Category Archives: Politics

मोदी से जुडी कुछ बाते: ना पक्ष में और ना विपक्ष में !

मोदी आ जरूर रहे है लेकिन उनके लिए प्रधानमंत्री का मुकुट किसी कांटो से भरे ताज के समान ही होगा। देखना यही है कि इन विषम परिस्थितियों में वे किस तरह देश को विकास के राह पे ले जाते है. सबसे बड़ी बात यही है कि हिन्दू जनमानस के भावनाओं का वो कितना ख्याल रख पाएंगे इस तरह के माहौल में जहा सिर्फ मुस्लिम अधिकार या क्रिस्चियन अधिकार ही सेक्युलर भावना का आधार बन चुके है!

मोदी आ जरूर रहे है लेकिन उनके लिए प्रधानमंत्री का मुकुट किसी कांटो से भरे ताज के समान ही होगा। देखना यही है कि इन विषम परिस्थितियों में वे किस तरह देश को विकास के राह पे ले जाते है. सबसे बड़ी बात यही है कि हिन्दू जनमानस के भावनाओं का वो कितना ख्याल रख पाएंगे इस तरह के माहौल में जहा सिर्फ मुस्लिम अधिकार या क्रिस्चियन अधिकार ही सेक्युलर भावना का आधार बन चुके है!


चुनाव के वक्त किसी एक बड़ी लहर का होना एक विशेष घटना होती है. लहर तभी होती है जब किसी जनप्रिय नेता का अचानक निधन हो जाए दुखद तरीके से या राजनैतिक हलकों में किसी स्कैम या स्कैंडल की वजह से किसी ख़ास पार्टी की तरफ लहर का माहौल बन जाए. इसलिए मोदी के पक्ष में लहर कई कारणों से अनोखी है. एक तो ये किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना की उपज नहीं है और दूसरी ये कि ये किसी बड़े कारण से नहीं उपजी है. इस लहर के पीछे कारण सिर्फ ये है कि लोग बदलाव चाहते है. कांग्रेस के कथनी और करनी में फर्क को देखते देखते लोग त्रस्त हो चुके है. ऐसे में नरेंद्र मोदी जिन्होंने गुजरात में अच्छा काम कर दिखाया तमाम विघटनकारी शक्तियों से सामना करते हुए वे लोगो के नज़रो में आशा की एक बड़ी किरण बन के उभरे है. और इस कदर उभरे है कि हर गली कूंचो में लोग इनके बारे में चर्चा कर रहे है. इन चर्चाओ में हर तबके के लोग शामिल है और हर उम्र वर्ग के लोग शामिल है. देहातो में आप निकल जाए वहा भी मोदी की लहर है. और ये सिर्फ सुनियोजित प्रचार के चलते संभव नहीं हुआ है बल्कि आश्चर्यजनक तरीके से मोदी में उपजे विश्वास के चलते सम्भव हुआ है.

नरेंद्र मोदी ने गुजरात में अच्छा काम किया ये तो है ही लेकिन कांग्रेस का दोहरा चरित्र लोगो ने भली भाँति समझ लिया ये एक बड़ी वजह है. लोगो ने ये समझ लिया है कि कांग्रेस राज के चलते इस देश में कुछ भी सही संभव नहीं. ये सिर्फ लोगो का शोषण करने के लिए बनी पार्टी है जिसमे नेता के नाम पर किसी एक परिवार के प्रति सम्मान रखने वाले चापलूस भरे पड़े हैं. ऐसा शायद ही कभी इस देश में हुआ हो कि किसी  प्रधानमन्त्री की छवि इतने असहाय और कमजोर व्यक्ति के रूप में उभरी हो जबकि उसके पास गुणों का भण्डार रहा हों. उसकी सबसे बड़ी वजह ये थी कि कांग्रेस ने कभी भी अच्छे आदमी को ताकत नहीं सौपी. सिर्फ उन्ही लोगो को आगे बढ़ाया जिन्होंने चमचागिरी और चाटुकारिता में यकीन रखा. अच्छे लोगो को कांग्रेस ने निकम्मा बना के छोड़ा. अब की  पीढ़ी ने ये कांग्रेस का चरित्र समझ लिया और वो बदलाव चाहती है. मोदी ना होते कोई और नेता इतने ही कद का होता तो वो भी लहर को जन्म दे देता. लेकिन नियति ने यह एक मौका मोदी को दिया है.

अगर हम मोदी के नज़रिये से देखे तो ये एक अच्छी घटना भी है और अच्छी नहीं भी है. वो इसलिए कि विरोधाभासों से भरे इस देश में जब आप किसी एक व्यक्ति पे इतना भरोसा कर लेते है और उससे इतनी सारी उम्मीदे पाल लेते है तो ऐसे में उसको अपने पोटेंशियल को आज़माना और सब की उम्मीदों पर खरे उतरना असंभव सा हो जाता है. लोगो का मोदी के प्रति उत्साह देख कर तो ये लगता है कि मोदी के आने के बाद क्रन्तिकारी बदलाव आएगा उस देश में जो पिछले साठ-सत्तर सालो क्या कई युगो से गुलामी के चक्र में पिसता चला आ रहा है. ये लोगो का इस कदर उम्मीदे पाल लेना, इतना उत्साह से लबरेज़ हो जाना खलता है. लोगो को उम्मीदे पालने में तार्किक और न्यायसंगत होना चाहिए ताकि आने वाला आदमी कुछ सही कर पाये वरना कुछ समय बाद लोग फिर चिढ़ने, कुढ़ने और गरियाने लगते है.

गुजरात के दंगो की बात करने वाले गोधरा नरसंहार पे चुप्पी साध लेते है !

गुजरात के दंगो की बात करने वाले गोधरा नरसंहार पे चुप्पी साध लेते है !

आप पहले इस देश का चरित्र देखे. जिस कांग्रेस पार्टी ने इतने सालो तक राज किया उसके पास किस तरह के नेता है. जो इनका यूथ  आइकॉन है इनकी नज़रो में और जो दुर्भाग्य से इनका प्रधानमंत्री पद का दावेदार भी है वो इतनी निकृष्ट सोच रखता है कि वे किसी की निजी जिंदगी में कीचड़ उछालने से बाज़ नहीं आता जबकि यही पार्टी महिलाओं का सम्मान करने का दम्भ पालती है! ये पार्टी युवा सोच का सम्मान करने वाली के रूप में अपने को प्रमोट कर रही है. तो क्या युवाओ की सोच इतनी सतही हो गयी है कि सत्ता का मोह किसी के निजी जिंदगी के उन किस्सों को उजागर करे जिनका वर्तमान से कुछ लेना देना ना हो?

इस देश में कांग्रेस के अलावा कुछ तथाकथित सेक्युलर पार्टिया भी है जिन्हे अपने प्रोग्रेसिव होने का दम्भ है और विगत वर्षो में ये कुछ इस कदर प्रोग्रेसिव हुई कि मुख्यधारा में शामिल राजनैतिक दलों के समूह से ही इनका लोप हो गया. बल्कि राजनैतिक दल के रूप में मान्यता भी घटे वोट प्रतिशत के कारण समाप्त हो गई. लेकिन इनके कुछ प्रकाशन अभी भी इनके नाम का भोंपू बजाते रहते है बेसिर पैर के लेखो के जरिये. सो इन प्रकाशनों के जरिये ये सन्देश दिया जा रहा है कि मोदी के आ जाने से “नरम फांसीवाद” का उदय होगा और ये कुछ ऐसा ही है जिस तरह हिटलर ने सत्ता प्राप्त की थी. इस तरह की सायकोटिक और पैरानॉयड सोच की वजह से ही भारत की जनता ने इन्हे मुख्यधारा से ही हटा दिया. इनका खुद का इतिहास ही क्रूर तानाशाहों से भरा रहा है लिहाज़ा इनका इस तरह से भयाक्रांत होना और लोगो में भी बेवजह भय उत्पन्न करना इनका एकमात्र धंधा बन गया है. ये खुद कितने साफ़ सुथरे चरित्र वाले रहे है इसका नमूना तो आप पश्चिम बंगाल में देख सकते है जहा मार्क्सवादी गुंडों ने कितने सालो तक आर्गनाइज्ड बूथ कैप्चरिंग करके किसी को सत्ता में आने ना दिया. कथनी और करनी में कितना ज्यादा फ़ासला हो सकता है ये इस पार्टी ने देश में सबको दिखाया।

इसी पार्टी की विचारधारा के लोगो ने देश और विदेश की  मेनस्ट्रीम मीडिया में अपने दलाल रख छोड़े है जिनका मुख्य काम यही है कि जहा दक्षिणपंथी सोच हावी होते हुए दिखे वहा पे तुरंत इस बात को प्रचारित करना शुरू कर दो कि देश की कल्चरल डाइवर्सिटी को खतरा है, मुसलमानो के बुरे दिन आ गए है, क्रिस्चियनस के बुरे दिन आ गए है इत्यादि. गुजरात के दंगो का जिन्न भी निकल कर बाहर आ जायेगा. याद करिये जब गुजरात में मोदी एक बार फिर बहुमत से जीत कर आये थे तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया उस वक्त किस नज़रिये से जीत को देख रही थी; ये देखे कि इस बात पे बहस हो रही थी कि मुस्लिमो का वोट प्रतिशत क्या रहा है और कहा पे मुस्लिमो ने वोट दिया और कहा नहीं दिया! मुस्लिम वोट के नाम पे होने वाले तमाशे को खुद मुस्लिम ही अगर सुलझा सके अपनी कबीलाई मानसिकता से ऊपर उठ कर तो बेहतर होगा. क्योकि बाहर से कोई इन्हे समझाए प्रेशर डाल कर तो खुद इनके भीतर और बाहर भी एक गलत सन्देश जाता है. लिहाज़ा इन्हे ही कुछ करना होगा ताकि इनके नाम पे होने वाले वीभत्स तमाशे बंद हो सके. पता नहीं क्यों मुस्लिमो ने हमेशा अपने को इस्तेमाल होते रहने देना पसंद किया है? इनके अंदर अभी भी बंद दिमागों का प्रभाव है जो इन्हे कभी भी वर्तमान में सही तरीके से जुड़ने से रोकता है और हर गलत ताकत से इनको जोड़ देता है. हो सकता है इनको अपने इस्तेमाल होते रहने में हित सधते दिखते है!

अमेरिका को ना पाकिस्तान में हुए हिन्दुओ पर अत्याचार दिखा और ना ही कभी उसे पाकिस्तान में कल्चरल डाइवर्सिटी खतरे में दिखी! केवल भारत में ही उसे ये खतरा दिखता है और वो भी चुनावो के वक्त या किसी और नाजुक समय में!

अमेरिका को ना पाकिस्तान में हुए हिन्दुओ पर अत्याचार दिखा और ना ही कभी उसे पाकिस्तान में कल्चरल डाइवर्सिटी खतरे में दिखी! केवल भारत में ही उसे ये खतरा दिखता है और वो भी चुनावो के वक्त या किसी और नाजुक समय में!

