अजब देश की गजब कहानी: सुअरों को छप्पन भोग और संतो को काली स्याही!!

swami ramdevji

एक तो इस देश में इस बात का रोना रोया जाता है कुछ अच्छा नहीं हो रहा है, या ये कि कुछ अच्छा होना चाहिए, या अच्छे लोग राजनीति में नहीं आ रहे है. साहब ये देश कुत्तो और सुअरों का हो गया है. इसीलिए हंसो की, गायो की या शेरो की कोई अहमियत नहीं रही गयी है.

एक बार सुअरों को प्रभु ने निमंत्रण दिया कि आओ स्वर्ग में रहो. सुअरों ने पूछा कि क्या वहा मैला खाने को मिलेगा? प्रभु ने कहा नहीं. तो सुअरों ने कहा तब तो धरती ही बेहतर है. कुछ ऐसा ही समय आजकल का है. अच्छो को हटा दो क्योकि वे आपके कुकर्म में बाधक है. गलत लोगो को राजगद्दी पर बिठा दो, उन्हें छप्पन भोग खिलाओ, उनका सम्मान करो. अच्छे लोगो को तिकडम करके हटा दो या सूली पे चढ़ा दो. अच्छे लोगो को उनकी अच्छाई का सिला ऐसा ही मिला है अनादि काल से. इसलिए कोई आश्चर्य नहीं कि अरविन्द केजरीवाल पर कोई हाथ चला दे या बाबा रामदेव पे कोई स्याही फ़ेंक दे. ये स्याही बाबा के चरित्र के नहीं आपके दूषित अंत:करण की निशानी है.

kejar

ये दौर राजनैतिक पतन के चरम को दर्शाता है. आरोपियों को सरकारें सरंक्षण देती है और जो गलत से लड़ रहे है उनके पीछे पूरी सरकारी मशीनरी पड़ जाती है. आपका पूरा इतिहास खंगाला जाएगा और एक मुद्दा खोजकर आपको जेल के सलाखों के पीछे भेज दिया जायगा. स्वतंत्रता की लड़ाई आसान थी क्योकि दुश्मन का चेहरा पहचानना आसान था. आज लड़ाई कठिन है क्योकि दुश्मन दोस्त के भेष में है या अपनों के बीच कोई अपना सा है. इसलिए ये दौर कठिन सा है. वैसे जब संतो का भी अपमान होने लगे तो समझिये बुराई अब ख़त्म ही है. मुझे तो सकारात्मक होने की लत है. आशा की किरण तो कृष्ण का यही वाक्य है कि बुराई को चाहे कितनी भी बड़ी ताकतों का समर्थन प्राप्त हो उसे अच्छाई पे सफलता तो मिलने से रही. जीतेगा तो सच ही. देर होने का मतलब तम के विजय के रूप में नहीं लेना चाहिए उसके समूचे विनाश के निशानी के रूप में लेना चाहिए.

अंत में एक आदर्श चुटकुला सुनिए. सलमान रुश्दी भारत आयेंगे. इससें मुसलमानों की भावनाए आहत होंगी. मतलब जहा है वही रहे तो कही के मुसलमानों की भावनाएं नहीं आहत होंगी.

