जगजीत सिंह: तुम चले गए तो गुमसुम सा ये जहाँ है !!!

जीवन क्या है ? चलता फिरता एक खिलौना है..

जीवन क्या है ? चलता फिरता एक खिलौना है..

“अब  यादों  के  कांटे  इस  दिल  में  चुभते  हैं  
ना  दर्द  ठहरता  है  ना  आँसूं   रुकते  हैं” .

इस वक्त जगजीत सिंह के सुननेवालो और चाहनेवालो का यही हाल होगा. सबको अपने गीतों, ग़ज़लों और भजनों से एक रूहानी शान्ति प्रदान करने वाले की आत्मा आज खुद इंसानी चोला छोड़कर परम शान्ति में विलीन हो गयी. इस सत्य से हम सब परिचित है कि एक दिन हम सबको जाना है पर सब के दिलो पे राज करने वाले का यूँ चले जाना तकलीफ देता है. कोई  जड़ भरत की तरह इतना निर्लिप्त तो नहीं रह सकता ना कि कोई अपना चला जाए और आप की आँख से दो आंसू भी ना गिरे. गुलज़ार जी कहना बिल्कुल सही है कि “जगजीत का जाना, एक पूरी दुनिया का उठ जाना है इक पूरे दौर का उठ जाना है .” उनके चले जाने के बाद जिस रिक्तता का अनुभव हम सब को हो रहा है उसकी पूर्ती करना आसान नहीं. 

जगजीत सिंह ने जब गायकी की दुनिया में प्रवेश किया तो उनको भी उन्ही मुसीबतों का सामना करना पड़ा जो हर एक सच्चे कला के पुजारी के सामने आ खड़ी होती है.  नाकामी और असफलताओ से खिन्न आकर वे अपने घर जालंधर को लौट आये मुंबई से जहा पे वे उस वक्त पढ़ते थे और एक प्रोफेशनल  गायक के तौर पे रेडिओ से जुड़े भी थे. पर किस्मत ने इनके लिए कुछ और ही सोच रखा था. कुछ अंतराल के बाद ये फिर मुंबई लौटे और  एच एम वी के साथ कुछ एक दो गाने रिकार्ड कराने के बाद इसी कंपनी द्वारा इनका पहला एल पी  “द अनफ़ोरगैटेबल्स ” ( The Unforgettables) निकला. इसके बाद जगजीत ने पीछे मुड़ के नहीं देखा और मौत के पहले तक इतना काम किया कि गुलज़ार ने अपनी श्रद्धांजली में इस बात को महसूस किया कि शायद जगजीत सिंह ने अपने शरीर को आराम नहीं दिया.

जगजीत सिंह ने भोजपुरी, उर्दू,  पंजाबी आदि भाषाओ में खूब गया. एक समाचार पत्र  के हवाले से मुझे पता चला कि इलाहाबाद से उनका लगाव बहुत गहरा था क्योकि यही से उन्होंने भारतीय संगीत संस्थान प्रयाग संगीत समिति से गायन में प्रभाकर की डिग्री प्राप्त की थी. अभी मौत से कुछ महीनों पहले ही इलाहाबाद में एक कार्यक्रम करके गए थे. ये अपने में एक विलक्षण बात थी कि जिस ऊंचाई को उन्होंने पहले एल्बम से हासिल किया वे अंत तक बरक़रार रही. कला के दुनिया में ये एक विलक्षण घटना है .क्योकि सत्तर के दशक से अब तक के संगीत में ना जाने कितने बदलाव हुए और लोगो के पसंद और नापसंद करने का तरीका भी बहुत बदला. मगर इन सब के बीच अविचलित से जगजीत सिंह एक के बाद एक ह्रदय को झकझोर कर रख देने वाले एल्बम निकालते चले गए. ये कहना गलत नहीं होंगा कि चित्राजी का उनके जीवन में जीवन संगिनी के रूप में आना उनके संगीत यात्रा को एक नयी ऊंचाई दे गया. इन दोनों के संयुक्त रूप से जारी एल्बम श्रोताओ के बीच खासे लोकप्रिय हुए.
 
