:

    Thanks
    अपनी पसंद के लभग बहुत सारे गाने
    youtube से d/load कर चुका हूँ
    फुर्सत के क्षणों में
    रसास्वादन करता रहता हूँ
    ” रसो वै सः ”
    परमात्मा रस रूप है |

    ************

    My view:

    ‎Prabhu Chaitanyaji

    रसो वै सः ”
    परमात्मा रस रूप है |

    …Ditto…

  12. Thanks Bablee Vasishtha, Rajesh Kumar Singhji, Purushottam Bidadaji, Vikram Roy, Ganeshkumara Tawaniyaji, and Mazemangriot for liking it..

  13. मुझे अपने पोस्ट ” एक धुंध से आना है एक धुंध में जाना है” पर एक बहुत सुंदर एक लाइन की टिप्पणी मिली लिंक्ड इन के हिंदी ब्लागिंग ग्रुप में जिसने मुझे सोचने में काफी मजबूर किया. राज जी जो नई दिल्ली में गणित और विज्ञान के वरिष्ठ अध्यापक है का ये कहना है कि ” अरविन्दजी , आना और जाना तो धुंध में है … पर इनके बीच में ही स्पष्ट क्या है …?

    —क्या पते की बात कही है. बिल्कुल मार्शल की बाउंसर है जो सर्र से सर के ऊपर से निकल गयी और पता ही ना चला…सही बात है इस जीवन के पहले धुंध और जीवन के बाद जो धुंध है इनके बीच जो जीवन में यथार्थ है उसमे ही क्या स्पष्ट है.. जिनको हम अपना मानते है वोही अपने नहीं निकलते..जिन पे भरोसा करते है वोही सबसे गद्दार होता है.. सही बात है ये यथार्थ भी एक धुंध है जिसमे बिल्कुल निश्चित सा कुछ भी नहीं ..एक अजीब सा मिश्रण है है भी और नहीं का !!! और राज जी की इस मनन करने योग्य टिप्पणी पर क्या कहू!

    आप लोग कुछ कहना चाहे तो जरूर कहें …

    *************************

  14. For the process of a humans brain to work in favor of something or against something or to love or hate something, there are starting requirements to take place–like;
    being born!
    having most of the necessities of the soft tissue working properly as nature needed for the success, for further genes!
    the new human’s place and conditions of earth life in order to have a chance to get life started!
    the no choices brought about by the stronger cultural influences that mind form the new human, from music to food tastes to the man gods implanted in the unsuspecting human brain!
    only when a new human can bring truth to earth at birth and not the silly older man humans that wrote the story of life and life after death, will any human story on earth mean anything or have any truth!
    No human that was culturally mind formed is capable of understanding these basic thoughts, that in the end will dissipate in a micro second like ninety nine percent of all human thoughts!
    Light or darkness doesn’t get switched on or off because of the thoughts of any human — living or who has lived–the humans that have reached a so called human consciousness become blatantly narcissistic the more the so – called human lives

    1. The very concept has been talked about in my post..That we move from one unknown world to another..

  15. No disrespect! but you missed my point again, but like you say “it only proves both our thoughts”

  16. vivek srivastava | Reply

    ausome……

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