भोजपुरी गीतों को डुबोती अश्लीलता

Bidesiya : Sadharan Madhur Geet

Bidesiya : Sadharan Madhur Geet

ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि भारतीय समाज एक विचित्र सा समाज हो गया है जो सही को तो होने नहीं देता जिससें सही आदमी का शोषण तो होता ही है इसके साथ ही वो सही आदमी सभ्य से अमानुष बनता चला जाता है. ये हमारी सारी व्यवस्था ही आदमी का शोषण और उसकी भावनाओ का दमन करने के लिए बनी है. इसमें कोई दो राय नहीं. ये भी कहना गलत नहीं कि ना हम पुरानी दकियानूसी बातो को दरकिनार कर पाए है और ना ही हम नयी प्रवत्तियो को ठीक से अपना पाए है. हम बिल्कुल चितकबरे विचित्र वानर बन गए है. अगर आप ये मानते है कि सिनेमा या गीत- संगीत समाज का दर्पण है तो ये मानने में कोई हर्ज़ नहीं  कि भोजपुरी गीतों में अश्लीलता या नंगापन ग्रामीण समाज में व्याप्त कुंठित भावनाओ की अभिव्यक्ति है. एक दृष्टिकोण तो यह भी है कि ग्रामीण समाज दबा के रखने वाली चीजों को लेकर सहज है और शायद इसीलिए  उनको कोई खास शिकायत नहीं अश्लीलता को लेकर जिस तरह एक सभ्य वर्ग को है. 

लेकिन इसी भीड़ में अद्भुत गीत भी है जो सुनने वालो से एक गहरा तादात्म्य स्थापित कर लेते है .वो सिर्फ इसलिए कि अपनी माटी और अपनी संस्कृति कि इनमे वास्तविक झलक होती है. जिन समस्याओ को हम फिल्मी या गैर फिल्मी गीतों में नहीं सुन पाते या फिर कृत्रिम रूप से एक थोपी हुई गंभीरता के साथ सुनते है वोही सब बाते हम भोजपुरी गीतों में एक सहज और मधुर रूप से सुन लेते है. शायद तभी इनका असर देर तक रहता है. ये अलग बात है कि सब चीजों पे पैसा हावी है. मै गाँव के आज के हालात से काफी अच्छी तरह से वाकिफ हू इसीलिए ये कहने में कोई संकोच नहीं कि हर तरह की विकृति ने गाँवों में अपनी पैठ बना ली है जिसकी एक झलक हमे भोजपुरी गीतों में बढती अश्लीलता के रूप में दिखाई पड़ती है. गाँवो में सड़क और सम्पन्नता के साथ अश्लीलता भी हौले हौले चली आई है.  मै ये कहूँगा कि समस्या बहुत गंभीर है. आप जो देख रहे है वो अंग्रेजी में ऐसे कहा जाएगा :“It’s just the tip of the iceberg”.  पर इन सब से परे हट के सोचे तो भोजपुरी गीतों की बात ही कुछ और है और इसीलिए जिन्होंने  “गंगा  मैया  तोहरे  पियरी चढ़ीइबो  ” या ”  नदिया  के  पार ”   के गीत  सुने है उन्हें आज के दौर के फूहड़ गीतों से खासी चिढ होती होगी.