ऐ साउंड अफैअर (A Sound Affair),  पैशन्स (Passions) बियोंड टाइम (Beyond Time) , होप (Hope)  , इन सर्च (In Search) , इनसाईट (Insight) , फेस टू  फेस (Face To Face) , मरासिम (Marasim ) , मिराज (Mirage) , विशंस (Visions) , लव इस ब्लाइंड ( Love Is Blind) , सजदा (Sajda) , सहर ( Saher)   और चिराग (Chirag)  ऐसे कई हिट एल्बम जगजीत सिंह के आये जिनमे चित्राजी और जगजीत सिंह की गायी  ग़ज़लों ने लोगो का मनमोह लिया. जगजीत सिंह की  लम्बी पारी खेलने की वजह ये रही कि जो संगीत यात्रा उन्होंने बेगम अख्तर , मेहँदी हसन और ग़ुलाम अली के दौर से शुरू की उसको हमेशा वो साधना से मांजते रहे. उन्होंने ग़ज़ल को बोझिल परंपराओ से, उसके अपने सीमित दायरों से बाहर निकालकर साधारण जन में लोकप्रिय बनाया. सुनने में आसान लगता है पर वास्तव में ये एक बहुत कठिन कार्य था.  खासकर उस पीढ़ी में जो ग़ज़ल सुनने या सुनाने  के नाम पे नाक भौ सिकोड़ने लगती है. आप ये समझिये कि जगजीत साहब ने बिल्कुल नए पैमाने और तौर तरीको को जन्म दिया जिसमे ग़ज़ल गायिकी सतही मैखानो और जाम से मुक्त हुई.  उन्होंने अपनी लगन से आधुनिक वाद्य यन्त्र और प्राचीन वाद्य यन्त्र दोनों का बेहतरीन संगम करके यादगार धुनें दी जिन्होंने ग़ज़ल को लोकप्रिय तत्त्व प्रदान किया. जगजीत सिंह के बारे में ये कहा जाता है कि इन्हें मधुर धुनें तैयार करने  में कोई ख़ास दिक्कत नहीं आती थी.  इसके पीछे वजह यही थी इनको संगीत की समझ गहरी थी और इस गहरी समझ के बाद भी ये रियाज में कंजूसी नहीं करते थे. लिहाज़ा जो भी काम इन्होने किया वो अपनी एक अलग छाप छोडता चला गया. 
 
अब देखिये कि उनकी इस लम्बी पारी के इस अवधि में कितने अच्छे  ग़ज़ल  गाने वाले आये मगर वो बदलते दौर में अपने को ढाल नहीं पाए और कुछ एक दो एल्बम को देकर वो गुमनामी में खो गए पर जगजीत सिंह के साथ ऐसा नहीं हुआ. क्योकि वे हद से अधिक सचेत थें. उन्होंने श्रोताओ के मूड को हमेशा ध्यान में  रखा पर साथ में ये भी ध्यान रखा कि वे इतना परिवर्तनशील ना हो जाए कि गुणवत्ता कही खो जाए. जगजीत सिंह के सफल होने का  राज ये भी था कि वे एक सच्चे कलाकार की तरह बेहद संवेदनशील थे लिहाजा उन्होंने बहुत ही बेहतर शायरी का चाहे वो किसी गुमनाम शायर की हो या किसी मशहूर बन्दे के कलम से निकली हो का इस्तेमाल किया. निदा फ़ाज़ली , सुदर्शन फाकिर, गुलज़ार , ग़ालिब , फिराक गोरखपुरी जैसे शायरों की सुंदर ग़ज़लों को बेहतरीन धुनों में सजाकर जो लड़ी उन्होंने बनायीं वो हर भावुक इंसान के दिलो दिमाग पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ गया. जगजीत सिंह ग़ज़लों के चुनाव में  कितना सजग रहते थे सुनिए उनके ही शब्दों में  जो  बी बी सी को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा : ” सबसे पहले तो देखता हूँ की ग़ज़ल की भाषा सरल हो और जो शायर कहना चाहता है कहने में सफल हुआ हो. ग़ज़ल प्रेम पर हो या फिर उनमे कोई चौंकाने वाला तत्व हो, ज़िंदगी के क़रीब हो, उस में अश्लीलता नहीं होनी चाहिए. मुख्यतः मैं इन्हीं बातों का ध्यान रखता हूँ.”
 