ऐसा नहीं कि हैलुसिनेशन का शिकार मेनस्ट्रीम मीडिया या राजनेता सिर्फ भारत में ही हलचल मचाते है बल्कि ऐसे नाज़ुक क्षणों में विदेशो में भी इस तरह के हैलुसिनेशन से ग्रसित लोग हर तरह की नौटंकी करने लगते है. अब अमेरिका में देखिये जैसे ही वहा के लोगो को मोदी के सत्ता में आने की संभावना दिखी वही पे अमेरिकी कांग्रेस में अच्छी खासी बहस छिड़ गयी कि मोदी के आगमन का मतलब कल्चरल डाइवर्सिटी को खतरा है जबकि भारत ही वो देश है साउथ एशिया में जहा कल्चरल डाइवर्सिटी सबसे स्थिर रही है. बिडम्बना देखिये कि रेसोलुशन ४१७ तब कभी नहीं लाया गया जब पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दू और सिख संप्रदाय पे बर्बर जुल्म हुए और उनका प्रतिशत लगातार घटता रहा इनके पलायन की वजह से. खुद अपने देश में कश्मीरी पंडितो पे हुए जुल्म को किसी अमेरिकी संस्था ने संज्ञान में लेने की कोशिश नहीं की. इस रेसोलुशन में गुजरात दंगो के लिए मोदी को जिम्मेदार माना गया जो ये दर्शाता है कि निहित स्वार्थ के चलते सोचने वाले दिमाग कितने संकीर्ण हो जाते है. ये बहस तब हो रही है जब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चले गहन इन्वेस्टीगेशन ने मोदी को क्लीन चिट दी और यहाँ तक कि गुजरात दंगो की दोबारा जांच की मांग को भी ख़ारिज कर दिया. गोधरा में ट्रेन में हुए नरसंहार को भी स्पेशल कोर्ट  ने एक संप्रदाय विशेष को ही दोषी माना और इसमें शामिल लोगो को मौत की सजा दी. अमेरिका जो ऊँची सोच का दम्भ रखता है शायद उसे भारत की न्याय परंपरा से अधिक संकीर्ण सोच से ग्रसित और गलत ताकतों द्वारा पोषित मेनस्ट्रीम मीडिया के कुछ प्रकाशनों पे ज्यादा ही भरोसा है.

 मोदी आ जरूर रहे है लेकिन उनके लिए प्रधानमंत्री का मुकुट किसी कांटो से भरे ताज के समान ही होगा. देखना यही है कि इन विषम परिस्थितियों में वे किस तरह देश को विकास के राह पे ले जाते है. सबसे बड़ी बात यही है कि हिन्दू जनमानस के भावनाओं का वो कितना ख्याल रख पाएंगे इस तरह के माहौल में जहा सिर्फ मुस्लिम अधिकार या क्रिस्चियन अधिकार ही सेक्युलर भावना का आधार बन चुके है! क्या वो विखंडित हिन्दू आस्था को  एक बेहतर मजबूती दे पाएंगे? क्या  इतनी सारी उम्मीदे पाले असंख्य लोगो की  आशाओ पे मोदी खरे उतर पाएंगे? ये तो सिर्फ अब आने वाला वक्त ही बतायेगा. बेहतर तो यही है कि इतनी सारी उम्मीदे पालने से अच्छा है कि मोदी को अपने हिसाब से चलने दिया जाए!

अमेरिका में मानवाधिकार की ऊँची ऊँची बाते करने वाली संस्थाओ ने कभी भी कश्मीरी पंडितो के दुर्दशा को संज्ञान में नहीं लिया !

अमेरिका में मानवाधिकार की ऊँची ऊँची बाते करने वाली संस्थाओ ने कभी भी कश्मीरी पंडितो के दुर्दशा को संज्ञान में नहीं लिया !

Reference:

Pics credit:

Pic One

Pic Two

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The Politics Of Rape In India

Mulayam Singh Yadav: Sometimes even wrong people say right things!

Mulayam Singh Yadav: Sometimes even wrong people say right things!



In early 80s one of the popular Hindi flicks revolved around a sensational theme wherein a girl accused a boy of attempting to rape her when she got caught during the seduction stage. As a result of that false accusation, the boy became victim of deep psychological disorder for lifelong. Similarly, a blockbuster Hindi movie released in early 90s shows the protagonist teaching a fitting lesson to her ladylove, who tries to take a revenge by feigning rape! The protagonist makes her very clear that a lady should not stoop down at this level wherein a sexual offence becomes a weapon to settle personal grudges. Not a long back ago the Supreme Court refused to grant relief to a girl who had feigned rape, which led to trial of two innocent youths. They had to ‘suffer the ignominy’ of being involved in such a serious offence!

The Supreme Court in his verdict, without mincing words, stated that  ‘evil of perjury’ has assumed alarming proportions and, therefore, girl deserves no sympathy for maliciously setting the law in motion. “It was a settled position in law that so far as sexual offences are concerned, sanctity is attached to a victim’s statement and that the evidence of victim alone is sufficient for the purpose of conviction if it is found to be reliable, cogent and credible.” It’s ludicrous that an absurd hue and cry is being made over Mulayam Singh Yadav’s alleged rape remarks. Before entering into interpretation of his remarks, it would not be offensive to state that there are few takers, including myself, of type of caste-ridden politics played by Mulyam Singh Yadav, Lalu Yadav and Mayawati. They are icons of regressive tendencies in Indian politics, who never allowed their followers to truly embrace progressive ideals. That’s the reason why Uttar Pradesh is still struggling hard to emerge as a developed state!

One needs to be sufficiently cautious while interpreting remarks of Mulyam Singh Yadav. True, his statement “boys…make mistakes” need to be severely condemned as it trivializes the gravity of a serious offence like rape. However, that’s not the only remark he made. One of the flaws committed by Indian and foreign journalists is that they tend to rely more on sensationalism and as a result of that they misquote and misinterpret serious remarks. That’s not only against the spirit of ethics based journalism but such tendencies also lead to volatile situation in various circles of society. I am sure that an ace politician like Mulyam Singh Yadav would have got his intent right when he pointed out a disturbing trend in Indian society, wherein sexual offences have become a tool to serve vested interests.

 If law makers are truly interested in equity based legal system then their prime task should be to make laws gender neutral!

If law makers are truly interested in equity based legal system then their prime task should be to make laws gender neutral!

The mainstream media eager to cash-in-on the controversial remark failed to highlight the other portion of his speech wherein he stated that “those filing false reports will also be taken to task” so as to stop the misuse of anti-rape law. The mainstream media, controlled by the feminist forces, very shrewdly suppressed this part of the alleged speech. He was demanding a change in anti-rape law not because “boys make mistake” but because its misuse has attained alarming proportions: “Boys and girls fall in love but due to differences they fall apart later on. When their friendship ends, the girl complains she has been raped.” This statement needs to be interpreted in light of  scenario prevailing in present day Indian society marred by perverse tendencies even if one has no place for brand of politics played by likes of Mulayam and Mayawati! This time a wrong person has said a right thing. Why are we hell bent to ignore a harsh reality of present age wherein women are not hesitant to put at stake their own dignity if that suits their interests?
 

Interestingly, cinema is said to be the mirror of society. The filmmakers were far ahead unlike the lawmakers, having their mindset caught in time-warp, in anticipating the disturbing changes in approach of modern Indian women. Unlike the lawmakers who remained glued to perception of “abla nari” (a woman is too innocent and weak to commit any wrong), the filmmakers were bold enough to depict newer trends emerging among women fraternity (refer to movies like Undertrial, Aitraaz, Corporate and etc.). It’s a very recent phenomenon that Supreme Court has taken cognizance of misuse of dowry laws besides being worried about growing trend of perjury cases while dealing with sexual offences. However, it’s quite ironical and travesty of present day grim tendencies that new anti-rape law has no place for gender-neutral provisions. That’s quite shocking. That means law still believes that only men could be perpetrators! How long are the lawmakers going to behave like ostriches having their heads buried in sand?

Needless to state that nobody is suggesting, or rather no one wants that people guilty of sexual offences of serious types should remain above stringent punishment. However, at the same time, it’s also pertinent that fair sex involved in  unfair practise of misusing laws should not be allowed to get off scot free. At the same time if law makers are truly interested in equity based legal system then their prime task should be to make laws gender neutral. What’s the point in nurturing illusions of medieval ages? They need to take clue from filmmakers, who are at least honest enough to portray real face of Indian society as it is (even if they do so to ensure flow of cash)! And the journalistic circle should better restrain themselves from viewing everything from political angle. That would augur well for the welfare of Indian society. The media should be more governed by truth than by falsehood, confusion, and twisted truth sponsored by the corrupt feminist forces! It’s really pathetic that biased mainstream media is averse to anything remotely serving the cause of men and is quick to nasty interpretations of well-meaning sentiments. And it’s even more sadder to notice that even social media remained concentrated on personal attacks rather than framing a more logical perspective!

Justice Dhingra: New Anti-rape law could be misused!

Justice Dhingra: New Anti-rape law could be misused!

References:

The Times of India

New York Daily News

Anti-rape law

False Rape Case

Supreme Court On Misuse of Rape Law

Pics Credit:

Pic One

Pic Two

Pic Three

Allahabad: City Of True Beauty, Real Romance And Mysticism (Photo Feature Part 2)

Many find Allahabad a very tough place to live an honourable life. That’s because  even though it came to enjoy a wonderful divine legacy, it never  ensured  a desired vibrancy for average souls. It never created any scope for living a truly fun-filled life, being all the time involved in dry intellectual activities.  Lack of  proper encouragement on the part of city towards its vast pool of talented brains have now given way to brain drain sort of affair. Many great souls remained an unsung hero in this city. However, what’s amazing is that it keeps on producing great souls at a regular interval! In nutshell, it’s a city of true beauty, real romance and mysticism. The city teaches you how to remain true to life in a real way, making it very clear to any conscious soul that life is not a bed of roses and it is meant to discover new mysteries of nature. Naturally, average souls running after money, fame, beautiful girl, big house, big car and many other cosmetic affairs would always feel disappointed to be part of this city. Having said that, I hope this city learns to truly honour its exceptional souls and also learns to be bit more blissful!  

 

That's one of the major Lord Hanuman Ji's  temple situated in the heart of the city.. Anyway, it's so ironic to see love birds engaged in romantic talks at this place  :P

That’s one of the major Lord Hanuman Ji’s temples situated in the heart of the city.. Anyway, it’s so ironic to see love birds engaged in romantic talks at this place :P

The Streets Of Civil Lines Makes People Of Other Areas Jealous :P

The Streets Of Civil Lines Make People Of Other Areas Jealous :P

Hard To Forget This Guy...During university days, I came to buy so many  greta classics, costly magazines at very reasonable rates..And this person made way for all sorts of desired adjustment.  He proudly told me that someone from Times of India also came to click image of  his magazine corner...This shop is hot favourite among  students!  Although Internet has affected the sales.

Hard to forget this guy…During university days, I came to buy so many great classics, costly magazines at very reasonable rates..And this person made way for all sorts of desired adjustment. He proudly told me that someone from Times of India also came to click image of his magazine corner…This shop is hot favourite among students! Although Internet has affected the sales, it was good to anticipate the great spirit of his father, also seen in the pic, who digested the change in philosophical way. Now that’s called wisdom!

Quite a romantic place to have tea!  It's adjacent Company Garden!

Quite a romantic place to have tea! It’s adjacent Company Garden!

 

When I say it's a romantic place I really mean it too..Just close to this tea shop in Civil Lines are we have many beautiful plant nurseries.. So the air is full of fragrance :P

When I say it’s a romantic place I really mean it too..Just close to this tea shop in Civil Lines area we have many beautiful plant nurseries.. So the air is full of fragrance :P

Allahabad Museum Inside Chandra Shekhar Azad Park ( Alfred Park or Company Garden). This musuem displays the vehicle which carried the ashes of Mahatma Gandhi for immersion at Sangam and many other articles of great historical significance!

Allahabad’s museum inside Chandra Shekhar Azad Park (Alfred Park or Company Garden). This museum displays the vehicle which carried the ashes of Mahatma Gandhi for immersion at Sangam and many other articles of great historical significance!

This park established in the memory of great revolutionary  Chandra Shekhar Azad is now favourite place for morning walkers living in the heart of city.. In the noon time, one notices  new- age romance :P Anyway, it's a great place for an outsider wishing some isolated hours!

This park established in the memory of great revolutionary Chandra Shekhar Azad is now favourite place for morning walkers living in the heart of city.. In the noon time, one notices new- age romance :P Anyway, it’s a great place for an outsider wishing some isolated hours!

At such places, like this old man, one gets lost in deepest memories hidden in subconsciousness!

At such places, like this old man, one gets lost in deepest memories hidden in subconsciousness!

Company Garden has the honour of having this wonderful  Government Public Library.  This majestic building built in Gothic style was designed by R. Roskell Bayne.  This building is of immense significance since here only Legislative Council for the North Western Province and Oudh held its first meeting on January 8, 1887.  Let's not forget it was capital city from of United Provinces from 1902 to 1920! Anyway, I am happy that in my college days and even now I am the most frequent visitor!