Baleshwar-Yadav

Baleshwar-Yadav


आज के भोजपुरी गीत तो देखे. भाई लोगो ने  कल्पनाशीलता के ऐसे ऐसे बाण छोड़े है कि माथा थाम लेने का मन करता है. आज के  भोजपुरी गीतों का चोली और लहंगा से इतना गहरा रिश्ता है कि पूछिए मत. हर गीत में  चोली लहंगे का जिक्र जरूर है और आलम ये है कि “मोरे लहंगा में आवे रे भूकम्प “, “लहंगा में सबसे बड़ा ATM ” , “हमरे लहंगा में मीटर लगा दी राजाजी ” , “तोहार लहंगा उठा देब रिमोट से”  इत्यादि गीतों कि श्रंखला शुरू हो गयी और ये किसी को नहीं पता कि ये कहा जा के रुकेगा. अगर कल्पनाशीलता में कुछ कसर  रह गयी हो तो “हाई पॉवर के चुम्बक बाटे इनका दुप्पटा के पीछे ” या “कसम से देह रसगुल्ले  बा” जैसे गीतों ने ये कमी भी पूरी कर दी. अभी कुछ महीनों  पहले अपने गाँव मै गया तो वहा जब भी किसी मोबाइल पे आप काल करिए तो ये  गीत जरूर सुनने को मिलता था “मिस काल मारत तारु किस देबू का हो” . गाँवों में किसी और स्तर पर प्रोग्रेस हुई हो या ना हुई हो पर भैस चराते हुए नंगे बदन लोगो  के पास एक अच्छा और महंगा मोबाइल सेट जरुर मिल जाएगा जिसमे इस तरह के गीत आपको बजते हुए सुनाई पड़ जायेंगे. अगर आप  गाँव में किसी तरह इन गीतों को इलेक्ट्रोनिक माध्यम से सुनने से रह गए तो चिंता ना करे कोई बहुत ही कम उम्र का बच्चा आपको वोही गीत आपको लाइव  सुना देगा!!! 

तकलीफ की बात ये  है कि आप चाहे तो भी कुछ नहीं कर सकते. किसी के माता पिता से आप शिकायत करे तो या तो वो खीस निपोर के रह जाते है या फिर उल्टा आपको ही एक अच्छा खासा लेक्चर सुना देंगे. गाँव में जरा सी बात का बतंगड़ बनते देर थोड़ी ना लगती है. खैर मै गीतों के स्तर में गिरावट की बात कर रहा था. लोकगीतों की हमारे यहाँ समृद्ध परंपरा रही है और अवधी, बृजभाषा या भोजपुरी के गीतों की धूम रही है जिनमे एक से बढ़कर एक गीत जीवन के हर मोड के लिए है बिरह से लेकर मिलन तक. यहाँ तक कि मौसम के हिसाब से भी लोकगीत है जैसे होली, चैती और कजली.  लोकगीत गायकों जैसे  शारदा सिन्हा, भरत शर्मा, मनोज तिवारी और बालेश्वर यादव जैसे गायकों ने इन गीतों को एक नया ही आयाम दिया है.  अगर मै ये कहू तो गलत नहीं होगा कि देश के आप किसी कोने में चले जाए तो तरह तरह के लोकगीतों की भरमार है और इनके गाने वाले भी इनको खूब रस में डूबकर गाते है. इन सब को देखते हुए इन अश्लील गीतों का हर तरफ छा जाना मुझे बहुत खलता है. आप आंचलिक क्षेत्रो में किसी भी सीडी शॉप पे जाए तो आपको एक भी ढंग के गानों की सीडी नहीं मिलेगी पर हा ऐसे बेकार के गीतों की वो  हज़ार सीडी आपको वो दुकानदार थमा देगा. अब इन गीतों की बाढ़ क्यों इतनी आ गयी वो तो राम जाने पर चलते चलते मै ये दो अपनी पसंद के भोजपुरी गीत जरूर सुनवाना चाहता हू. सुनने से डरे मत इनमे लहंगा ,चोली और रसगुल्ले का जिक्र नहीं.  निश्चिंत रहे आप लोग.  मै यही तो बताना चाहता हू कि इस तिकड़ी के अभाव के बाद भी गीत  जियरा को मस्त कर सकता  है.

Aaj Ke Tathakathit Bhojpuri Geet

Aaj Ke Tathakathit Bhojpuri Geet

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पटना से बैद बुलाय द …( शारदा सिन्हा)

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रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे- मनोज तिवारी

 