जगजीत सिंह के बारे में शुरू शुरू में लोग कहते थें कि फिल्मो में आवाज उनकी  नहीं सूट करती. इस भ्रम को उन्होंने अर्थ, साथ साथ, प्रेमगीत और बाद के सालो में दुश्मन,  तुम बिन, जॉगर्स पार्क और सरफ़रोश में एक से बढ़कर एक ग़ज़ले गाकर तोडा. अगर हम छोटे परदे की बात करे तो दूरदर्शन के लिए “मिर्ज़ा ग़ालिब” और नीम का पेड़ धारावाहिक के लिए उनका योगदान उनके संगीत सफ़र में खासा महत्त्व रखता है.  उल्लेखनीय बात ये है कि जिस तरह डूब के वे ग़ज़ले गाते थे उसी तरह से वे भजन भी गाते थे..अक्सर ये होता है कि ग़जल गानेवाले भजन गायिकी में इतने उभर के नहीं आ पाते पर जगजीत सिंह ने ये भी कर दिखाया  एक से बढ़कर एक आत्मिक शांति  देने वाले भजन संग्रह  निकल के. कृष्ण भज़नो पे आधारित इनकी भजन श्रंखला काफी लोकप्रिय हुई जैसे मोक्ष,  जय  राधा  माधव ,  सांवरा समर्पण ,  हरे  कृष्ण  हरे  राम ,  हरे  कृष्ण , राधा  बल्लभ  कुञ्ज  बिहारी .  इसके आलावा ध्यान योग पे आधारित एल्बम और माँ के भजनों का एक संग्रह “माँ  ” जो अरबिंदो सोसाइटी से सम्बद्ध है  भी काफी प्रसिद्ध हुआ..
अंखिया  हरी दर्शन की प्यासी !!

अंखिया हरी दर्शन की प्यासी !!

जगजीत सिंह काफी सचेत रहते थे और इसलिए वे काफी बेबाक भी थे. उन्होंने एक विदेशी चैनल को दिए साक्षात्कार में इस बात को साफ़ साफ़ कहा कि ग़ज़ल गायिकी का स्तर भारत और अन्य जगह काफी गिर रहा है और जिस तरह से हर माध्यम से घटिया चीज़ संगीत के नाम पे बांटी जा रही है उससें समझ में आता है कि कुछ ना कुछ गलत तो है ज़रूर. वे आजकल के संगीत को शोर मानते थे. यही वजह है कि ऐ आर रहमान के यांत्रिक संगीत की उन्होंने साफ़ तौर पे आलोचना की. और ये सच भी है कि आइटम नंबर के दौर में कम्पूटर आधारित संगीत बिल्कुल  टीन कनस्तर पीटने के समान हो गया है. संगीत की आत्मा लगता है इस लोक से निकलकर दूसरे लोक में चली गयी है..

चलते चलते अपने अंतर्मन में दबी  गहरी संवेदनाओ  को उभारना चाहूँगा जिसको निखारने में जगजीत सिंह की गज़लों ने उत्प्रेरक का काम किया. जगजीत सिंह की गज़ले सम्पूर्ण जीवन दर्शन को अच्छी  तरह से परिभाषित करती है. बचपन से शुरू करे तो क्या आपको लगता है ” वो कागज़ की कश्ती” से भी बेहतर कोई संगीतमय रचना हो सकती है जो बचपन को इतना यादगार बनाती हो ? ये रचना देखी जाये तो अलग से मील का पत्थर है. यौवन काल की तरफ बढे तो उस दौर को याद करे जब हम प्रेम के पहले अहसास को महसूस करते है और उसे प्रेम पत्र के रूप में उभारते है तो क्या हमको ये ग़ज़ल नहीं याद आती “प्रेम का पहला ख़त लिखने में वक्त तो लगता है ”  या ये बात नहीं याद आती ” तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है ” . दोस्ती के ही बदले हुए स्वरूप को हम याद करे तो क्या इस ग़ज़ल में जो सीख है  उसकी हम उपेक्षा कर सकते है “दोस्ती जब किसी से की जाये, दुश्मनों की भी राय  ली जाये” ..और जब ये दोस्ती टूट जाए तो क्या हम ये ग़ज़ल नहीं गुनगुनाते : “ तुमने दिल की बात कह दी ये बड़ा अच्छा किया, हम तुम्हे अपना समझते थे बड़ा धोखा  हुआ“. 