Company Garden has the honour of having this wonderful Government Public Library. This majestic building built in Gothic style was designed by R. Roskell Bayne. This building is of immense significance since here only Legislative Council for the North Western Province and Oudh held its first meeting on January 8, 1887. Let’s not forget that Allahabad was capital city  of United Provinces from 1902 to 1920! Anyway, I am happy that in my college days I was the most frequent visitor! Even now also I can be seen here :P

It's not that one notices only romance in parks..Here most of such parks are occupied by serious students preparing for competitive examinations!

It’s not that one notices only romance in parks..In Allahabad most of such parks are occupied by serious students preparing for competitive examinations!

And those students who are not studying inside Company Park are seen ferociousely involved in Cricket match :P ..This is the biggest park of Allahabad.

And those students who are not studying inside Company Park are seen ferociously involved in Cricket match :P ..This is the biggest park of Allahabad.

Just see the vastness of the park that many teams are playing at the same time :P :P :P

Just see the vastness of the park that many teams are playing at the same time :P :P :P

Saint Joseph's College View Which Lies Adjacent To Company Garden :P

Saint Joseph’s college  which lies adjacent to Company Garden :P

That's the road which connects Company Garden To Civil Lines-the heart of  city dominated by glamour and modernity!

That’s the road which connects Company Garden with  Civil Lines-the heart of city dominated by glamour and modernity!

The Mall Culture In Civil Lines!

The Mall Culture In Civil Lines!

Well, this new age glamour does attract me but not for long!

Well, this new age glamour does attract me but not for long!

Statue of Subhas Chandra Bose Amidst Mall Culture :P

Statue of Subhas Chandra Bose Amidst Mall Culture :P

Laxmi Book House Is First Choice Of Any Journalist! By the way, how many times do you notice cinema hall and prominent magazine/newspaper corner close to each other :P :P :P

Laxmi Book House is first choice of any journalist! By the way, how many times do you notice cinema hall and prominent magazine/newspaper corner close to each other :P :P :P

Palace Theatre enjoys a great place in the memories of all good cinema lovers. It's one of the oldest theaters in the city. However, it's old charm has given way to this new modern appearance ! My choice also witnessed drastic changes  from "Thodi Se Bewafai" (1980) to " Ship of Thesus" (2012)  at this Palace :P :P :P

Palace Theater enjoys a great place in the memories of all good cinema lovers. It’s one of the oldest theaters in the city. However, its old charm has given way to this new modern appearance ! My choice also witnessed drastic changes from “Thodi Se Bewafai” (1980) to ” Ship of Thesus” (2012) at this Palace Theater :P :P :P

However, this historic cinema hall in old Allahbad, Niranjan, failed to start again.  This hall needs to be rennovated at the earliest.  Two prominet movies which I came to see when they got realeasd were Richard Attenborough's Gandhi(1982) and Steven Spielber's Jurassic Park (1993).

However, this historic cinema hall in old Allahbad, Niranjan, failed to start again. This hall needs to be renovated at the earliest. Two prominent movies which I came to see here when they got released were Richard Attenborough’s Gandhi(1982) and Steven Spielberg’s Jurassic Park (1993).

Indian Coffee House enjoys a special place in hearts of all literary class.  It has witnessed many great literary and political figures carving a niche for themselves at global level since late 50s!

Indian Coffee House enjoys a special place in hearts of all literary class. It has witnessed many great literary and political figures carving a niche for themselves at global level since late 50s!

Resting place of capitalist forces :P

Resting place of capitalist forces :P

Worried about your future :P Consult him in Civil Lines under this tree :P

Worried about your future :P Consult this astrologer  at Civil Lines under this tree :P

A Tree taken aback by pomp and show at Civil Lines :-(

A Tree taken aback by pomp and show at Civil Lines :-(

Public Service Commission - an office where my father worked as an officer. And we lived in the residence situated on the huge campus of this office. Later, we shifted to Lucknow branch of the same office! Allahabad is city devoted to prominent government offices in Uttar Pradesh. Civil Lines area is mainly occupied by such government institutions.

Public Service Commission – an office where my father worked as an officer. And we lived in the residence situated on the huge campus of this office. Later, we shifted to Lucknow branch of the same office! Allahabad is city devoted to prominent government offices in Uttar Pradesh. Civil Lines area is mainly occupied by such government institutions.

Allahabad is also known for coaching institutes!!

Allahabad is also known for coaching institutes!!

And that's the place where I work:  Allahabad High Court :P

And that’s the place where I work: Allahabad High Court :P

Greenery is in abundance at Allahabad High Court :P :P :P

Greenery is in abundance at Allahabad High Court :P :P :P

Nearly all newspapers have their offices in Civil Lines area. However, Northern India Patrika's  office holds a special place in my heart.  This is one of the oldest newspapers in India which started in year 1868. It was then named Amrita Bazar Patrika.  Today, all good news editors and journalists are by-products of this newspaper.  Today it's not that financially successful but editors like V.S. Datta have kept its standards high.  V.S Datta, seniormost jourmalist from Allahabad, is its editor since early 60s. And when my first article appeared in print in this newspaper he was the one responsible for its publication. I owe a lot to him for all my accomplishments to him as a writer/journalist. May Lord give him long life and good health!

Nearly all newspapers have their offices in Civil Lines area. However, Northern India Patrika’s office holds a special place in my heart. This is one of the oldest newspapers in India which started in year 1868. It was then named Amrita Bazar Patrika. Today, all good news editors and journalists are by-products of this newspaper. Today it’s  financially not that successful but editors like V.S. Datta have kept its standards high. V.S Datta, senior-most journalist from Allahabad, is its editor since early 60s. And when my first article appeared in print in this newspaper in year 1995 he was the one responsible for its publication. I owe a lot to him for all my accomplishments  as a writer/journalist. May Lord give him long life and good health!

A Journalistic road..The road running parallel to Patrika House!

A Journalistic road..The road running parallel to Patrika House!

Lawyer's Hanuman Temple :P :P :P It's situated close to Allahabad High Court.  Most of the lawyers firts have Hanumanji's blessing and then proceed towards their respective chambers :P :P :P ...Well, it's time for now to take a litle break before I come back with Part three of photo feature related with Allahabad :-)

Lawyer’s Hanuman Temple :P :P :P It’s situated close to Allahabad High Court. Most of the lawyers first have Hanumanji’s blessing and then proceed towards their respective chambers :P :P :P

Geeta Niketan Temple In Tula Ram Bagh!

Geeta Niketan Temple In Tula Ram Bagh!

 

These areas are so over-crowded that one thinks twice before paying a vist ! This place is called Kotha Parcha. Courtesy telphone department that I have to come here to buy phone related instruments quite often :-(

These areas are so over-crowded that one thinks twice before paying a visit ! This place is called Kotha Parcha. Courtesy Telephone Department that I have to come here quiet often to buy phone related instruments  :-(

One of the busiest rail bridge!

One of the busiest rail bridge!

Pathar Chatti Ramleela Committee's Venue which hosts many programmes related with cause of Hindus! It's situated in Ram Bagh area of Allahabad.

Pathar Chatti Ramleela Committee’s Venue which hosts many programmes related with cause of Hindus! It’s situated in Ram Bagh area of Allahabad.

This Hanumanji's temple in Rambagh is also quite well-known temple in Allahabad :-) Hanumanji rocks in Allahabad :P

This Hanumanji’s temple in Rambagh is also quite well-known temple in Allahabad :-) Hanumanji rocks in Allahabad :P

Cute Street At Rambagh!

Cute Street At Rambagh!

It's a place which gives rise to new doctors :P :P :P

It’s a place which gives rise to new doctors :P :P :P

Allahabad has proper roads, any doubt?  :P :P

Allahabad has proper roads, any doubt? :P :P

Theosophical Society in Allahabad. " Blavatsky portrayed the Theosophical Society as being part of one of many attempts throughout the millennia by this hidden Hierarchy to guide humanity – in concert with the overall Intelligent Cosmic Evolutionary scheme – towards its ultimate, immutable evolutionary objective: the attainment of perfection and the conscious, willing participation in the evolutionary process."

Theosophical Society in Allahabad. ” Blavatsky portrayed the Theosophical Society as being part of one of many attempts throughout the millennia by this hidden Hierarchy to guide humanity – in concert with the overall Intelligent Cosmic Evolutionary scheme – towards its ultimate, immutable evolutionary objective: the attainment of perfection and the conscious, willing participation in the evolutionary process.”

 

Roads teach you a lot!

Roads teach you a lot!

This place bears testimony to meeting of Rishi Bharadwaj with Lord Rama...However, this park is nowadays chosen spot of lovers :P ..Anyway, meeting of Sri Rama, Sri Vishnu's incarnation,  would always remain one of the most significant moment in the history of Prayag!

This place bears testimony to meeting of Rishi Bharadwaja with Lord Rama…However, this park is nowadays chosen spot of lovers :P ..Anyway, meeting of Sri Rama, Sri Vishnu’s incarnation, with Rishi Bharadwaja would always remain one of the most significant moments in the history of Prayag!

 

Sometimes some places in Allahabad give you the feeling that you are moving in Kashi :-)

Sometimes some places in Allahabad give you the feeling that you are moving in Kashi :-)

That's the ancestral home of India's first prime minister Pt. Jawahar Lal Nehru which Indians know as Anand Bhawan. It played a significant role in Indian freedom movement. That's why visitors never miss this place :-)

That’s the ancestral home of India’s first prime minister Pt. Jawahar Lal Nehru which Indians know as Anand Bhawan. It played a significant role in Indian freedom movement. That’s why visitors never miss this place :-)

Hope new generation gets right message from being at such places. This place also has a  famous planetarium.

Hope new generation gets right message from being at such places. This place also has a famous planetarium.

Places like Anand Bhawan are not picnic spots but these places are now best remembered for spending few hours in fun-filled way..Anyway, historical legacy  has ensured survival of these small shopkeepers selling eatables!

Places like Anand Bhawan are not picnic spots but these places are now best remembered for spending few hours in fun-filled way..Anyway, historical legacy has ensured survival of these small shopkeepers selling eatables!

P.S. :- The copyright of these images rests with the author of this post. Anybody making use of them without prior permission of the author, or without giving due credit to the author, could be penalized as per legal norms.

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Reference:

Allahabad: A City Wedded To Realism (Photo Feature Part One)

Allahabad: A City Wherein Global Salutes The Local (Photo Feature Part 3)

 

 

 

 

 

 

Allahabad: A City Wedded To Realism (Photo Feature Part One)

Allahabad enjoys a glorious legacy. It’s a city that has been dominated by best minds since time immemorial. Its ancient name Prayag is associated with Rishis (saints) and Devas (demigods) eager to have an opportunity to live in this city.  Sri Rama, incarnation of Lord Vishnu,  and, Sri Shankaracharya, incarnation of Lord Shiva,  both came to interact with this city in their own ways.  Needless to state about Kumbh Mela, which provides it a global appeal.  And who can forget its role in Independence movement? And in post- Independence  era, it still continues to dominate the course of this great nation by giving birth to remarkable thought patterns. Leading politicians, top bureaucrats, great literary figures and etc.  all belong to this city. This city wedded to realism is very very slow in embracing ultra-modern changes, but now it has  started accepting bizarre changes all in the name of being in tune with time!

Even Allahabad's Skyline Above A Busy Corner Of The City Speak About Saints :-)

Even Allahabad’s Skyline Above A Busy Corner Of The City Speaks About Saints :-)

This city has imbibed secular spirt so well without any adherence to so-called secularism demonstrated my modern India's so-called secular leaders. It's beauitul Central Methodist church located in Civil Lines.

This city has imbibed secular spirit so well without any adherence to so-called secularism demonstrated by modern India’s so-called secular leaders. It’s beautiful Central Methodist church located in Civil Lines.