krishna_scraps_3

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18 responses

  1. “लौ ऑफ डिमांड एंड सप्प्लाई”
    जिस स्थान पर गंदगी एकत्रित हो जाती है – वहाँ प्रकृति ने स्वच्छता पुनर्स्थापित करने के लिए शूकर (सूवर) नामक प्राणी को पैदा किया |
    जिस देश में के लोगों की चारित्रिक गंदगी एकत्रित हो जाती है – वहाँ के समाज में स्वयमेव शूकर (सूवर) सदृश्य मनुष्य पैदा हो जाते है |
    यदि इस देश के नागरिक अपने चरित्र का शुद्धिकरण करना आरंभ करेंगे तो गंदगी नहीं होगी और तब इन शूकर (सूवर) सदृश्य मनुष्यों को उदर-भरण के लिए अन्यत्र गमन करना पड़ेगा |
    इसी प्रकार ग्राम-सिंह (गाँव की गलियों का सिंह) अर्थात श्वान – याने कि कुत्ता – वह भी मनुष्यों के लिए उपयोगी प्राणी होता है |
    कुत्ता दो काम करता है – चौबीस घंटे की चौकीदारी और अद्वितीय स्वामिभक्ति |
    देखा गया है कि स्वामी के आगमन पर पत्नी से भी कई गुणा अधिक – कुत्ता प्रेम प्रदर्शन करता है |
    निःसंदेह इस देश के स्वामियों को भी कुत्तों की – उपरोक्त दोनों कार्यों – सम्पत्ति की रक्षा एवं चाटुकारी (इसे निश्छल प्रेम भी समझ सकते हैं) के लिए – आवश्कता रहती है |
    इस लिए विद्वान् जनों को सुवरों एवं कुत्तों से घृणा नहीं अपितु उन पर दया करनी चाहिए – उन्हें भी उदर-भरण का अधिकार है और वो तो तो प्राकृतिक अधिकार है !!!

    1. @Anand G.Sharma ji

      दया तो चलिए हमने दिखा दिया पर क्या मनुष्यों को इनके द्वारा संचालित नियमो पे चलना पड़ेगा !!!!

  2. Discussions that took place on this post:

    Arun Sethij said:

    अजब देश की गजब कहानी:- भारत सरकार को किरण बेदी के ८० हजार की चिंता है केजरीवाल के आठ लाख की चिंता है प्रशांत भूषण की जमींन की चिंता है लेकिन जो हजार करोडो जीम कर बैठे हैं उनकी नहीं उनको कभी किसी तो कभी किसी नाम पर बचाया जा रहा है दूसरी तरफ सरकार अपनी सारी एजेंसियों को झोंक लाखों खर्च करने के बाद भी जब अन्ना का रिकार्ड बेदाग़ पाया तो भगोड़ा घोषित कर दिया. सारे कुओं में भांग घुली है नरेन्द्र मोदी अच्छा काम कर रहे है. खबरदार, जो अब बोला तो क्यों? क्योंकि ये एक सांप्रदायिक बयान है.

    *****************

    Arvind K. Pandey said ( Myself):

    आपने वोही कडुवी हकीकत बयान कर दी जो सब महसूस कर रहे …इतनी जालिम तो अंग्रेजो की सरकार भी नहीं थी कि आपको गलत साबित करने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी आपके पीछे झोक दे…इतनी सक्रियता अगर उसने भ्रष्टाचार मिटाने में दिखाई होती तो कम से कम भारत स्वर्ग के समतुल्य खड़ा होता.

    लेकिन यहाँ उलटी गंगा बह रह है. खूंखार अपराधी या तो खुले आम घूम रहे है , जेल में लोगो को मार रहे है, या घोटाला करके जेलों में वी आई पी सुविधा भोग रहे है और जो इनके गलत के खिलाफ या सिस्टम के खिलाफ बोल रहे है उन पर स्याही फेंकर या डंडे बरसाकर या फर्जी मुक़दमे लाद उनको प्रताड़ित किया जा रहा है. इस पूरे तमाशे को हम क्या नाम दे !! नुकसान केवल प्रजा और देश का हो रहा है.

    **********

  3. Discussions with Reader on Forum Between The Lines( Facebook):

    A.h. Ansari said:

    कैसे कैसे लोग हो गए हैं इस देश में , कोई व्यक्ति कुछ अच्छा करना चाहता है उसे इस तरह की करतूतें कर के ये लोग क्या साबित करना चाहते हैं ?