जीवन  में जब हम और आगे बढ़ते है और जीवन की कडुवी सच्चाइयो से आमना सामना होने पर हमारे सपने टूट कर बिखरते है तो क्या हम ये नहीं महसूस करते ”  दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है ” और फिर यही एहसास हमारे साथ रह जाता है ” शायद मै ज़िन्दगी की सहर लेके आ गया…अंजाम  ये  के  गर्दे  सफ़र  ले  के  आ  गया“.  इन आत्माओ के संपर्क में रहने से ही शायद मै आज कह पाने में  सक्षम हूँ  “बदला ना अपने आपको जो थे वोही रहे” 

इस बहुत भली सी आत्मा को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि ..आपके लिए जगजीतजी इस वक्त मेरे मन में कुछ और नहीं बस आपकी यही ग़ज़ल कबसे गूँज रही है : “ सदमा तो है मुझे भी कि तुझसे जुदा हूँ  मै” 

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इसमें मैंने बहुत सी ग़ज़लों का जिक्र किया है. ये सब तो मेरे दिल के करीब है पर ये रहे कुछ और ग़ज़ल /भजन जो मुझे बहुत पसंद है. 

. या तो मिट जाइए या मिटा दीजिये 

. तेरे आने की जब खबर महके 

.उस मोड शुरू करे फिर ये ज़िन्दगी 

. आदमी आदमी को क्या देगा 

 
 
 
 
 
Pics Credit:

Pic One

Pic Two 

10 responses

  1. हालांकि मैंने जगजीत सिंह को ज्यादा नहीं सुना, परन्तु अब आपने इतनी जानकारी दी तो लगता है की गलती की ……… सुनना चाहिए था…….
    शुक्रिया

    1. @Munishji

      पहले तो इस बात के लिए धन्यवाद कि आपने पोस्ट पे आके कमेन्ट किया है🙂 लोग फेसबुक पे ही सब कुछ कह देते है.. वैसे आपको अपने जीवन को और सुरीला बनाने के लिए जगजीत सिंह को सुनना चाहिए..शुरुआत आप मेरे ही पोस्ट में दी गयी हुई ग़ज़लों से कर सकते है जो बहुत अर्थपूर्ण और सुरीली है..

  2. Many thanks to all the conscious readers who really appreciated this article from core of their hearts.. I am presenting some of their views here on the original post..

    ************
    Arun Sethi from Khandwa, Madhya Pradesh said on Facebook:

    अरविंद भाई आप ना सिर्फ गहरी जानकारी रखते हैं गहराई भी धन्यवाद जय हो इलाहबाद युनिवर्सिटी. ऐ.आर. रहमान के साथ ही जगजीतसिंहजी ने गुलज़ार साहब को भी ऐसी रचनाएँ देने और इस तरह के संगीत को सराहने के लिये लताड़ा था.

    जिसके हम फेन हों उसके बारे में हर शब्द पढ़ना अच्छा लगता है शुकुन देता है . I have copied & pasted the text for my E- Library. Thanks.

    MY RESPONSE TO ARUN SETHI:

    पसंद करने के लिए धन्यवाद..आप श्रोता बंधुओ के लिए ही मैंने ये शोधपरक लेख लिखा है मेहनत से..उम्मीद करता हू आपने ध्यानपूर्वक पढ़ा होगा..

    इसमें मैंने उनके बेहतरीन ग़ज़लों और भजनों के आलावा साक्षात्कार वगैरह महत्त्वपूर्ण प्रकाशनों से निकालकर उन्हें अपने लेख में प्रस्तुत किया है..उम्मीद है आपने देखा होगा..

    आपने भी कम अच्छी जानकारी नहीं दी ..लगता है खंडवा की मिटटी ने असर दिखा दिया है🙂 ..वैसे अच्छे पढने वाले और मधुर रसिक होते है तभी उत्तम सृजन होता है..

    P.S. Khandwa is the birthplace of our great singer Kishore Kumar🙂

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  3. My childhood classmate Zainul said on Facebook:

    im a great fan of this singer.. grew up listening to him.. what a loss

    *****************

    My reply :

    Thanks Zainul …हम एक गुस्ताखी करना चाहते है और वो ये है कि आप जैसे संगीत रसिको के कमेंट्स को अपने लेख में एक जगह रखना चाहते है अपनी तरफ से ..उम्मीद है कि आप इस पर आपत्ति नहीं दर्ज कराएँगे…

    ************

  4. Thanks to all my readers including ‎Sajeev Sarathie who is the brain behind a beautiful online publication related with music world titled “Awaaj”.. I wish to say him:

    धन्यवाद संजीवजी ..आपके लेख मै ध्यान से पढता हूँ जो आवाज़ श्रंखला के तहत प्रकाशित होते और शेयर भी करता हू समय समय पर….वैसे इस लेख को पसंद करने के लिए धन्यवाद..