Another beautiful church located in Allahabad called "All Saints Cathedral" ( Patthar Girja)!  Designed by William Emerson this church depicts Gothic style.

Another beautiful church located in Allahabad called “All Saints Cathedral” (Patthar Girja)! Designed by William Emerson this church depicts Gothic style.

A Busy Street In Chowk Area. It's always a great rush here!

A Busy street in Chowk Area. It’s always a great rush here!

Another corner of Chowk Area.  This area comes in old Allahabad.

Another corner of Chowk area. This area comes in old Allahabad.

Don't be confused! It's not a  gali of Benaras. It's Allahabad's Loknath Ki Gali :-) Here too, like Varanasi's gali, you would find Lord Shiva, Bull, Bhaang, Mithai, Chaat and sea of people :P :P :P

Don’t be confused! It’s not a gali of Benaras. It’s Allahabad’s Loknath Ki Gali :-) Here too, like Varanasi’s gali, you would find Lord Shiva, Bull, Bhaang, Mithai, Chaat and sea of people :P :P :P

Yum! Yum! Yum! Sweets being made in Loknath Ki Gali. It's called Imarti :P :P :P

Yum! Yum! Yum! Sweets being made in Loknath Ki Gali. It’s called Imarti :P :P :P

Parrots on sale :P

Parrots on sale :P

 

This is Baldau's famous newspaper corner at very busy crossing of Johnstonganj :-) These two brothers  started this shop in late 90s and even in era of Internet they have done well to retain the flow of customers!

This is Baldau’s famous newspaper corner at very busy crossing of Johnstonganj :-) These two brothers started this shop in late 90s and even in era of Internet they have done well to retain the flow of customers!

And here Lord is on sale..I mean their images :P :P :P

And here Lord is on sale..I mean their images :P :P :P

Hot Popcorns :P :P  Garma Garam Aur Karare :P :P

Hot Popcorns :P :P Garma Garam Aur Karare :P :P

It's the place which defines the existence of Prayag..It's the place which bears testimony to one of the largest gatherings on planet earth called as Kumbh Mela..This is Sangam area, which is confluence of three rivers, namely, Ganges, Yamuna and Saraswati!

It’s the place which defines the existence of Prayag..It’s the place which bears testimony to one of the largest gatherings on planet earth called as Kumbh Mela..This is Sangam area, which is confluence of three rivers, namely, Ganges, Yamuna and Saraswati!

Visitors from distant lands arrive at this divine place :-)

Visitors from distant lands arrive at this divine place :-)

These are Pandas-the people who perform religious rituals on banks of rivers...

Usually one finds  Pandas beneath such constructions-the people who perform religious rituals on banks of rivers…However, at this time, we are noticing only the devotees :P

Well, it's a great feeling to be at this place...It fills you with positive energy!!

Well, it’s a great feeling to be at this place…It fills you with positive energy!!

 

Evening Hours At Sangam :-) So Beautiful :-)

Evening Hours At Sangam :-) So Beautiful :-)

On Road To Sangam :P

On Road To Sangam :P

During Mela time It's absolutely  jam-packed !

During Mela time it’s absolutely jam-packed!

This routes are created during Mela days to allow  smooth passage of vehicles!

These routes are created during Mela days to allow smooth passage of vehicles!

Beautiful View Of The Sangam Area!

Beautiful View Of The Sangam Area!

Now That's The Place Which Millions Of Devotees Each Year :-)

Now That’s The Place Which Witnesses Millions Of Devotees Each Year :-)

I also left my footprints here :-) :-) :-)

I also left my footprints here :-) :-) :-)

 A Bird's Eye View Of The Sangam Area :P

A Bird’s Eye View Of The Sangam Area :P

Glimpse of Devotees At This Place. They come from various parts of India in a hope to have their wishes fulfilled.  But not without taking a dip in the icy waters :P :P :P

Glimpse of devotees at this place. They come from various parts of India with a hope to have their wishes fulfilled. But not without taking a dip in the icy waters :P :P :P

This Is Allahabad's Fort built  by great ruler King Ashoka! Now it's under the control of Indian Army!

This Is Allahabad’s Fort built by great ruler King Ashoka! Now it’s under the control of Indian Army!

This beautiful fort was repaired by Mughal Emperor Akbar in 1583 AD !

This beautiful fort was repaired by Mughal Emperor Akbar in 1583 A.D. !

This is famous Akshayavat Temple situated inside Allahabad Fort.  This temple has so many great stories associated with it from being the only place to survive during great annhilation of universe by the Lord to a place associated with visit of Lord Rama, Sita Maiyya and Lakshmana!

This is famous Akshayavat Temple situated inside Allahabad Fort. This temple has so many great stories associated with it from being the only place to survive during great annihilation of universe by the Lord to a place associated with visit of Lord Rama, Sri Sita Maiyya and Sri Lakshmana!

In Uttar Pradesh very few cities have beautiful roads :P

In Uttar Pradesh very few cities have beautiful roads :P

 

This is Bade Hanuman Ji's Temple located in Sangam Area. It's an extremely popular temple among the devotees!  Notice the huge number of devotees at this place!  Interestingly, it believes that every year Hanumanji, who is in lying position in this temple, is made to have total bath by Ganges at least once :-)

This is Bade Hanuman Ji’s Temple located in Sangam Area. It’s an extremely popular temple among the devotees! Notice the huge number of devotees at this place! Interestingly, every year Sri Hanumanji, who is in lying position in this temple, is made to have total bath by Ganges at least once :-)

Life around this temple. It's so colourful and serene :-)

Life around this temple. It’s so colourful and serene :-)

These three fellows were having great arguments among themselves..Later they became friends :P :P :P

These three fellows were having great arguments among themselves..Later they became friends :P :P :P

Modern upper class women might not be interested in buying any item from these shops but women from rural belts spend a long time on these shops to have their beauty enhanced :P

Modern upper class women might not be interested in buying any item from these shops but women from rural belts spend a long time on these shops to have their beauty enhanced :P

This is a temple dedicated to Sri Adi Shankaracharya ji.  Sri Adi Shankara ji was India's greatest philosopher who added new dimensions in Advaita Darshana. This temple is managed by Shri Kanchi Kamkoti Peeth.

This is a temple dedicated to Sri Adi Shankaracharya ji. Sri Adi Shankara ji was India’s greatest philosopher who added new dimensions in Advaita Darshana. This temple is managed by Shri Kanchi Kamkoti Peeth.

Entrance  Gate Of This Temple.

Entrance Gate Of This Temple.

Various episodes from the life of  Sri Adi Shankara have been shown via images carved on the walls of the temple. In this one, we find him having a dialogue with another great philosopher of his times Kumarila Bhatta :-)

Various episodes from the life of Sri Adi Shankara have been shown via images carved on the walls of the temple. In this one, we find him having a dialogue with another great philosopher of his times Sri Kumarila Bhatta :-)

Now who can forget Sri Adi Shankara's debate with Sri Mandana Misra- a great Hindu philosopher :-) :-) :-)

Now who can forget Sri Adi Shankara’s debate with Sri Mandana Misra- a great Hindu philosopher ?  :-) :-) :-)

Just close to this temple one would find this beautiful shop selling decorative items made of brass and other metals!

Just close to this temple one would find this beautiful shop selling decorative items made of brass and other metals!

It's a beautiful affair to have a lonely walk on these roads in Sangam Area :-)

It’s a beautiful affair to have a lonely walk on these roads in Sangam Area :-)

Close to the Sangam area lies Allahbad's  Daraganj area. Allahbadi's best remember it for Niralaji's presence, who happened to be doyen of Hindi literature. Notice his statue behind the vegetable shop!

Close to the Sangam area lies Allahbad’s Daraganj area. Allahbadis best remember it for Niralaji’s presence, who happened to be doyen of Hindi literature. Notice his statue behind the vegetable shop!

The rustic feeling which one gets on being streets leading to Daraganj is quite unique :-)

The rustic feeling which one gets on being streets leading to Daraganj is quite unique :-)

This street is bit cleaner without losing  its rustic appeal :P

This street is bit cleaner without losing its rustic appeal :P

And Daraganj area has its own railway station. Small stations have their own unique charm :P

And Daraganj area has its own railway station. Small stations have their own unique charm :P

And I also came to notice these very beautiful calves in Daraganj area :P :P :P

And I also came to notice these very beautiful calves in Daraganj area :P :P :P

Daraganj area has many well-known temples. One of them is associated with Goddess Shakti: Alopi Ma's Temple.  During Navratris there is huge flow of devotees :-)

Daraganj area has many well-known temples. One of them is associated with Goddess Shakti: Alopi Devi’s Temple. During Navratris there is huge flow of devotees :-)

Inside view of Sri Alopi Devi's Temple :-)

Inside view of Sri Alopi Devi’s Temple :-)

Now how can Lord Krishna remain far behind :P :P This temple known as  Rupa Gaudiya Math is part of Vaishnava cult. It's learnt that  Srila Prabhupada took initiation here from Srila Bhaktisiddhanta Saraswati ji Maharaja!  Jai Sri Krishna :P :P

Now how can Lord Krishna remain far behind :P :P This temple known as Rupa Gaudiya Math is part of Vaishnava cult. It’s learnt that Srila Prabhupadaji  took initiation here from Srila Bhaktisiddhanta Saraswati ji Maharaja! Jai Sri Krishna :P :P

And the life goes on in routine way on streets running parallel to this temple :-)

And the life goes on in routine way on streets running parallel to this temple :-)

And I also came to notice this Sanskrit College Associated With Sampoornananda University, Varanasi :-)

And I also came to notice this Sanskrit College associated with Sampoornananda University, Varanasi, in Daraganj area :-)

Have you tasted Dehati Rasgulla :P  If not, then it's time for you to taste them :P. My favourite shop lies in Bairahana area..During my college days, this was my favourite place for Rasgullas :P ...And notice the huge crowd :P

Have you tasted Dehati Rasgulla :P If not, then it’s time for you to taste them :P. My favourite shop lies in Bairahana area..During my college days, this was my favourite place for Rasgullas :P …And notice the huge crowd :P

They taste really good :P...Just have them before I come back with Part 2 of photo feature associated with Allahabad :P :P

They taste really good :P…Just have them before I come back with Part 2 of photo feature associated with Allahabad :P :P

P.S. :- The copyright of these images rests with the author of this post. Anybody making use of them without prior permission of the author, or without giving due credit to the author, could be penalized as per legal norms.

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 References:

Allahabad: City Of True Beauty, Real Romance And Mysticism (Photo Feature Part 2)

Allahabad: A City Wherein Global Salutes The Local (Photo Feature Part 3)

 

 

 

 

 

 

 

 

कांची के शंकराचार्य की रिहाई इस बात को दर्शाती है कि वर्तमान समय में दुष्प्रचार ज्यादा ताकतवर है बजाय सत्य के!

कांची के शंकराचार्य अंततः निर्दोष और निष्पाप होकर उभरे लेकिन इस नौ साल लम्बे ड्रामे की वजह से इस अति प्राचीन हिन्दू मठ पर जो दाग लगे उसको मिटने में कई वर्ष लगेंगे.

कांची के शंकराचार्य अंततः निर्दोष और निष्पाप होकर उभरे लेकिन इस नौ साल लम्बे ड्रामे की वजह से इस अति प्राचीन हिन्दू मठ पर जो दाग लगे उसको मिटने में कई वर्ष लगेंगे.