    मै आपसे सहमत हूँ अरविन्द पांडे सर पर मुझे ये बतलाएं कि बाबा रामदेव जी ने देश के लिए क्या किया है जिस पर हम फक्र करे ? योग सिखाने से देश को क्या फायदा होगा ? और राम लीला मैदान में पुलिस से डर कर औरतों के वेश में भाग जाना ही क्या वीरों का काम है. अब वो देश में आयुर्वेदिक दवा बेच रहे है ये मुझे मत बतलाइयेगा. क्योकि इससें वो देश भक्त नहीं कहलायेंगे क्योंकि ऐसे ऐसे काम तो देश में जाने कितनी संस्थाएं और संघटन करते है.

    Arvind K. Pandey ( Author) said:

    मुझे आप बताये देश के लिए बाकी अल्पसंख्यक संस्थाएं क्या कर रही है कि उन्हें छूट हासिल है …या ये बताये देश के लिए कोई काम हुआ उसमे क्या क्या आता है ? क्या बाबा रामदेव इस देश के सांस्कृतिक दूत है कि नहीं ?

    ****************************

    A. H. Ansari Said:

    सवाल का जवाब सवाल नहीं होता है ? प्लीज़ मेरे सवाल का जवाब दीजिये ?

    Arvind K.Pandey Said:

    सवाल ही मेरा जवाब है . आप बताये क्या अल्पसंख्यको की जो पूरी जमात निठल्लो के तरह और उनके संघटन जो सिर्फ सरकार को चूस रहे है वोही देशवासी है और उनके कार्य ही देश के लिए कार्य है ? जब आपको बाबा रामदेव के कार्य देश के लिए कार्य नहीं प्रतीत होते तो आपसे क्या बात किया जाए ? औषधि ही बेच रहे है कम से कम देश का खाके देश के लिए ज़हर तो नहीं बेच रहे है अल्पसंख्यक संघटनो की तरह .

  4. Discussions on this post:

    Dharmendra Sharmaji said:

    दुखद परिस्थिति है..

    Arvind K.Pandey said:

    लेख के अंत में पढ़े जब संतो या अच्छे लोगो का अपमान होने लगे वो एक शुभ निशानी है … अब काली रात की सुबह होने वाली है …भगवान का थप्पड़ या तो पड़ता नहीं है या पड़ता है तो सब पूरी तरह ख़त्म हो जाता है.

    Geeta Ramesh Shivani said:

    चाँद पर थूकने से चाँद को कोई फर्क नहीं पड़ता. रामदेव बाबा पहले भी महान थे और अब भी है

    Arvind K. Pandey said:

    आपने जो कहा उससें बेहतर कुछ नहीं. रामदेव बाबा के कार्यो की थाह मापना आसान नहीं.

  5. Million thanks to Manish Sharma, Ganeshkumara Tawania, Rajesh Kumar Pandey, Suresh Mishra, Prabhu Chaitanya, Leopold Mominji, Ratan K Dhomeja,Akash Dusejaji , Gaurav Kabeerji, Pawan Kumar Jangirji , Reenaa Agrawaalji , Sandeep Jaisinganiji, Sonali Ahujaji, Vicky Raj Jagwaniji ,Ravesh Chawlaji and Suresh Kumar Rohraji who made their presence felt on this post…

  6. जहा तक सवाल है की बाबा रामदेव ने देश के लिए क्या किया है ? मैं ये कहूँगा देश ,देशवासियों से बनता है और जब से मैं जनता हु कि रामदेव के योग के द्वारा लाखो लोग बीमारी से दूर हुए है अगर किसी सज्जन को शक है तो मुझसे मिलकर दूर हो सकता है ,और हजारो लोगो को रोजगार भी दिया है जो बिना किसी सरकारी सहायता के , और एक ऐसा मुद्दा देश वासियो को दिया जिससे देश का विकास हो सके विदेशो के स्विस बैंक मे रखा काला धन अगर भारत वापस आ जाए तो इसको क्या कहेंगे ? लेकिन हम नपुंसक भारतवासी बाबा रामदेव पर टीका टिप्पणी करने से बाज़ नहीं आते ,अरे करना है तो उन सरकारी मुलाजिमों का विरोध करो जो ऐसे समाजसेवक को हटाना चाहता है ,जो सरकारी खज़ानो का दुरोपयोग तो करते ही है और इस देश को कंगाल भी बना देना चाहते है !