गोरिया नैहर में सपना सजावत रहे

एक बरस एक दिनमां बितावत रहे

जहिया गौना कें दिनलवा बतवली सखी

वही दिनवा से हरदी लगावत रहे

आइल जाइय के लेले टिकसवा पिया

गिरल बिजुली करेजवा पर फाटल हिया

तब बढ़ के भिनुसरहे उठके के नहा धो के हो

लोर भरके मनौती मनावत रहे

रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे……४

अरे जौने टिकसवा से पिया मोरे जइहें-४

बरसे पनिया टिकस गली जाइ रे—२

जौने शहरिया में पिया मोरे जइहें-२

लाइगे अगिया शहर जरी जाय रे-२

जौने मलिकवा के पिया मोरे नौकर-२

परी जाए छापा पुलिस लिए जाए रे—२

जौने सवतिया के पिया मोरे आशिक-२

गिर जाए बिजुली सवत मरी जाए रे-२

अरे गिरधर गोरिया रे तोर पिया अइहें-२

विनती करिहें मनोज घर आए रे—२

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रेफेरेंस : 

पिक्स क्रेडिट :


8 responses

  1. सुगनवा के तोहरा संग जाई …क्या बोले इस निर्गुण भोजपुरी भजन को सुन के? …मौन होने के अलावा कोई विकल्प नहीं!

  2. बरखा का आइल बाहर हो मैय्या मोरे झूले झुलनवा..(उर्मिला श्रीवास्तव मिर्ज़ापुर से )

  3. बाबा निमिया क पेड़ जिन कटियो ..(उर्मिला श्रीवास्तव मिर्ज़ापुर से )

  4. Rough Translation of Two Videshia Songs:

    “The train or the ship are co-wives and not my enemies. My enemy is the money that has taken my husband to foreign shores.”

    ****************
    “I will make one grain of wheat last a year to ensure my husband does not go away leaving me behind.”

    http://www.hvk.org/articles/0905/13.html

  5. Aap ki baat se mai sahmat hu ki aaj kal ashleel geeton me kaafi izafa hua ,pata nahi aise geet bana ke log samaj ko kya message dena chahte hai,paisa kamane ke liye apna imaan aur zameer bhi bechte chale jaa rahe hai….Is ashleelata ko rokna hoga.Aaap jaise lekho ke kalam ke dam se hi ye baat jan jan tak logo tak pahuchayi jaa sakti hai.

    1. कोशिश तो यही हो रही है सुधीर।।।लेकिन आप इस बात को नोटिस कर कि चाहे हिंदी फ़िल्म संगीत हो या भोजपुरी दोनों में अश्लीलता हावी है। मतलब दोनों एक ही ढर्रे पर चल रहे है। अब पता नहीं तमिल, बंगाली और तेलगु जैसे अन्य वर्गों में क्या चल रहा है लेकिन इधर तो ऐसी ही लहर बह रही है।

  6. Swami Prabhu Chaitanya, Patna, Bihar, said:

    शुरू के तीन चार फिल्मों के बाद (हे गंगा मैया ..,लागी नाहीं छूटे राम ,बिदेसिया ..)
    छिटपुट कुछ हिंदी फिल्मों में भी भोजपुरी गाने ,
    अपने अच्छे ठाठ के साथ है .
    बाकी तो मुझे सब बकवास लगता है
    मेरे कान उनके सिवा कुछ सुनने को तैयार ही नहीं है .

    Author’s Response:

    बिल्कुल सही कह रहे है आप। वैसे इस मामले में जो हाल उधर है वो इधर भी है। खैर आप मुझे बहुत पुराने उस युग में ले गए है जिस युग में जाकर मेरी आत्मा फँस सी गयी है। सुनिए उसी युग की बेहतरीन फ़िल्म नदिया के पार से ये गीत।। वैसे सभी गीत मुझे पसंद थे लेकिन अभी आप ये सुने।।क्या कमाल का संगीत दिया है गुणी संगीतकार रविन्द्र जैन ने। क्या ये संभव है आज के बकवास गाने बजाने वालो के द्वारा? ये बताना उचित रहेगा कि हम आपके है कौन इसी चलचित्र का रिमेक थी।

  7. Many thanks to Manjoy Laxmi, Nagpur, Maharashtra; Rajesh Kumar Pandey,Allahabad, Uttar Pradesh, and Shashi Kumar Singh, Noida, Uttar Pradesh, for making their presence felt on the post.

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