इस नए युग के इंडिया यानि “भारत” के अगर हाल के घटनाओ को देखे तो ये आसानी से समझ आ जाएगा कि धर्मनिरपेक्ष सरकारो ने सबसे ज्यादा जुल्म ढाया है हिन्दू संतो पर. ये धर्मनिरपेक्ष सरकारे मुग़लकाल के बाद्शाहो और ब्रिटिश काल के शासको से भी ज्यादा क्रूर रही है हिन्दू धर्मं से जुड़े प्रतीकों को ध्वस्त करने और इनसे जुड़े लोगो को अपमानित करने के मामले में. हिन्दू संतो को निराकरण ही प्रताड़ित किया जा रहा है और इन्हे यौन अपराधो से लेकर देशद्रोह जैसे जघन्य अपराधो में बेवजह घसीटा जा रहा है. बिकी हुई मीडिया इन प्रकरणो का एक पक्ष 
दिखाती  है अपने देश में और देश के बाहर विदेशी अखबारो में. ये आपको अक्सर देखने को मिलेगा कि इस प्रकार के खबरो में ज्यादातर झूठ होता है या अर्धसत्य का सहारा लेकर एक भ्रामक कहानी गाढ़ी जाती है. कोई भी मुख्यधारा का समाचार पत्र तस्वीर के दोनों पहलू दिखाने में दिलचस्पी नहीं रखता.

एक सबसे बड़ी वजह ये है कि ज्यादातर  भारतीय मीडिया समूह का कण्ट्रोल विदेशी ताकतो के हाथो में है. सबके विदेशी हित कही ना कही शामिल है तब हम किस तरह से इनसे ये आशा रखे कि ये सच बोलेंगे? ये वही मुख्यधारा के समाचार पत्र है जो साध्वी प्रज्ञा के गिरफ्तारी को तो खूब जोर शोर से दिखाते है लेकिन साध्वी के साथ जेल के अंदर हुए अमानवीय कृत्यो को जो बंदियो के अधिकारो का सरासर उल्लंघन था उसको दिखाने या बताने से साफ़ मुँह मोड़ गए. ये वही मुख्यधारा के समाचार पत्र है जिन्होंने देवयानी प्रकरण में देवयानी का साथ इस तरह से दिया जैसी कि उसने भारत के नाम विदेशो में ऊँचा किया हो, जैसे उसने कोई जुर्म ही नहीं किया हो. वो इसलिए से क्योकि इसका सरकार से सीधा सरोकार है और सिस्टम इसके पक्ष में है लेकिन हर वो आदमी जिसने भी सरकार ये सिस्टम के विपक्ष में कुछ कहा उसे इस तरह की  सरकारे या सिस्टम सुनियोजित तरीको से अपराधी घोषित कर देता है.

ये कहने में कोई संकोच नहीं कि आज के युग मे सत्य से ज्यादा असरदार किसी के खिलाफ सुनियोजित तरीके से फैलायी गयी मनगढंत बाते है. समाचार पत्रो का काम होता है सत्य को सामने लाना सही रिपोर्टिंग के जरिये लेकिन हो इसका ठीक उल्टा रहा है: मीडिया आज सबसे बड़ा हथियार बन गयी है झूठ और भ्रम को विस्तार देने हेतु. इसका केवल इतना काम रहा गया है कि हर गलत ताकतो को जो सत्ता में है उनको बचाना, उनको बल देना. एक बाजारू औरत की तरह अपनी निष्ठा को हर बार बदलते रहना मीडिया का एकमात्र धर्मं बन गया है. साधारण शब्दो में ये सत्ता पे आसीन शासको की भाषा बोलता है. कांची के पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती जी की गिरफ्तारी के प्रकरण के रौशनी में इस प्रकरण को देखे जिन्हे २००४ में बेहद शर्मनाक तरीके से शंकर रमण के हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था. शंकर रमण कांची के एक मंदिर में मैनेजेर थें. उस वक्त के तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता ने अपने को धर्मनिरपेक्ष साबित करने के लिए और ये जताने के लिए कि कानून से ऊपर कोई नहीं होता इनकी गिरफतारी सुनिश्चित की. कांची के शंकराचार्य के ऊपर “आपराधिक षड्यंत्र, अदालत को गुमराह करने गलत सूचना के जरिये, धन का आदान प्रदान आपराधिक गतिविधि को क्रियांवित करने के लिये” आदि आरोप लगाये गए.

इस एक हज़ार साल से भी ऊपर अति प्राचीन ब्राह्मणो के अत्यंत महत्त्वपूर्ण केंद्र के मुख्य संचालक को इस तरह अपमानजनक तरीके से एक दुर्दांत अपराधी के भांति गिरफ्तार करना और फिर मुख्यधारा के समाचार पत्रो के द्वारा अनर्गल बयानो के आधार पर उनको दोषी करार कर देना अपने आप में मीडिया की सच्चाई बयान कर देता है. ये बता देना आवश्यक रहेगा कि कांची कामकोटि पीठ हिन्दुओ का अति प्राचीन मठ है जिसको हिन्दू समुदाय में दुनिया भर में बेहद श्रद्धा के साथ देखा जाता है. कांची के पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती जी बहुत सम्मान की दृष्टि से देखे जाते रहे है हिन्दू शास्त्रो के मर्मज्ञ होने के कारण. इन्होने  नवी शताब्दी में स्थापित कांची कामकोटि पीठ के गरिमा को नयी ऊंचाई प्रदान की, जिसकी हिन्दू समुदाय में वेटिकन चर्च सरीखी पकड़ है. जयललिता और ब्राह्मण विरोधी नेता डीएमके प्रमुख करूणानिधि के आपसी मतभेदों के चलते इस हिन्दू मठ के माथे पर कालिख लग गयी.

 ये बता देना आवश्यक रहेगा कि कांची कामकोटि पीठ हिन्दुओ का अति प्राचीन मठ है जिसको हिन्दू समुदाय में दुनिया भर में बेहद श्रद्धा के साथ देखा जाता है. कांची के पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती जी बहुत सम्मान की दृष्टि से देखे जाते रहे है हिन्दू शास्त्रो के मर्मज्ञ होने के कारण. इन्होने  नवी शताब्दी में स्थापित कांची कामकोटि पीठ के गरिमा को नयी ऊंचाई प्रदान की, जिसकी हिन्दू समुदाय में वेटिकन चर्च सरीखी पकड़ है. जयललिता और ब्राह्मण विरोधी नेता डीएमके प्रमुख करूणानिधि के आपसी मतभेदों के चलते इस हिन्दू मठ के माथे पर कालिख लग गयी.

ये बता देना आवश्यक रहेगा कि कांची कामकोटि पीठ हिन्दुओ का अति प्राचीन मठ है जिसको हिन्दू समुदाय में दुनिया भर में बेहद श्रद्धा के साथ देखा जाता है. कांची के पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती जी बहुत सम्मान की दृष्टि से देखे जाते रहे है हिन्दू शास्त्रो के मर्मज्ञ होने के कारण. इन्होने नवी शताब्दी में स्थापित कांची कामकोटि पीठ के गरिमा को नयी ऊंचाई प्रदान की, जिसकी हिन्दू समुदाय में वेटिकन चर्च सरीखी पकड़ है. जयललिता और ब्राह्मण विरोधी नेता डीएमके प्रमुख करूणानिधि के आपसी मतभेदों के चलते इस हिन्दू मठ के माथे पर कालिख लग गयी.

उस वक्त के प्रमुख समाचार पत्रो ने ये दर्शाया कि पुलिस इस तरह से गिरफ्तार करने का साहस बिना पुख्ता सबूतो के कर ही नहीं सकती. उस वक्त अभियोजन पक्ष के वकील इस बात से पूरी तरह आश्वस्त थे कि शंकराचार्य को दोषी साबित करने के लिए उनके पास पर्याप्त पुख्ता सबूत थें. विवेचना अधिकारी प्रेम कुमार का ये बयान प्रमुखता से छपा कि हमारे पास ठोस साक्ष्य है स्वामी जयेन्द्र सरस्वती के खिलाफ और ये कि शंकर रमण और इनके बीच करीब चार सालो से आपसी मनमुटाव था जिसको सिद्ध करने के लिए पर्याप्त सबूत इकठ्ठा किये जा रहे है.

खैर ईश्वर के यहाँ देर भले हो पर अंधेर नहीं है. सत्य की अंततः विजय हुई जब पांडिचेरी की विशेष अदालत ने सत्ताइस नवंबर २०१३ को उन सभी लोगो को जो शंकर रमण हत्याकांड में आरोपी बनाये गए थें उनको बाइज्जत बरी कर दिया. इसी के साथ नौ साल से हो रहे ड्रामे का पटाक्षेप हो गया. उन पर लगाये गए सभी आरोपो से उन्हें मुक्त कर दिया गया. जितने भी प्रमुख गवाह थें उन्होंने अभियोजन पक्ष के वर्णन को समर्थन देने से इंकार कर दिया। अभियोजन पक्ष के विरोध में करीब ८० से अधिक गवाहो ने अपने बयान दर्ज कराये।

कांची के शंकराचार्य अंततः निर्दोष और निष्पाप होकर उभरे लेकिन इस नौ साल लम्बे ड्रामे की वजह से इस अति प्राचीन हिन्दू मठ पर जो दाग लगे उसको मिटने में कई वर्ष लगेंगे. हिन्दुओ के आस्था और प्रतीक के साथ जो बेहूदा मजाक हुआ उसके निशान कई वर्षो तक संवेदनशील मनो को कटोचते रहेंगे. लेकिन हिन्दू ब्राह्मण के उदार मन को देखिये कि इतना होने के बाद भी किसी के प्रति कोई कटुता नहीं. इस परिपेक्ष्य में शंकराचार्य के वक्तव्य को देखिये जो उन्होंने बरी होने के बाद दिया: ” धर्म की विजय हुई. सत्य की जीत हुई. सब कुछ खत्म हो जाने के बाद अंत में केवल यही बात मायने रखती है. मुझे मेरे गुरु ने सब कुछ सहन करने को कहा है. इसलिए ये कहना उचित नहीं होगा कि हालात मेरे लिए असहनीय थें. हा कुछ दिक्कते जरूर आयी वो भी उस वजह सें कि हम लोग नयी तरह की परिस्थितयो का सामना कर रहे थें. हमने पूर्व में देखा है कि किस तरह आक्रमणकारियों ने हिन्दू मंदिरो पर हमले कर उनको विध्वंस किया। आज जब हम मंदिरो पर पड़े उन हमलो की निशानियाँ देखते है तो  हमे वे आक्रमणकारी और उनकी क्रूरता याद आती है. आज जो कुछ भी मठ के साथ हुआ ( मेरे पर जो  आरोप लगे) वे बहुतो की नज़र में पूर्व में किये गए आक्रमणकारियों के द्वारा किये गए विध्वंस सरीखे ही है.”

ये बहुत दुःख की बात है कि जैसे ही किसी हिन्दू संत पर कोई आरोप लगते है सारे मुख्यधारा के मीडिया समूह उस संत को बदनाम करने की कवायद में जुट जाते है पूरी ताकत से इस बात से बिल्कुल बेपरवाह होकर कि मीडिया का मुख्य काम किसी भी घटना की सही-२ रिपोर्टिंग करनी होती है ना कि न्यायिक ट्रायल करना। उससे भी बड़ी बिडम्बना ये है कि अगर संत पर लगे आरोप निराधार और झूठे पाये जाते है तो जो अखबार या फिर न्यूज़ चैनल आरोप लगने के वक्त पूरे जोर शोर से संत को दोषी ठहरा रहे थे वे ही अखबार और न्यूज़ चैनल पूरी तरह से कन्नी काट लेते है. संत को बेगुनाह साबित करने वाली खबर कब आती है और कब चली जाती है ये पता भी नहीं चलता है. यही वजह है कि कांची के शंकराचार्य की बेगुनाही और बाइज्ज़त बरी होना किसी भी शीर्ष अखबार के सुर्खियो में नहीं आया. शायद सेकुलर मीडिया ने ये सोच कर इस खबर को प्रमुखता से नहीं बताया क्योकि हिन्दुओ से जुडी कोई भली खबर सेक्युलर भावना के विपरीत होती है!