    1. सुनीलजी आपके मेरे पोस्ट पे आगमन के लिए धन्यवाद. इस बात के लिए भी धन्यवाद कि आपने अपने विचार रखे.. साहब जब खुली आँखों से चमकता हुआ ना दिखाई पड़े तो फिर उससें रौशनी की बात करना व्यर्थ है. अंसारी जी कहने लगे कि लाखो संस्थाएं काम कर रही है तो क्या वे देशभक्तों की श्रेणि में आतें है और काले धन को वापस लाने का उपक्रम भी कोई देशभक्ति का प्रमाण नहीं है. इसके बात उन्होंने मुझे उन्होंने बताया कि सानिया मिर्ज़ा और आमिर, शाहरुख़ ने देश के लिए कितना काम किया है और सिर्फ इनके कार्यो (सिर्फ अल्पसंख्यको के द्वारा किये काम ही ) ने ही देश की इज्ज़त बचा रखी है.

      अब इसके आगे मेरे कहने के लिए क्या रह गया🙂

      ये एक क्लोस्ड ग्रुप है ..लिंक आप को दे रहा हूँ..ये महान विचार अगर संभव हो तो इस ग्रुप के इस थ्रेड में पढ़े.

      http://www.facebook.com/groups/BTLINES/277946848927719/?notif_t=group_activity

      1. ye desh bhakti ka mamla hai sahab. un logon ko kya pataki desh bhakti kya hoti hai,jo desh ki roti khate hai aur jindabad pakistan ka lagate hai.

      2. @Pradeep

        Sahi baat jinki nishtha sandigdh ho unse koi kya apeksha rakhe!

  7. Ek Jawab Ansariji ke liye:

    चलिए शाहरुख जैसे सतही बालीवुड भांड और सानिया जैसी औसत दर्जे की टेनिस खिलाडी कम जो अपने पहनावे से ज्यादा, पाकिस्तानी क्रिकेटर से शादी और खेल से कम चर्चित रही है देश की असल सेवा कर रहे है और यही देशभक्त भी है. ये शाहरूख ही था जो पाकिस्तानी क्रिकेटरों की वकालत कर रहा था !! वैसे आप लोगो ने सानिया के ड्रेसिंग सेन्स पे बड़ा बवाल मचाया था. कम से कम अपने नज़रो में जो देशभक्त है उनको तो तानो से मुक्त रखे🙂

    सही बात है बाहरी आतंकवादियों को स्लीपर सेल उपलब्ध कराने वाले, बम धमाको में निर्दोषो को उड़ाने वाले असली देश सेवक है. योग सिखा एक स्वस्थ्य रोगमुक्त , मानसिक रूप से निर्मल बनाने वाला सबसे बड़ा निकम्मा और देशद्रोही है.

    हमने आपकी बात मान ली अंसारीजी.. आँखे खोलने के लिए धन्यवाद.