    ******************

    I also need to mention the names of Rajesh Kumar, Advocate at Delhi High Court , Yugal Mehra, Nitesh Kumar, Kumar Vidrohi and others who came to appreciate the article.

    ***************************

  5. The readers can have a look at the tribute in English:

    https://indowaves.wordpress.com/2011/10/11/jagjit-singh-the-musical-peacemaker-merges-in-eternal-peace/

    ****************

    Thanks To “Personal Concerns” -owner of beautiful blog on WordPress- for liking the post..

    **************

    I forgot to mention about Sudhir Dwivedi ..Thanks to him as well..

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  6. Some more comments:

    Nanny Grover On Facebook’s Kavita Basant Group…

    bahut mushkil se sambhle the aapne phie se rula diya…behtreen gazal

    ******************

    My Response To Nanny Grover:

    धन्यवाद नैनी ग्रोवरजी …ये वाकई दिल में बहुत अन्दर तक उतर जाने वाली ग़ज़ले है..सो कोई आश्चर्य नहीं कि आंसू निकल पड़े..और किसी भली सी आत्मा के लिए दो बूँद आंसू के गिर पड़े तो ये आंसुओ के लिए सौभाग्य की बात है..

    *****************

    Srikant Nagapurkar said:

    bahut sahi kaha aapne sir…

    *****************

    My response to Srikantji ( Former Air force officer )

    धन्यवाद श्रीकांतजी आपकी तारीफ के शब्द मेरे लिए ख़ास महत्त्व रखते है ..आप जिस लगन से हर सुबह एक नयी सी बात के साथ हाज़िर हो जाते है वो प्रशंसनीय है..

    *****************

    Thanks To Nitesh Kumar for liking the post….

  7. Some comments that I received at Shrota Biradari, a popular forum of informed listeners on Facebook:

    *************************

    My response to ‎Pavan Jhaji ( the film critic who has contributed for BBC and other forums) who came to appreciate the article at Shrota Biradari:

    आप ने पसंद किया धन्यवाद ..इस लेख के लिए शोध करते वक्त मै आपकी गुलज़ार से जुडी वेबसाइट पे गया था क्योकि गुलज़ार ने जो वक्तव्य दिया था कुछ एक समाचार पत्र में उसको वेरीफाय करना मैंने जरुरी समझा ..देखा तो आपकी वेबसाइट पे था ऑडियो फॉर्म में ..इसका लिंक मैंने अपने लेख में दिया है..मुझे याद आता है कि एक आलेख भी आपका जगजीत सिंह पर मैंने पढ़ा इसी शोध के दौरान ..सो इसलिए आप को विशेष धन्यवाद…

    इस लेख पर मैंने खासी मेहनत की दुर्लभ लिनक्स ढून्ढ कर उन्हें लेख में लगाने के लिए ..ये देखकर हर्ष हो रहा है कि आप जैसे गुणी पाठको /लेखको ने इसे पसंद किया…

    ****************************

    Sanjay Verma said:

    Very Nice…

    My response to Sanjayji ..

    संजयजी आपको धन्यवाद की आपने इसे पढ़ा…आप मेहनत से लिखिए और उस पर अगर अच्छे पाठको के एक दो शब्द भी कमेन्ट के रूप में उभर आते है तो लगता है यज्ञ सफल रहा …

    *********************

    Thanks To Manjot Bhullarji and Suneel R Karmeleji for liking the post at Shrota Biradari.

    *******************

  8. I am happy that the tribute struck a chord with so many people..

    Thanks Subhash Jung Thapaji, Ravindra Kumarji, Raju Raju Awra Awraji, Sd Shardaji, Manmohan Taneja ‘Ashq’ji (SENIOR DRUGS CONTROL OFFICER,ROHTAK ZONE), Akhilesh Ojhaji, Vivek Mishraji and Mithilesh Dwivediji for liking the post..

  9. Some more thought provoking exchange of conversation on this post at Shrota Biradari, Facebook :

    Arun Sethi said :

    अरविन्द भाई जैसा मुझे याद आ रहा है पर इन दिनों कहीं पढ़ने को नहीं मिला जगजीतजी सिंग के दक्षिण आफ्रिका में प्रोग्राम देने के कारण भारत सरकार ने उन्हें कुछ समय के लिये बेन कर दिया था जिसके बाद की उनकी प्रस्तुति थी मिर्ज़ा ग़ालिब.

    http://www.bhaskar.com/article/MAG-RAS-article-on-rajkumar-keswani-2507348.html.