मेनस्ट्रीम मीडिया को प्रोपगेंडा ज्यादा रास आता है बजाय सत्य के. सेक्युलर ताकतो ने और इनके द्वारा संचालित मीडिया समूहो ने कांची के शंकराचार्य के गिरफ्तारी के वक्त ये बहुत जोरदार तरीके से ये दर्शाया कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं होता. तो क्या यही सेक्युलर ताकते जो कानून की बात करती है शाही ईमाम सैय्यद अहमद बुख़ारी को गिरफ्तार करने की हिम्मत रखते है जिन पर कई धाराओ में देश के विभिन्न थानो में एफ आई आर दर्ज है? क्या यही सेक्युलर ताकते उन क्रिस्चियन मिशनरीज को बेनकाब करने की ताकत रखती है जो देश के पिछड़े और दूर दराज के इलाको में लोगो को बहला फुसला कर उनका धर्म परिवर्तन कर रही है? लेकिन ये सबको पता है कि सेक्युलर मीडिया ऐसा कभी नहीं करेगा. ऐसा इसलिए कि इन सेक्युलर लोगो की निगाह में कानून के लम्बे हाथ केवल हिन्दू संतो के गर्दन तक पहुंचती है. ये हिन्दू संतो को केवल बदनाम करने तक ही सीमित है और हिन्दू आस्था को खंडित और विकृत करने भर के लिए है. ये दुष्प्रचार के समर्थक है सत्य के नहीं.

हिन्दू संत अपनी जाने गंवाते रहे है लेकिन ये खबरे कभी भी सेक्युलर मीडिया की सुर्खिया नहीं बनी. ये स्वामी लक्ष्मणानन्द जी की तस्वीर है जिनकी हत्या क्रिस्चियन ताकतो ने कर दी थी.

हिन्दू संत अपनी जाने गंवाते रहे है लेकिन ये खबरे कभी भी सेक्युलर मीडिया की सुर्खिया नहीं बनी. ये स्वामी लक्ष्मणानन्द जी की तस्वीर है जिनकी हत्या क्रिस्चियन ताकतो ने कर दी थी.


References:

IBN Live

The Hindu

The Hindu

Wiki


Pics Credit:

Pic One

Pic two

Pic Three

The Times Of India: Marriage Bill Is Anti-Men

This News Item Appeared In The Allahabad Edition Of The Times Of India On December 19, 2013.

This News Item Appeared In The Allahabad Edition Of The Times Of India On December 19, 2013.


It’s a matter of great satisfaction that prominent publications related with mainstream media have begun to embrace issues related with men in a fair way. The various bodies working for the cause of men across the nation have decided to ferociously protest against the recent amendments made in Hindu Marriage Laws which are not only anti-male but also do not augur well for the cause of society. I  must appreciate The Times of India and its correspondents some of them whom I know personally quite well  for  being sympathetic towards issues sensitive in nature. The complicated issues cannot be dealt with in a proper way unless we know both the sides of story and this type of fair reporting allows us to be more informed about aspects which remain neglected owing to lack of dissemination.  Right now  some of the well known Men’s associations based in Bangalore, Pune,  Nagpur and elsewhere are working hard to create awareness regarding misuse of laws, which they call legal terrorism. The activists right now are engaged in having dialogue with Members of Parliament with a hope to apprise them of with concerns of Men’s Associations. I am sure the day is not far when gender-neutral laws would get introduced to provide a better shape to Indian society now on the verge of disarray due to blatant misuse of power by the feminists, enjoying support of negative powers operating within the nation and in foreign lands. 

 

Two Faces Of Masculinity From The Crude Real World Supposedly Belonging To Men In The Eyes Of Feminists!

Men Will Keep Losing Lives For The Sake Of Society!

Men Will Keep Losing Lives For The Sake Of Society!

*Scene One*

This year in the month of September a senior police officer, belonging to IPS cadre, tried to commit suicide in Maharashtra. Such news report now do not stir the emotions of common mass other than creating short-lived ripples within some sensitive minds. Even when it forces the thinking class to take cognizance of such news items, the centre of gravity in these discussions remain governed by flimsy causes and after a certain period the issue gets swept under the carpet.
 

In this particular sensational incident, this senior police officer was at the receiving end of humiliating gestures at the hands of another junior officer, belonging to IAS cadre. This harassment continued for a certain period of time and seeing no way to get out of this mess this hard-working and honest police official set himself on fire. The reason why this police officer faced the ire of this junior IAS officer was that he had found this junior officer responsible for alleged irregularities in the Maharashtra State Road Transport Corporation (MSRTC). This IPS officer in his capacity as the Chief Vigilance Officer of the MSRTC submitted an inquiry report, which found this officer guilty, who was, ironically, the head of this department at that point of time.

That’s one of the few examples from world of ours, which contradicts the claims of  feminists always unfailingly harping on the same string that world belongs to men! Unfortunately, they never realize that it’s rough, cruel and hellish for men-at-large for most of the time. The wives of such hard-working honest officials, who see such husbands as no more than a source to have ready cash all the time for their sense gratification, either in form of buying costly jewelries, costly attires, rarely come to realize what’s actually the state of affairs in lives of the their husbands. Worse, being unaware of the harsh realities prevailing in the world of men, the women show no haste in throwing tantrums on one pretext or another.

Husbands usually do not protest over such whimsical demands of wives since in their eyes giving way to demands of their wives appears to be some sort of fulfilling one’s duty towards them! And that’s how women come to rule over them and in turn exploit them.  Ironically, now laced with new rights, wives have become more possessive, greedy and irrational. It’s a sad declaration but it’s true that scenario would not change in future. It would remain the same, wherein husbands like, bonded labourers, would continue to serve their wives, even as they remained at the receiving end of most tragic developments in world outside the confines of drying room.

Suicide By Men Is Not A Serious Issue For Governments!

Suicide By Men Is Not A Serious Issue For Governments!

  *Scene Two*      

In one of the famous restaurants of Allahabad, popular among love birds, arrived one such couple. Everything went alright between these two lovers, enjoying a happy conversation amid refreshments. Suddenly, a call arrived on the phone of male friend and he went on to have a long conversation. Being suspicious about the nature of the phone call, the female partner inquired about it from her lover. The explanation offered by the male partner did not appear convincing to her and that led to heated debate between the two. The happy mood gave way to high voltage drama marred by panic and tension. The female partner, who belonged to elite class, being unaware of the consequences of involving police, telephoned the police station of that area stating she was being sexually assaulted. The police acted in prompt manner, beating his male partner black and blue, right in front of her eyes, dragged him to the police station.

The girl who did not imagine such fatal consequences and to an extent feeling sorry about the whole episode informed the police officer in the police station that her complaint was fake! She telephoned merely to teach a fitting lesson to his male partner! Perhaps she did not want that matter should reach to their homes, which was going to be the case in next few minutes. The police, taking a liberal view on the whole episode, released both of them warning them not to indulge in such drama again, which involved police. The couple promising them to behave responsibly left the police station with happy and relaxed faces. Such boyfriends, new face of masculinity in modern times would grow in numbers, willing to serve their girlfriends at all costs, no matter if it involves putting at stake one’s self-respect! 

Girlfriends Would Continue To Exploit Men At All Levels!

Girlfriends Would Continue To Exploit Men At All Levels!

Reference:

India Today 

News Item Published In Dainik Jagaran

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अंतराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाने की जरुरत क्यों आन पड़ी? अंतराष्ट्रीय पुरुष दिवस की सार्थकता और उपयोगिता.

Take Men More Seriously!

Take Men More Seriously!


अंतराष्ट्रीय पुरुष दिवस उन्नीस नवंबर को सत्तर से अधिक देशो में मनाया जाता है जिसमे त्रिनिदाद एंड टोबैगो, जमैका, ऑस्ट्रेलिया, भारत, चीन, यूनाइटेड स्टेट्स, रोमानिया, सिंगापुर, माल्टा, यूनाइटेड किंगडम, साउथ अफ्रीका, तंज़ानिया, ज़िम्बाब्वे, बोत्सवाना, हंगरी, आयरलैंड,घाना, कनाडा, डेनमार्क, नॉर्वे, ऑस्ट्रिया, बोस्निआ एंड हेर्ज़ेगोविना, फ्रांस, इटली, पाकिस्तान, अंटीगुआ एंड बारबुडा, सेंट किट्स एंड नेविस, सेंट लूसिया, ग्रेनेडा एंड केमन आइलैंड्स आदि देश शामिल है प्रमुख रूप से। इस सन्दर्भ में व्यापक ग्लोबल समर्थन हासिल हुआ इस दिवस को.

अंतराष्ट्रीय पुरुष दिवस का आयोजन सर्वप्रथम त्रिनिदाद एंड टोबैगो में 1999 से शुरू हुआ डॉक्टर जेरोम टिलक सिंह के द्वारा जिनके लिए उनके पिता एक रोल मॉडल थें.

अंतराष्ट्रीय पुरुष दिवस की जरूरत क्यों?

अंतराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाने का मुख्य प्रयोजन पुरुषत्व और पुरुष होने की भावना का सम्मान करना है.

ये इस वजह से भी मनाया जाना आवश्यक है कि ताकि पुरुषो ने समाज के उत्थान और विकास के लिए जो सहयोग दिया उसको मान्यता मिले; वे जो बलिदान देते है अपनों के लिए उसको महसूस किया जा सके; और वे जिन समस्यायों से ग्रसित है उसके बारे में समाज और औरो को अवगत कराया जा सके.

इस दिवस को मनाने का एक प्रमुख कारण ये भी है कि कुछ प्रमुख समस्याएँ जो पुरुष वर्ग के सामने उभर के आती है उनके बारे में समाज में चेतना जाग्रत किया जा सके.

पुरुष वर्ग को अक्सर समाज के हाथो उपहासत्मक, नकारात्मक और उपेक्षा से ग्रसित मानसिकता का सामना करना पड़ता है जिसकी वजह से अक्सर वे कई प्रकार के मानसिक विकृतियों का शिकार हो जाते है और ऐसा इसलिए होता है क्योकि वे अक्सर अपने समस्याओं को लोगो से नहीं बाँटते है और उन्हें अपने तक ही सीमित रखते है. इस ना बांटने के वजह से ये भ्रम पैदा हो जाता है कि पुरुषों की जिंदगी बिल्कुल चिकनी सड़क के सामान है जिसपे कोई अवरोध नहीं है जबकि हकीकत ये है कि इनकी राहे कांटो से भरी रहती है. और इस अज्ञानता के कारण समाज सही ढंग से कभी भी पुरुषो के अधिकारो पर नहीं  गौर करता है और ना ही उनके हितो को प्राथमिकता देता है.

इस दिवस पर ये एक दिन इस बात को समर्पित है कि हम पुरुषो के प्रति अपनी कृतज्ञता जता सके, जिन्होंने दुनिया जो बेहतर बनाने के खातिर अपने पसंदगी और नापसंदगी और अपने हितो को ताक पर रख दिया।थीम 2013:इस बार का अंतराष्ट्रीय पुरुष दिवस इस बात को समर्पित है कि पुरुषो को बोलना चाहिए ( अपने समस्याओ के सन्दर्भ में) और लोगो के बीच अपनी बाते बांटनी चाहिए।

आज पुरुष के ऊपर कार्य को उत्कृष्ट तरीके से करने का अत्यधिक दबाव है जो पुरुषत्व की भावना के प्रधान होने के कारण उन्हें जड़ और कठोर बना दे रहा है. पुरुष होने के नाते ये अपमानजनक सा लगता है अगर वे अपने समस्यायों के बारे में लोगो से बात करते है और औरो को इससे अवगत कराते है. बांटने का खतरा ये रहता है कि इन बातो कि वजह से वो उपहास का बिंदु बन सकता है और अगर वो ना बांटे तो वो अहंकारग्रस्त करार दे दिया जाता है.

पुरुष होना आज के युग में अपने कुछ नए मायने लेके आया है, कुछ नए लक्ष्य लेके आया है. अंतराष्ट्रीय पुरुष दिवस पर पुरुष इस बात के लिए प्रेरित होते है कि वे पुरुष होने के महत्व और चुनौतियों पर बात कर सकते है.

पुरुष के पास अपनी समस्याएँ रखने का कोई उचित मंच या स्पेस नहीं है. पुरुषो के समस्याओं पर मुख्यधारा के मीडिया में शायद ही चर्चा होती हो. उसकी एक वजह ये है कि पुरुष कभी नहीं अपने दुखो, चिंताओ और तनाव पर लोगो के बीच विचार विमर्श करते है.  