  8. अरविन्द जी अक्सर देखा है कि आप विरोध के स्वर को अपनी सल्तनत में बगावत समझते हैं ऊपर अंसारी साहब के साथ हुई आपकी बात चीत में माफ कीजियेगा पर मुझे वो तार्किकता नज़र नहीं आई जिस तरह आप अपनी बात सामान्य तौर पर रहते हैं…. उम्मीद है इसके जवाब में मुझे भी कुछ गालियाँ मिलेंगी…कोई गम नहीं पर मैं एक बात आप सबसे पूछना चाहूँगा कि भ्रष्टाचार के सबसे बड़े लाभान्वित कौन होते हैं, बाबु, नौकरशाह या नेता … नहीं… सबसे बड़े लाभान्वित होते हैं व्यापारिक घराने …तो ऐसे व्यापारिक घराने जो व्यापार के सबसे बड़े लाभुक हैं…उनका चंदा अगर कोई धर्म, योग या देशसेवा किसी के नाम पर लेलेता हो तो उसको मेरा मन देशभक्त मानने से विद्रोह करता है,,,,हाँ बाबा रामदेव जी ने बहुत से ऐसे काम किये हैं जिनको करने से कोई भी सम्मान का ही पात्र बनेगा परन्तु सिर्फ एक सवाल कि अगर वो काम साधन कि पवित्रता का ध्यान रखते हुए किये गए हैं तो क्यूँ बाबा के जवाब अन्ना कि तरह १००% विश्वसनीय नहीं होते?
    पिछले कुछ सालों में इस देश में काले धन के खिलाफ आवाज बाबा से पहले किसी ने नहीं उठाई … ये बात सच है पर उतना ही सच यह भी है कि बाबा ने हमको सबसे ज्यादा निराश भी किया है.. बाबा योग शिविर तो चला सकते हैं पर आंदोलन नहीं पर हाँ एक व्यक्ति के तौर पर किसी का अपमान करना निंदनीय है और बाबा के ऊपर स्याही फेकना या केजरीवाल पर चप्पल चलाना सिर्फ गलत नहीं नीचता भरा कार्य है

  9. Before birth, there are no stories or cultural heroes and villeins or of any animal parodies!
    Life after birth takes the same species animals and fragments the animals of a supposedly consciousness and lays out a mat of confusion !
    The mat of confusion gets larger and larger the longer the human lives with each stronger mind former quilting a new piece day after day until all the muttering from the mat by the time the human dies was just a thought of “what the hey was that all about ”
    Cultural life for the humans that think they were lucky enough to live long to be mind formed into the beliefs of that culture —in the end find it wasn’t luck at all !

    1. @JustMeAgain

      Just trying to shatter the various stereotypes !!!

  10. वैभव त्रिपाठीजी

    साहब आप हमेशा मुझे उसी मैट पे बिठाने की कोशिश करते है जिसका जिक्र मेरे बेहद प्रिय और अति प्राचीन अमेरिकन मित्र “JustMeAgain” करते है बार बार.. पर आप भूल जाते है कि जिस की संगत में आप जैसे धुरंधर तर्क सरंचना करने वाले शातिर दिमाग है इतना आसान नहीं है उसे मैट पे बिठाना.. चलिए हम आप को बताते है क्या वजह है कि अंसारीजी के प्रति आपको मेरा तर्क अपरिपूर्ण क्यों लग रहा है.. वो इसलिए कि मैंने आपको उनका सभ्य सम्पादित अंश पढवाया है वरना उनका कूड़ा करकट आप पढ़ लेते तो आप ही क्या और कोई भी मेरे सहनशीलता और सहजता की प्रसंशा करता. ये अन्सारीजी का संवाद केवल इसलिए डाला है क्योकि इस औपचारिकता को पूरा करना था कि हां साहब इन्होने भी कुछ कहा है.. वैसे जिस जगह इन्होने कूड़ा कचरा पोस्ट किया है वहा पे भयंकर बहस छिड़ी है ..मै तो ऐसे तर्कों की महफ़िल से उठ आया लेकिन अब जा के देख रहा हू बड़े अच्छे लोग आकर अंसारी जी को उन्ही की भाषा में तर्क दे रहे है….ये संभव नहीं था वरना आपको पूरा संवाद पढवाता उस थ्रेड का.

    दूसरी बात वैभवजी आप भी जानते है कि अगर विचारो की स्वतंत्रता मिली है वर्चुअल जगत में तो इसका मतलब ये नहीं है कि आप कुछ भी मत्थे मढ़ दे. कम से कम मुझसे मत उम्मीद रखियेगा कि आप बकवास करेंगे तो मै सभ्य तरीके से उसको लूँगा..ये अलग बात है हमेश आज तक सभ्य तरीके से लिया है इतने वाहियात तर्कों के बीच खड़े होकर भी.. आप हर बार मुझमे आक्रामकता देखते है तो कम से कम हर बार वो घटिया तर्कों का चक्रव्यूह भी देख लिया करिए जो मुझमे आक्रमकता उभारती है !!! क्या आप नहीं जानते कि मेरी आक्रमकता कभी सतही कारणों से नहीं रही है अगर कभी उभरी है तो ?