    My response to Arun Sethiji:

    Arun Sethiji

    सरकारी दिमाग सरकारी तरह से सोचते है..ये कुछ ऐसा ही मामला लग रहा है जब किशोर कुमार के गाने रेडिओ पर प्रतिबंधित कर दिए गए थें क्योकि उन्होंने इमरजेंसी अवधि में संजय गाँधी के कहने पर किसी जलसे में गाने से मना कर दिया था..सो उनके गाने रेडियो पर बैन हो गए थें..

    जिस लेख का आपने लिंक दिया है उसमे जानकारी काफी रोचक है जो यही दर्शाता है कि किसी कलाकार के शुरूआती दिन ज्यादातर कटु अनुभवों से भरे होते है..

    ******************

    Pavan Jha addressing Arun Sethi said:

    बैन का ज़िक्र मैनें अपने आलेख में किया था.. शब्द सीमा की वजह से बहुत कुछ और भी हटाना पड़ा!

    http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2011/10/111011_jagjitsingh_musicreview_ar.shtml

    My comment for Pavan Jha:

    मैंने कहा था कि अपने लेख को लिखते वक्त आपका मैंने एक लेख और भी देखा था…

    वो यही है शायद क्योकि बाद की फिल्मो का जिक्र करते वक्त आप ” सरफ़रोश” और “तरकीब” वगैरह का जिक्र भूल गए है आपके बाद की फिल्मो के लिस्ट पढ़ते वक्त ख्याल आ रहा था🙂

    *******************************

    Pavan Jha Said:

    posted the unedited version as a document now : Jajgit Singh – A Tribute

    http://www.facebook.com/groups/114425345321176/doc/153006648129712/

    ******************

    Arun Sethi said:

    अनछुए पहलूओं की जानकारी के लिये शुक्रिया, पवनजी सच कहा “आपके बाद हर घड़ी हमने, आपके साथ ही गुज़ारी है”

    “उनके जाने के बाद भी इक चीज़ जो कायम है वो है सैकड़ों गीतों में सहेजी हुई उनकी आवाज़, जो सुनने वालो के दिलों मे पलती रहेगी, चलती रहेगी. एक ऐसी आवाज़ जिसकी शोखी ने रोमांटिक गीतों को नये रंग दिये वहीं जिसकी गम्भीरता ने दर्द की अनुभूति जीवंत कर दी. एक ऐसी आवाज़ जिसने आज के दौर की नक़ली सूफ़ियाना गायकी से दूर रहते हुए सुनने वालों को संगीत की गहराई और दर्शन से अभीभूत किया और उनके अन्तर्मन तक पहुंचने में कामयाब रही. उनके नग़्मों और ग़ज़लों की गूंज वक़्त के दायरों के परे सदियों सदियों तक कायम रहेगी.” -आमीन

    ***********************

    My collective response to ‎Pavan Jha/ Arun Sethi:

    Pavan Jha/ Arun Sethi

    किसी पोस्ट पे आई हुई उन टिप्पणियों का विशेष महत्व होता है जो पोस्ट की कंटेंट वैलेऊ में गुणात्मक इजाफा करती है और मै जानता हू कि सार्थक टिप्पणिया देना कम से कम हिंदी लेखन संसार के आभासी जगत में बड़ी दुर्लभ चीज़ है..सो पवनजी और अरुण सेठी जी को बहुत धन्यवाद कि उन्होंने इतने शशक्त तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज करायी और अर्थपूर्ण साथ ही साथ रोचक जानकारिया देकर इस अद्भुत गायक को एक सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की..

    मै तो इतनी सारी बाते पढने के बाद यही सोच रहा हूँ कि हमारे सामने ही अपने गुज़र जाते है और हम एक आह भर के रह जाते है..वक्त ही अंत में जीत जाता है क्या करे….

    ना मोहब्बत ना दोस्ती के लिये
    वक़्त रुकता नही किसी के लिये

    http://www.radioreloaded.com/tracks/?5172

    **********************

    Thanks Prabhu Chaitanyaji and Radiodost Snd for liking the post… I was missing your presence Prabhuji…

    ***********************

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