अपने में सीमित रहने कि एक वजह ये है कि बचपन से इन्हे गलत संस्कारो के बीच पाला पोसा जाता है जहा बहुत ज्यादा अपने बारे में बोलने को पुरुषत्व के विपरीत माना जाता है. सो ये अक्सर सुनने में आता है जहा पे एक लड़के को ये कहा जाता है कि क्यों लड़कियो की तरह रो रहे हो … मर्द बनो!

इस तरह के गलत सुझाव् जो बचपन से पुरुषो के मन पर थोप दिए जाते है उनकी वजह से ये होता है कि वो कभी भी खुलकर अपनी बाते बांटने में झिझकता है और कतराता है. अपनी तमाम समस्यायों और उलझनो को अपने में कैद करके रखता है जिसकी वजह से मनोवैज्ञानिक रूप से उसका सही विकास अवरुद्ध हो जाता है.

इस वजह से सारी  समस्याएं इस प्रकार से उसके अंदर फँस जाती है जिस तरह एक नाली में सें गंदे पानी का बहाव का रुक जाना। इस वजह से वे कई प्रकार की बीमारियो का शिकार हो जाते है. समाज को आगे बढ़कर पुरुषो की इन समस्याओं को समझना पड़ेगा। इनके भावनाओ और जस्बातों को ठीक ठीक समझना होगा।

वे दिन शायद अब सिर्फ किसी सपने के समान है जब समस्या से दो चार होने पर पुरुष एकांतवास ले लेते थे किसी गुफा में.

इस वजह से पुरुषो को ना सिर्फ अपने को बेहतर तरीके से अपने को अभिव्यक्त करना सीखना पड़ेगा बल्कि अपने साथी पुरुष मित्रो के भावनाओ, समस्याओ और दुखो को सही सही समझने की कला विकसित करनी  पड़ेगा। अक्सर हम अपने साथी पुरुष मित्रो के समस्याओं को कमतर करके आंकते है. इस गलत प्रवत्ति पर अंकुश लगाना पड़ेगा। सो इस बार के अंतराष्ट्रीय पुरुष दिवस का विषय है कि पुरुष मुखर हो ( अपने समस्याओ के सन्दर्भ में) और लोगो के बीच अपनी बाते रखे.

The Society Should Stop Undermining The Contributions Made By Men!

The Society Should Stop Undermining The Contributions Made By Men!

पुरुषो के मुख्य मुद्दे:

पुरुष कई प्रकार के समस्याओ से जूझ रहे है जिनके बारे में लोगो को जानकारी ना होने के कारण, चेतना के अभाव के कारण समाज में पुरुष विरोधी माहौल व्याप्त रहता है. कुछ प्रमुख मुद्दे इस प्रकार से है:

पुरुषो के साथ अक्सर भेद भाव होता है पारिवारिक न्यायालयों में.

इस बात की सम्भावना नब्बे प्रतिशत तक है कि अगर तलाक होता है तो पिता अक्सर बच्चे पर अपना कानूनी हक़ खो देते है.

विवाहित पुरुष विवाहित स्त्रियो के मुकाबले दुगने रफ़्तार से आत्महत्या करते है.

सरकार और न्यायालयों के पास विवाहित पुरुषो के आत्महत्या को रोकने की कोई नीति नहीं है.

अगर महिला पुरुष का शोषण करती भी है तो भी समाज ऐसी महिलाओ को सजा  नहीं देता है.

स्त्रियो की अपेक्षा पुरुष चार गुना अधिक रफ़्तार से हादसो में मरते है.

समाज ने पुरुष को इस सांचे में ढाल रखा है कि वे सब तरह का जोखिम उठाते है, अपनी जाने गंवाते है और वो भी ज्यादातर अवैतनिक मजदूर की तरह.

पुरुष जो आहुति देते है, जो बलिदान करते है उनका कोई मोल नहीं होता और वे मात्र उनका कर्तव्य मान लिया जाता है.

पुरूष जो समाज के उत्थान में अपना सहयोग देते है वे अक्सर चर्चा का विषय नहीं बनती और ये सहयोग इतिहास के पन्नो में कही दब सा जाता है.

ये तो केवल कुछ ही मुद्दे है जो अभी उभर कर आये है. अभी बहुत से मुद्दे है जो तह में दबे हुए है और जिन पर अभी चर्चा होनी बाकी है.

पिताओ के मुख्य मुद्दे:

पिता भी कई मुद्दो से रूबरू है जो संक्षेप में इस प्रकार है:

अलगाव के उपरान्त अगर पिता अपने बच्चे से मिलना चाहे या उनके साथ समय बिताना चाहे तो उसे कई प्रकार से अपमानित होना पड़ता है.

ऐसे कई पिता है जिनको अपनी अत्याचारी पत्नियों के हाथो कई प्रकार की मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है, इमोशनल ब्लैकमेल होना पड़ता है अगर वे अलगाव के बाद अपने बच्चो से मिलने का प्रयास करते है.

अगर क़ानूनी तौर पे अलगाव हो गया है तो अक्सर पिता को अपने बच्चो से मिलने नहीं दिया जाता, उन्हें एक दूसरे के साथ समय नहीं व्यतीत करने दिया जाता।

न्यायालय और समाज के द्वारा पिता को सिर्फ “एटीएम मशीन” और “स्पर्म डोनर” मान लिया गया है जिसकी वजह से भारतीय समाज “फ़ादरलेस सोसाइटी” की तरफ बढ़ चला है.

अंतराष्ट्रीय स्तर पर हुए शोधो और अध्ययन से ये पता चला है कि “फ़ादरलेस सोसाइटी” में निम्नलिखित बाते प्रधान है:

पिता के अस्तित्व से वंचित समाज में बच्चे:

पांच गुना अधिक आत्महत्या करते है.

बत्तीस गुना अधिक सम्भावना रहती है उनके घर से भागने की.

बीस गुना अधिक  इस बात कि सम्भावना है कि उनमे व्यवहार सम्बधित दोष उत्पन्न हो जाए.

चौदह गुना इस बात कि सम्भावना है कि वे बलात्कार करे.

नौ गुना अधिक वे हाई स्कूल की पढाई से वंचित रह जायेंगे मतलब अधूरी छोड़ देंगे।

१० गुना इस बात कि अधिक सम्भावना है कि वे ड्रग्स लेने के आदि हो जाए.

नौ गुना इस बात कि सम्भावना है कि वे राज्य द्वारा स्थापित संस्थानो के भरोसे रह जाए जीवन यापन के लिए.

बीस गुना इस बात कि सम्भावना है कि वे जेल जाने को मजबूर हो जाए.

इस प्रकार के समाज में तीन मिलियन लड़किया सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीसेस से पीड़ित है और इस प्रकार के समाज में चार में से एक टीनेजर बच्चा सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीसेस से पीड़ित है.

सिफ्फ़ और क्रिस्प के बारे में:

सेव इंडियन फॅमिली फाउंडेशन एक गैर सरकारी संगठन (NGO) है जो पुरुषो के अधिकारो के लिए लड़ रही है, लिंगभेदी कानूनो के खात्मे के लिए प्रयासरत है और समाज में व्याप्त पुरुषो के प्रति घृणा के खात्मे के प्रति प्रतिबद्ध है. ये भारत में शुरू पहला ऐसा संगठन है जो पुरुषो को एक मंच प्रदान करता है अपनी बात रखने का, अपने चुनौतियों का जिक्र करने का और जिन विपरीत परिस्थितयो में वे काम कर रहे है खासकर वैवाहिक समस्याओं के सन्दर्भ में उनके बारे में खुलकर अपनी बाते रखने के लिए. सिफ्फ़ रिश्तो के उलझाव में फंसे पुरुषो को उनसे निदान पाने के बारे में रास्ते दिखाता है, उन्हें प्रक्षिक्षण देता है और ऐसा कॉर्पोरेट संस्थाओ के लिए काम करने वाले पुरुषो के लिए भी किया जा रहा है. अब तक हज़ारो पीड़ित पुरुषो ने सिफ्फ़ से जुड़कर समस्यायों से निज़ात पाने में कामयाबी पायी है.

चिल्ड्रन राइट्स इनिशिएटिव फॉर शेयर्ड पैरेंटिंग (CRISP) एक गैर सरकारी संघटन (NGO) है जो पिताओ को अपने बच्चो से तादात्म्य स्थापित करने में सहयोग प्रदान करता है खासकर उस स्थिति में जहाँ माता पिता के बीच अलगाव हो गया हो. क्रिस्प ने कई अवसरों पर विधि आयोग से संवाद स्थापित किया है और सांसदो से मुलाकात कर पिताओ के बच्चे के प्रति लगाव को अधिक संवेदनशीलता से देखे जाने का अनुग्रह किया है. अब क्योंकि ज्यादा से ज्यादा पुरुष सरंक्षक की भूमिका का निर्वाहन करने में सलंग्न है क्रिस्प का कहना ये है कि अलगाव की स्थिति में शेयर्ड पैरेंटिंग मतलब संयुक्त रूप से पालन पोषण को अनिवार्य कर दिया जाए.

Is Violence Against Men At Hands Of Women Not An Issue?

Is Violence Against Men At Hands Of Women Not An Issue?

The post also got extensive coverage in leading Hindi Newspapers, courtesy Rajesh Vakahariaji, President, Save India Family Foundation, Nagpur, Maharashtra:

The post got featured in Navbharat which is a leading newspaper in Maharashtra :-)

The post got featured in Navbharat which is a leading newspaper in Maharashtra :-)

 

 

Reference: 

The article is based on literature provided by SIFF and CRISP

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Acute Power Failure In Allahabad: Kareli Power Substation And Other Substations In Huge Mess

 

 

That's Kareli Power Substation. Notice That It's Locked From Outside During Duty Hours. That's The Way It Functions!

That’s Kareli Power Substation. Notice That It’s Locked From Outside During Duty Hours. That’s The Way It Functions!

The political party which has no sound policies cash in on populist measures to gain power. If such a political party somehow manages to register its presence in corridors of power, it proves to be an ominous sign for the growth of democracy. Uttar Pradesh is facing similar crisis in the regime of Samajwadi Party. Right from series of communal riots in various parts of states to administrative failures in various major cities the state has been held hostage to dangerous elements masquerading in various forms. The Samajwadi Party wooed young voters by promising laptops and nobody questioned the utility of launching such scheme at cost of taxpayers’ hard earned money. Look at the irony involved that state is reeling under worse power crisis. It appears laptops provided by this government get recharged by darkness! The same money spent on laptops, tablets and etc. could have been diverted to improve the infrastructure involved in production of power. It’s no secret that most power houses operating in state are operating with help of worn out machinery. However, you can’t expect such measures from a government run by unethical minds.

Allahabad, most important city after Lucknow, which is on paper getting 21 hours power supply, is facing huge power crisis. Let’s take into cognizance working of one of the power substations operating in Allahabad, which is home of eminent intellectuals, bureaucrats, writers, poets, judges and journalists. One example is suffice to have idea of how the system is operating under this government’s rule. Kareli power house, an important substation, which supplies power to Kareli and other adjoining areas like Bhavapur, is in total disarray because of its incompetent officials and poor management. It’s now very clear that may be in Mayawati’s regime there were huge scams at ministerial level, the bureaucratic machinery still remained under awe of strict punishment in case of non performance of duty. Under this regime absence of such threat of getting punishment has led to lawlessness and haughtiness on part of officials.

The Kareli substation under Maywati’s regime was one of the best substations operating in the city having a smooth supply in both Hindu and Muslim colonies, even in peak hours during some important festivals like Dussehara or Eid. A telephone was always there to register the complaint of aggrieved consumers and the fault was dealt with in a conscious time bound manner. The same substation is now working in most shabby manner. The employees stationed here are rude while dealing with consumers besides being incompetent. They are not bothered as to how to ensure smooth power supply. Many linemen/technicians on condition of anonymity stated that there is nobody to check huge power theft in this area. As a result of this power theft as many as 20 transformers have blasted in one single month. The staff operating at power houses often gets beaten at the hands of angry public. Prima facie one always blames citizens for such display of violence and angry reactions but if we delve deeper into the cause of mob violence one would realize that ordinary citizens are not that guilty.