    वैसे आपकी इस बात से मै सहमत हूँ कि बाबा शिविर चला सकते है आन्दोलन नहीं.. क्योकि आज आन्दोलन की राजनीति इतनी गन्दी है कि शायद वो उस स्तर तक गिर नहीं पा रहे है !! अभी बाबा को और उलटी चाले चलने में महारत हासिल करनी है.. सत्त्व को तम को पछाड़ने के लिए थोडा सा तम का सहारा लेना पड़ेगा बाबा ये कर नहीं पा रहे है पूरी तरह से !!!

  11. Ravi Hooda, Realtor at Homelife United Realty Inc. , Canada, said :

    आज के कलयुग का यह कटु सत्य है मित्र ! हर कोई चाहता है की कोई भगत सिंह या चंद्रशेखर आज़ाद उनके अधिकारों के लिए अपनी बलि दे परन्तु हो वह पड़ोसी के घर से , हमें कोई त्याग न करना पड़े ! और कोई अगर कुछ स्वयं से ऊपर उठ कर समाज के लिए करे तो उसे सहारा या समर्थन देना तो दूर उसके पावँ खींच लो या उसे ही गलत घोषित कर दो ! क्योंकि उसके प्रयास उन मूक दर्शकों की नपुंसकता को सभी पर प्रकाशित करते हैं ! बाबा रामदेव जैसे विरले देशभक्त तो कभी कभी ही जन्म लेते हैं….आज के इस दूषित सामाजिक परिपेक्ष्य में कौन सा ऐसा धार्मिक समुदाय या उनका नायक है जो धर्म , जाति और समुदाय से ऊपर उठ कर देश के उत्थान की बात करता है ! भ्रष्टाचारी , देशद्रोही राजनीतिज्ञों से लोहा लेने का साहस करता है और वोह भी उन विषम परिस्थितियों में जब सारा सरकारी तंत्र उन्हे गिराने के कुल्सित षड़यंत्र में लगा हुआ है ! नमन है ऐसे भारत माता के सपूतों को !

    My Response To Raviji:

    ये बिल्कुल सही बात है कि इस विषम परिस्थितियों में अगर किसी ने सर ओखली में डाला है तो वो निश्चित ही पूजनीय है. कौन इस भ्रष्ट सरकार से पंगा लेना चाहेगा ? पर रामदेव ने किया. आप सब बाते करते है पर उन्होंने कम से कम अपने को सरकार के सामने जुझारू मुद्रा में पेश तो किया. इनको बार बार नमन.

    ये सेकुलर जमात को ले लीजिये ..सिर्फ बौद्धिक बकैती कर सकता है , सरकार के साथ बिना शर्त मलाई काट सकता है पर सरकार को असल चुनौती देने के वक्त भीगी बिल्ली बन जाता है. कम से कम एक हिन्दू संत ने राह तो दिखाई. सरकार की नाक तो दबा दी.

  12. Ravi Hoodaji further said:

    अरविन्द भाई ….बहुत उत्तम लेख है ! आपके हृदय के उदगार से प्रेरित है.. आप स्वतंत्र रूप से मेरी टिप्णी का सदुपयोग करें…अगर मेरी लेखनी भी किसी प्रकार आपके देश हित हेतु प्रयासों के काम आ सके तो में इसे अपना सौभाग्य समझूंगा !

    My response to Raviji:

    इस प्रसंशा के लिए धन्यवाद ..बल मिलता है इन शब्दों से सही सोचने, करने और लिखने के लिए..

  13. Thanks to Navneet Gillji, Manish Nairji, Surinder Bairagi Kumarji and Rajeev Kadyanji for reading the post..

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