For instance at Kareli substation during some critical faults there is no one present to register the complaints of consumers. There is also no telephone, and thus, one living at a distance has to travel many kilometers to reach this substation. Imagine the state of the mind of such consumer if he/she finds that gates are locked from outside during working hours! If the same consumer tries to contact with higher officials over telephone, the officers at the other end don’t give much importance to his/her problems. So what options do power house officials leave for aggrieved consumers other than to react violently? Bhavapur area which is major Hindu colony having distinguished citizens faced 18 hours power failure for two consecutive days which included Dussehara day. Can one imagine the level of collective anger of such residents?

Most of the areas, falling under this substation, for past one and half months are facing huge power cuts. Earlier it was informed that feeders were being changed along with replacement of incoming panel. The residents of this area kept quiet but people lost their cool when even after removal of major faults the areas like Bhavapur, Nihalpur and etc. remained dark for more than 10 or 12 hours at a stretch while the adjoining Muslim areas like Akbarpur remained above such power cuts! The whole Navaratri celebrations along with tableau exhibition was marred by absolute darkness. In fact, this substation is working in a dangerous way too. That’s because no employee of higher rank is placed at this substation. As a result of that staff which is comprised of linemen and few technicians are either missing in night schedule or if that’s not the case they are involved in drinking of beer. Just few weeks ago, a lineman involved in repairing work at Kareli substation in inebriated state suffered serious injuries.

This government has failed to realize that citizens are not impressed by populist measures. To win their hearts the government needs to improve the functioning of public administration. What prevented it to improve the quality of services provided by government bodies? Instead of doing that it’s engaged in divisive policies, which involve huge wastage of taxpayer’s money. It’s time for the electorate to realize that during voting it’s better to have in their view right aspects instead of being swayed by flawed populists measures of parties devoid of vision and sound principles.

Distributing laptops when the whole state is reeling under total darkness! The same taxpayers' money could have been used to improve power supply.

Distributing laptops when the whole state is reeling under total darkness! The same taxpayers’ money could have been used to improve power supply.


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अँधेरे के मनहूस गर्त में डूबी उत्तर प्रदेश सरकार

ये है करेली पॉवर हाउस.  आप खुद देखे किस तरह ड्यूटी आवर्स में इस पर ताला लगा है. ये तब होता है जब कोई बड़ी फाल्ट आ गयी होती है. कर्मचारी बजाय शिकायत सुनने के इस तरह ताला लगाकर गायब हो जाते है.

ये है करेली पॉवर हाउस. आप खुद देखे किस तरह ड्यूटी आवर्स में इस पर ताला लगा है. ये तब होता है जब कोई बड़ी फाल्ट आ गयी होती है. कर्मचारी बजाय शिकायत सुनने के इस तरह ताला लगाकर गायब हो जाते है.


लैपटॉप बाटती उत्तर प्रदेश की सरकार को शायद इस बात की परवाह नहीं कि बिन रौशनी के ये लैपटॉप कूड़े के ढेर में फेंकने लायक चीज़ है. इस सरकार को शायद ये एहसास नहीं कि जनता इस तरह के वाहियात स्कीम से खुश नहीं होती। जनता तब प्रसन्न रहती है जब जनता से सरोकार रखती आवश्यक सेवाए सुचारू रूप से पहुचती रहती है. लेकिन जिस सरकार में मंत्री और अफसर दोनों बेलगाम घोड़े की तरह हो गए हो वहा फरियाद करने का क्या औचित्य? इलाहाबाद एक महत्वपूर्ण शहर है ये बताने की जरूरत नहीं लेकिन यहाँ जिस तरह सरकारी संस्थाए काम कर रही उससे लगता नहीं लखनऊ में बैठे आकाओ या इलाहाबाद  में खुद इस सरकार के नुमाइन्दो को कोई फिक्र है यहाँ के हालातो से. इलाहाबाद में जब सारे शहर में दशहरे की धूम थी शहर का एक ख़ास इलाका भावापुर जो करेली पॉवर हाउस से संबद्ध है अँधेरे में डूबा रहा दो दिनों तक लगातार। सिर्फ दो दिनों तक अँधेरे में डूबे रहता तो कोई बड़ी बात नहीं थी. ये इलाका पिछले ढेढ़ महीने से बिजली की समस्या से जूझ रहा. हद तब हो गयी जब दशहरे के दिन और उसके अगले दिन १८ घंटो से अधिक बिजली बेवजह गायब रही. और यहाँ का एक मंत्री को ये सफ़ेद झूठ बोलते लाज नहीं आई कि इलाहबाद शहर में तो २१ घंटे बिजली आती है! 

मायावती के शासन काल में कम से कम सरकारी अफसरों में एक जवाबदेही का भय था. यही करेली का सबस्टेशन सबसे बेहतर पॉवर हाउस में से एक था मायावती के शासन में. पब्लिक की  समस्या को सुनने के लिए एक टेलीफोन भी था जिससे कम से कम शिकायत तो दर्ज हो ही जाती थी. समाजवादी पार्टी के सत्ता में आते ही इस पॉवर स्टेशन के अधिकारी निरंकुश हो गए. टेलीफोन कहा गया पूछने पर कर्मचारी बत्तमीजी से बतायेंगें कि खो गया है! दशहरे के अवसर पर किसी इलाके की बिजली अट्टारह घंटो से अधिक काट देना एक जुर्म है क्योकि शिकायत करने पर कुछ घंटो में बिजली देने का प्रावधान है.लेकिन इस करेली पॉवर स्टेशन में फैली दुर्दशा इस सरकार में फैली अराजकता को स्पष्ट दर्शाती है और ये दिखा जाती है कि इस सरकार की  कार्यप्रणाली किस प्रकार की है. 

इस पॉवर स्टेशन में पिछले डेढ़ महीनो से समस्या चल रही है. पहले पहल पूछने पर ये बताया जाता था कि फीडर बदले जा रहे है और उसके बदलते ही इस इलाके में ट्रांसफार्मर फूंकने इत्यादि की समस्या हल हो जायेगी. इस बाबत अधिकारियों के बयान कई दिनों तक अखबार में छपते रहे और जनता धैर्य धारण किये रही. बिजली के अधिकारी लोगो को आप अक्सर सुनते मिल जायेंगे कि साहब फला केंद्र पर कर्मचारियों को पब्लिक ने पीटा. अधिकारी इसके पहले अपनी करतूतों को जाहिर भी कर दिया करे तो बेहतर रहेगा!  इस करेली पॉवर स्टेशन पे फैली अराजकता को देखे और ये पाठक सोच कर बताये जब पानी की किल्लत, गर्मी और उमस से जूझती जनता की समस्या को पॉवर हाउस के कर्मचारी/अधिकारी संज्ञान में लेना जरूरी ना समझे तो क्या हो? यहाँ के इलाके के अधिकतर ट्रांसफार्मर फूँक गए है. क्यों? क्योकि यहाँ के अधीनस्थ कर्मचारी नाम न छपने के शर्त पर ये आपको बता देंगे कि अफसरों ने कितने अवैध कनेक्शनो को कम क्षमता वाले ट्रांसमिशन पर डाल रखा है. क्या नतीजा होगा इसका? 

आप पूछेंगे क्यों नहीं अधिकारी इस बात को ध्यान में लेते? तो इस सबस्टेशन की कहानी ये है कि इस पॉवर हाउस में कोई अधिकारी तकरीबन ना के बराबर बैठता है. इसका नतीजा ये है कि लाइनमैन टाइप के लोग रहते है जिनको अगर कोई हादसा हो जाए तो ये भी नहीं मालूम कि करना क्या है. क्योकि कोई अधिकारी भी नहीं बैठता लिहाजा नीचे के कर्मचारी या तो आपको मिलेंगे नहीं या अगर दिखे भी तो ड्यूटी के वक्त दारुबाज़ी जैसी हरकतों में लिप्त मिलेंगे. अगर कोई बड़ी फाल्ट आ गयी तो ये सबस्टेशन में ताला लगाकर भाग जायेंगे. इसी सबस्टेशन पर कुछ दिनों पहले एक कर्मचारी नशे में पोल पर चढ़ गया और बड़े हादसे का शिकार हो गया. अगले दिन इलाहाबादी पत्रकारों ने पत्रकारिता के गिरते स्टैण्डर्ड को दर्शाते हुए इस घटना को गायब करते हुएं लिखा कि हाई टेंशन वायर टूट जाने से करेली सबस्टेशन की बिजली गुल!

ये पॉवर स्टेशन मुस्लिम  बहुल्य  इलाके में पड़ता है. इस वक्त इस केंद्र में अधिकतर इसी वर्ग के कर्मचारी भी तैनात है जो कितने काबिल है वो आप अगर ऑफ द रिकार्ड अधीनस्थ कर्मचारियों से पूछे तो खुद समझ में आ जाएगा! ये बताना कोई बहुत जरूरी ना होता अगर इस इलाके में इस बात की सुगबुगाहट ना होती कि इस दशहरे में इस तरह के लापरवाही सुनियोजित थी. जाहिर है ये बात इस केंद्र से के कर्मचारियों के बीच से ही उठी है. इसी शहर में कुछ दिनों पहले अखिलेश यादवजी का आगमन हुआ. जिस करेली केंद्र को अधिकारी अभी कई दिनों से बुरी तरह फाल्ट ग्रसित बता रहे थें उसी से अबाधित २४ घंटे बिजली आई. उनके जाने के अगले दिन बिजली फिर चली गयी. केंद्र फिर फाल्टग्रस्त हो गया!

खैर मै सुनी सुनाई बातो पे कम यकीन रखता हूँ. दशहरे के दूसरे दिन जब बिजली सब जगह आ रही थी (भावापुर से जुड़े मुस्लिम इलाको जैसे अकबरपुर इत्यादि में) पर भावापुर में बिजली नदारद थी. फ़ोन करने किसी अधिकारी के पास सिवाय बहानेबाजी के कोई ठोस जवाब नहीं था कि क्यों ऐसा हो रहा है और ऐसा कब तक होगा. ये इस सबस्टेशन की कहानी नहीं है. ये इस सरकार की विकृत और बीमार मानसिकता की निशानी है. शायद इस सबस्टेशन के लाइनमैन दबी ज़बान में कडुवा सच कह रहे है कि इस तरह के गैर जिम्मेदार अफसरों के रहते आप किस सुधार की कल्पना कर सकते है! तकलीफ इस बात की भी है कि इसी इलाके में हाई कोर्ट के अधिकारी, अन्य विभागों के अधिकारी, हाई कोर्ट के जज भी रहते है. शहर के अन्य उच्च अधिकारी अगर इस बात को संज्ञान में नहीं ले रहे है तो ये क्यों खामोश बैठे है?  इस इलाके की साधारण पब्लिक जो अब बहुत गुस्से में आ गयी है वो शायद पीटने पाटने के सिवाय कुछ ज्यादा ना करे लेकिन हाई कोर्ट या इस शहर के अन्य अधिकारी तो इस करेली केंद्र के कर्मचारियों/ अधिकारियो को उनकी इस लापरवाही पर कड़ी सजा दिला सकते है. यही करने का वक्त आ गया है. सुधार ऐसे ही आता है.

लैपटॉप बाटने से पहले बिजली तो ठीक तरह से देना सीखे ये सरकार!! सरकारी पैसा बिजली देने में लगाए बेहतर नतीजे मिलेंगे।

लैपटॉप बाटने से पहले बिजली तो ठीक तरह से देना सीखे ये सरकार!! सरकारी पैसा बिजली देने में लगाए बेहतर नतीजे मिलेंगे।

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If you obey all the rules, you miss all the fun.

A day without sunshine is like, well you know, night.

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